राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा बने पहले CEO; गोविंद देव गिरि को महासचिव की जिम्मेदारी

राम मंदिर ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को पहला CEO बनाया, गोविंद देव गिरि महासचिव बने और तीन नए ट्रस्टी शामिल किए गए हैं।

राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा बने पहले CEO; गोविंद देव गिरि को महासचिव की जिम्मेदारी

पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने
गोविंद देव गिरि को महासचिव, 3 नए ट्रस्टी भी शामिल
ट्रस्ट के पास 32 किलो सोना, 1518 किलो चांदी और ₹1876 करोड़ कैश


अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के प्रशासन और रोजाना के कामकाज को लेकर बड़ा बदलाव किया है। पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO बनाया गया है। ट्रस्ट ने बुधवार को इसकी घोषणा की। जीतेंद्र मिश्रा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख रहे हैं और भारतीय वायुसेना में करीब 39 साल सेवाएं दे चुके हैं।

ट्रस्ट के इस बदलाव में गोविंद देव गिरि को नया महासचिव बनाया गया है। इससे पहले वह ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। बैठक में ट्रस्टी बनाए गए महेश भागचंदका को अब कोषाध्यक्ष का दायित्व दिया गया है। नए CEO जीतेंद्र मिश्रा और कोषाध्यक्ष, दोनों महासचिव गोविंद देव गिरि को रिपोर्ट करेंगे।

इसके साथ ही ट्रस्ट में 3 नए सदस्य भी शामिल किए गए हैं। इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के एडवोकेट मदन मोहन पांडेय और RSS समर्थक शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं। निर्मला यादव ट्रस्ट की पहली महिला ट्रस्टी होंगी।

चढ़ावा चोरी के मामले के तीन महीने बाद हुआ बड़ा बदलाव

ट्रस्ट में यह प्रशासनिक बदलाव मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले के सामने आने के करीब 3 महीने बाद हुआ है। इस मामले में 8 आरोपी जेल में हैं। इसके बाद 2 जुलाई को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया था।

इन इस्तीफों के बाद रिटायर्ड IFS कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया था। वह 58 दिनों तक इस पद पर रहे। अब ट्रस्ट ने स्थायी तौर पर जिम्मेदारियों में बदलाव करते हुए गोविंद देव गिरि को महासचिव की जिम्मेदारी दी है।

पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को ही CEO क्यों बनाया गया?

जीतेंद्र मिश्रा के चयन के पीछे उनके सैन्य और प्रशासनिक अनुभव को अहम माना गया है। वह ऑपरेशन सिंदूर में पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे। इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वोच्च युद्ध सेवा मेडल (SYSM) भी मिला।

जीतेंद्र मिश्रा का संबंध देवरिया, उत्तर प्रदेश से है। वह करीब 40 साल भारतीय वायुसेना में रहे और कई महत्वपूर्ण कमांड संभाले। मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, निर्माण कार्य और रोजाना के बड़े स्तर के संचालन को देखते हुए उनके सैन्य प्रशासनिक अनुभव को महत्वपूर्ण माना गया है।

ट्रस्ट के स्तर पर CEO की नियुक्ति का उद्देश्य मंदिर के बढ़ते प्रशासनिक कामकाज के लिए एक ऐसे पूर्णकालिक अधिकारी की व्यवस्था करना है, जो रोजाना अयोध्या में मौजूद रहकर पूरे सिस्टम की निगरानी कर सके।

गोविंद देव गिरि को महासचिव की बड़ी जिम्मेदारी

गोविंद देव गिरि राम मंदिर ट्रस्ट के गठन के समय से ही इससे जुड़े हुए हैं। 5 फरवरी, 2020 को ट्रस्ट बना था और तब से वह कोषाध्यक्ष के रूप में मंदिर की वित्तीय जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के समय भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने प्रधानमंत्री से 11 दिन का अनुष्ठान कराया था। बाद में पंचामृत पिलाकर अनुष्ठान पूरा कराया गया।

चढ़ावा चोरी के विवाद के दौरान भी गोविंद देव गिरि ने ट्रस्ट का पक्ष मजबूती से रखा। गड़बड़ियों को रोकने के लिए चढ़ावा गिनती में बिना जेब की वर्दी और CCTV नियम लागू किए गए।

गोविंद देव गिरि को 6 भाषाओं का ज्ञान है। वह मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के उपाध्यक्ष भी हैं। इसके अलावा वह 29 राज्यों में 37 वेद विद्यालय चला रहे हैं। अब महासचिव के रूप में उनके पास ट्रस्ट की महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी होगी।

CEO के नीचे काम करेगी 1,500 से 2,000 कर्मचारियों की टीम

राम मंदिर ट्रस्ट के सामने अब मंदिर के नियमित संचालन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इसी को देखते हुए CEO के नेतृत्व में एक प्रोफेशनल टीम काम करेगी।

इस टीम में इंजीनियर, फाइनेंशियल एक्सपर्ट और करीब 1,500-2,000 कर्मचारी शामिल होंगे। CEO के जिम्मे मंदिर की सुरक्षा, चढ़ावा, AI कैमरे, भीड़ प्रबंधन, कर्मचारियों और निर्माण कार्यों की निगरानी रहेगी।

ट्रस्ट की व्यवस्था में ऊपर चेयरमैन होंगे, उनके नीचे CEO और CEO के नेतृत्व में पूरी प्रोफेशनल टीम मंदिर के रोजाना के कामकाज को संभालेगी।

मौजूदा IAS के बजाय रिटायर्ड अधिकारी को प्राथमिकता

CEO की नियुक्ति को लेकर ट्रस्ट की व्यवस्था के अनुसार मंदिर प्रशासन को सरकार के बजाय सीधे ट्रस्ट के नियंत्रण में रखने की प्राथमिकता रही। इसी वजह से मौजूदा सरकारी अधिकारी के बजाय रिटायर्ड IAS या उसके बराबर अनुभव रखने वाले अधिकारी को प्राथमिकता दी गई।

CEO के चयन के लिए तीन सदस्यों की समिति बनाई गई थी। समिति ने उम्मीदवारों की छंटनी के बाद तीन नाम ट्रस्ट के सामने रखे। इन्हीं नामों में से जीतेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO चुना गया।

ट्रस्ट के ज्यादातर ट्रस्टी दूसरे शहरों में रहते हैं और नियमित रूप से अयोध्या में मौजूद नहीं रहते। ऐसे में एक पूर्णकालिक अधिकारी की जरूरत महसूस की गई, जो मंदिर में रोज मौजूद रहकर व्यवस्था की निगरानी कर सके।

राम मंदिर ट्रस्ट के पास कितना सोना और चांदी है?

राम मंदिर निर्माण से लेकर अब तक मंदिर को चढ़ावे के रूप में 32 किलो सोना और 1518 किलो चांदी मिली है।

चांदी की धातुओं को ट्रस्ट सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को भेजकर गलवाता है। इसके बाद ट्रस्ट को 99.99% शुद्ध चांदी की ईंट तैयार कर लौटाई गई। इसे ट्रस्ट ने बैंक लॉकर में सुरक्षित रखा है।

ट्रस्ट के बैंक खातों में ₹1876 करोड़ जमा

6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में मंदिर को मिले चढ़ावे और उसके खर्च का ब्योरा रखा गया था। श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक में खाते हैं।

इन खातों में कुल ₹1876 करोड़ जमा हैं। मंदिर निर्माण के समय समर्पण निधि के रूप में ₹3264 करोड़ मिले थे। मंदिर के चढ़ावे से ₹582 करोड़ प्राप्त हुए।

इनमें से ₹2370 करोड़ मंदिर निर्माण पर और ₹391 करोड़ मैनेजमेंट पर खर्च किए गए।

अब ट्रस्ट के सामने मंदिर के रोजाना संचालन की बड़ी जिम्मेदारी

राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या और मंदिर से जुड़े कामकाज के विस्तार के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं। ऐसे में ट्रस्ट ने पहली बार CEO का पद बनाकर रोजाना के संचालन को एक पूर्णकालिक अधिकारी के अधीन करने का फैसला किया है।

जीतेंद्र मिश्रा के सैन्य अनुभव, गोविंद देव गिरि की ट्रस्ट में लंबे समय से भूमिका और तीन नए ट्रस्टियों के शामिल होने के बाद मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है।

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि पहले CEO के तौर पर जीतेंद्र मिश्रा मंदिर की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, चढ़ावे, निर्माण और करीब 1,500-2,000 कर्मचारियों वाली प्रोफेशनल व्यवस्था को किस तरह संचालित करते हैं।