जन्माष्टमी व्रत में क्या खाएं? इन चीजों से रहें दूर, वरना गैस-अपच कर सकती है परेशान

जन्माष्टमी व्रत में फल, दूध, दही और नारियल पानी ले सकते हैं। तली-भुनी चीजों से बचें और व्रत खोलते समय हल्का भोजन लेकर धीरे-धीरे सामान्य डाइट अपनाएं।

जन्माष्टमी व्रत में क्या खाएं? इन चीजों से रहें दूर, वरना गैस-अपच कर सकती है परेशान

जन्माष्टमी व्रत में फल, दूध, दही और नारियल पानी ले सकते हैं
तली-भुनी व्रत वाली चीजें गैस और अपच की परेशानी बढ़ा सकती हैं
व्रत खोलते समय भी भारी भोजन से बचें, धीरे-धीरे सामान्य डाइट पर आएं

इस बार 4 सितंबर को जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के मौके पर बड़ी संख्या में लोग व्रत रखते हैं। कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कई लोग फलाहार या व्रत में खाई जाने वाली चीजों का सेवन करते हैं। ऐसे में व्रत के दौरान खानपान का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है, क्योंकि गलत तरीके से खाने-पीने पर गैस, अपच, कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

हर व्यक्ति का स्वास्थ्य एक जैसा नहीं होता। लंबे समय तक खाली पेट रहने या जरूरत से ज्यादा तला-भुना खाना खाने से कुछ लोगों को परेशानी हो सकती है। इसलिए व्रत में ऐसे खाद्य पदार्थों का चुनाव करना जरूरी है, जो शरीर को एनर्जी देने के साथ हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद करें।

जन्माष्टमी व्रत में क्या खा सकते हैं?

व्रत के दौरान कई तरह की फलाहारी चीजों का सेवन किया जा सकता है। इनमें केला, सेब, पपीता, अनार और संतरा जैसे फल शामिल हैं। इसके अलावा दूध, दही और छाछ भी लिया जा सकता है। शरीर में पानी की कमी से बचने के लिए नारियल पानी भी एक विकल्प है।

व्रत में बादाम, अखरोट, काजू और किशमिश सीमित मात्रा में खाए जा सकते हैं। साबूदाना खिचड़ी या साबूदाने से बनी अन्य व्रत वाली डिश भी खाई जाती है। इसके अलावा कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने पराठे और चीले भी व्रत में खाए जाते हैं।

मखाने को हल्का भूनकर या दूध के साथ लिया जा सकता है। वहीं आलू और शकरकंद का सेवन भी व्रत के दौरान सीमित मात्रा में किया जा सकता है।

इन फलाहारी चीजों से बचना बेहतर

व्रत में कुछ चीजें अनुमत होने के बावजूद ज्यादा मात्रा में या तली हुई होने के कारण परेशानी पैदा कर सकती हैं। साबूदाना वड़ा और साबूदाना पापड़ आमतौर पर ज्यादा तेल में तले जाते हैं, जिससे इनमें कैलोरी और वसा की मात्रा बढ़ जाती है।

इसी तरह कुट्टू या सिंघाड़े की तली हुई पूरी खाने से पेट भारी हो सकता है और अपच की समस्या पैदा हो सकती है। आलू के चिप्स और तले हुए आलू में तेल और नमक की मात्रा अधिक हो सकती है। बाजार में मिलने वाली कई व्रत वाली नमकीन में भी नमक, तेल और कैलोरी अधिक होती है।

मूंगफली और काजू पोषक तत्वों और अच्छे वसा के स्रोत हैं, लेकिन इन्हें बहुत ज्यादा मात्रा में खाने से कैलोरी काफी बढ़ सकती है। इसी तरह अधिक चीनी वाली मिठाइयां, हलवा या मीठे पेय लेने से रक्त शर्करा तेजी से बढ़ सकती है।

व्रत में सेंधा नमक इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे अधिक मात्रा में लेना सही है। बाजार में मिलने वाले पैकेज्ड व्रत खाद्य पदार्थों में अतिरिक्त नमक, चीनी, तेल और अन्य सामग्री हो सकती है, इसलिए इनका सेवन भी सोच-समझकर करना चाहिए।

व्रत के दौरान सेहत का भी रखें ध्यान

व्रत के दौरान शरीर को लंबे समय तक बिना पानी और भोजन के रखने से कुछ लोगों को कमजोरी, चक्कर या सिरदर्द की समस्या हो सकती है। इसलिए अपनी सेहत और व्रत की पद्धति के अनुसार खानपान का चुनाव करना जरूरी है। पानी, नारियल पानी, दूध या अन्य अनुमत तरल पदार्थों के जरिए शरीर को हाइड्रेट रखने की कोशिश करनी चाहिए।

अगर कोई व्यक्ति निर्जला व्रत रख रहा है तो उसे अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है। गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और किसी बीमारी या नियमित दवा का सेवन करने वाले लोगों को व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेने की बात कही गई है।

व्रत खोलते समय भी बरतें सावधानी

सिर्फ व्रत के दौरान ही नहीं, बल्कि व्रत खोलते समय भी सावधानी जरूरी है। लंबे समय तक खाली पेट रहने के बाद अचानक बहुत ज्यादा तला-भुना या भारी खाना खाने से पेट संबंधी परेशानी हो सकती है। इसलिए व्रत खोलने के बाद पहले हल्का भोजन लेना और धीरे-धीरे सामान्य डाइट पर आना बेहतर बताया गया है।

जन्माष्टमी का व्रत धार्मिक आस्था से जुड़ा है, लेकिन इसके साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। फल, दूध-दही, नारियल पानी और सीमित मात्रा में मेवे जैसे विकल्प व्रत के दौरान लिए जा सकते हैं, जबकि बहुत ज्यादा तला-भुना, मीठा और पैकेज्ड फलाहार पेट के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।