डेनमार्क में हरियाणा के डा. अमित मलिक ने रचा इतिहास, अपना ही रिकॉर्ड तोड़कर फिर साबित किया फिटनेस का जुनून
डेनमार्क में डॉ. अमित मलिक ने तीसरी बार IRONMAN पूरा कर अपना रिकॉर्ड तोड़ा। करीब 12 घंटे में चुनौती पूरी कर भारतीय प्रतिभागियों में दूसरा स्थान हासिल किया।
➤ डेनमार्क में डॉ. अमित मलिक ने रचा इतिहास, अपना ही रिकॉर्ड तोड़कर फिर साबित किया फिटनेस का जुनून
➤ मनोरोग विशेषज्ञ ने तीसरी बार IRONMAN में लिया हिस्सा, करीब 12 घंटे कुछ मिनट में पूरी की 226.3 किमी की चुनौती
➤ विपरीत हवाओं के बावजूद भारतीय प्रतिभागियों में दूसरा स्थान, युवाओं को लक्ष्य और ऊर्जा सही दिशा में लगाने का संदेश
पानीपत के RTS/Artios Hospital के साइकाइट्री विभाग के HOD डॉ. अमित मलिक ने डॉक्टर के पेशेवर दायित्वों के साथ फिटनेस के क्षेत्र में भी एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। डेनमार्क में आयोजित प्रतिष्ठित IRONMAN Triathlon प्रतियोगिता में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना ही पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया। बेहद कठिन परिस्थितियों, तेज हवाओं और विपरीत दिशा से आती हवाओं के बावजूद डॉ. अमित मलिक ने करीब 12 घंटे कुछ मिनट में रेस पूरी की और अपनी उपलब्धियों में एक और बड़ी कामयाबी जोड़ दी।
डॉ. अमित मलिक इससे पहले भी IRONMAN प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं और डेनमार्क में यह उनका तीसरा IRONMAN प्रदर्शन था। लगातार प्रशिक्षण, अनुशासन और फिटनेस के प्रति समर्पण के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। खास बात यह रही कि इस बार उन्होंने अपनी पिछली टाइमिंग को पीछे छोड़ते हुए अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया।
IRONMAN क्या है, क्यों मानी जाती है इतनी कठिन
IRONMAN दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रायथलॉन प्रतियोगिताओं में शामिल है। इसमें तैराकी, साइकिलिंग और मैराथन रनिंग तीनों को एक ही प्रतियोगिता का हिस्सा बनाया जाता है। प्रतिभागियों को कुल 226.3 किलोमीटर यानी 140.6 मील की दूरी निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करनी होती है।
प्रतियोगिता की शुरुआत 3.8 किलोमीटर ओपन-वॉटर स्विमिंग से होती है। इसके बाद प्रतिभागियों को 180 किलोमीटर साइकिलिंग करनी होती है। यह चरण शरीर के साथ-साथ मानसिक मजबूती की भी बड़ी परीक्षा होता है। इसके बाद अंतिम चरण में 42.2 किलोमीटर यानी पूरी मैराथन दौड़नी होती है।
इस तरह एक ही प्रतियोगिता में 3.8 किलोमीटर तैराकी, 180 किलोमीटर साइकिलिंग और 42.2 किलोमीटर रनिंग शामिल होती है। कुल मिलाकर प्रतिभागी को 226.3 किलोमीटर की कठिन चुनौती का सामना करना पड़ता है। पूरी IRONMAN रेस निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करनी होती है और औसतन कई प्रतिभागी इसे करीब 12 से 14 घंटे में पूरा करते हैं।
डेनमार्क में करीब सात भारतीयों ने लिया हिस्सा, डॉ. अमित मलिक दूसरे स्थान पर
डेनमार्क में आयोजित इस प्रतियोगिता में भारत से भी करीब सात प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें डॉ. अमित मलिक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय प्रतिभागियों में दूसरा स्थान हासिल किया।
उनकी उपलब्धि की खास बात यह रही कि उन्होंने अपनी पिछली टाइमिंग को पीछे छोड़ते हुए अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया। IRONMAN जैसी कठिन प्रतियोगिता में यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें केवल शारीरिक ताकत ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती, धैर्य, अनुशासन और लंबे समय तक लगातार बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता की जरूरत होती है।
समुद्र नहीं था, स्विमिंग पूल में घंटों अभ्यास कर तैयार की रणनीति
डॉ. अमित मलिक की तैयारी भी अपने आप में प्रेरणादायक रही। आसपास समुद्र उपलब्ध नहीं होने के बावजूद उन्होंने स्विमिंग पूल में घंटों अभ्यास किया और खुद को ओपन-वॉटर स्विमिंग के लिए तैयार किया।
उन्होंने साइकिलिंग और रनिंग के साथ तैराकी की लगातार प्रैक्टिस की। फिटनेस पर नियमित ध्यान और लंबे समय तक चली ट्रेनिंग के जरिए उन्होंने खुद को IRONMAN जैसी कठिन प्रतियोगिता के लिए तैयार किया।
एक ओर वह अस्पताल में साइकाइट्री विभाग की जिम्मेदारी संभालते हैं, वहीं दूसरी ओर अपनी फिटनेस और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए नियमित प्रशिक्षण करते हैं। पेशेवर जिम्मेदारियों और खेल के प्रति जुनून के बीच संतुलन बनाना उनकी उपलब्धि का अहम हिस्सा रहा।
विपरीत हवाओं ने बढ़ाई मुश्किल, फिर भी नहीं टूटा हौसला
डॉ. अमित मलिक के मुताबिक डेनमार्क में प्रतियोगिता के दौरान हवाओं की दिशा और तेज गति ने चुनौती को और कठिन बना दिया था। साइकिलिंग के दौरान विपरीत दिशा से चलने वाली तेज हवाओं के कारण अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी। ऐसे हालात में बेहतर टाइमिंग हासिल करना आसान नहीं था।
इसके बावजूद उन्होंने अपनी रणनीति और धैर्य बनाए रखा। कठिन परिस्थितियों के बीच उन्होंने रेस पूरी की और अंततः अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ने में कामयाब रहे।
डॉ. अमित मलिक का कहना है कि यदि मौसम और हवाओं का रुख अनुकूल होता तो वह अपनी टाइमिंग में इससे भी बेहतर सुधार कर सकते थे।
तीन बार IRONMAN में शानदार प्रदर्शन, डॉक्टर के साथ एथलीट की भी पहचान
डॉ. अमित मलिक की कहानी इसलिए खास है क्योंकि वह पेशे से साइकाइट्रिस्ट हैं, लेकिन फिटनेस के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। IRONMAN जैसी प्रतियोगिता के लिए महीनों की तैयारी, सख्त अनुशासन, फिटनेस ट्रेनिंग और मानसिक मजबूती की जरूरत होती है।
इसके बावजूद उन्होंने अपने पेशेवर दायित्वों के साथ इस चुनौती को स्वीकार किया और लगातार तीसरी बार IRONMAN में हिस्सा लेकर शानदार प्रदर्शन किया। उनकी उपलब्धि उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है जो व्यस्त प्रोफेशनल जिंदगी के कारण फिटनेस और अपने लक्ष्य के लिए समय निकालना मुश्किल मानते हैं।
युवाओं को संदेश, अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाएं
डॉ. अमित मलिक युवाओं को संदेश देते हैं कि जीवन में लक्ष्य तय करना जितना जरूरी है, उससे कहीं ज्यादा जरूरी अपनी ऊर्जा और क्षमता को सही दिशा में लगाना है।
उनका कहना है कि यदि व्यक्ति अपने गोल को लेकर स्पष्ट हो और अपनी शक्ति को सही दिशा में लगाए तो कठिन से कठिन काम भी धीरे-धीरे आसान लगने लगता है। IRONMAN में उनका लगातार प्रदर्शन इसी सोच का उदाहरण है।
डॉ. अमित मलिक की उपलब्धि क्यों है खास
➤ डेनमार्क की अंतरराष्ट्रीय IRONMAN प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन
➤ अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़कर नई टाइमिंग दर्ज की
➤ करीब 12 घंटे कुछ मिनट में पूरी की चुनौती
➤ भारतीय प्रतिभागियों में दूसरा स्थान हासिल किया
➤ तीसरी बार IRONMAN में हिस्सा लिया
➤ पेशे से साइकाइट्रिस्ट और अस्पताल में विभागाध्यक्ष हैं
➤ स्विमिंग पूल में लंबे अभ्यास के जरिए की तैयारी
➤ विपरीत हवाओं और कठिन परिस्थितियों के बावजूद हासिल की उपलब्धि
➤ युवाओं को फिटनेस, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश दिया
जुनून हो तो कोई लक्ष्य बड़ा नहीं
डॉ. अमित मलिक की यह उपलब्धि सिर्फ एक रेस पूरी करने की कहानी नहीं है। यह बताती है कि व्यस्त प्रोफेशनल जिंदगी के बीच भी अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, अनुशासन हो और खुद पर विश्वास हो, तो इंसान अपनी सीमाओं को लगातार आगे बढ़ा सकता है।
डेनमार्क की कठिन परिस्थितियों में अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ना डॉ. अमित मलिक के लिए एक बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धि है। डॉक्टर के रूप में मरीजों की सेवा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एथलीट के तौर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करना उनके जुनून, मेहनत और मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है।
डॉ. अमित मलिक की यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने जीवन में कोई बड़ा लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं। सही दिशा में लगाई गई मेहनत न केवल उपलब्धि दिलाती है, बल्कि इंसान को अपनी ही बनाई सीमाओं से आगे बढ़ने का हौसला भी देती है।
Akhil Mahajan