हरियाणा में गन्ने के ₹600 रेट को लेकर किसान महापंचायत, रादौर में कल जुटेंगे प्रदेशभर के किसान; चढ़ूनी करेंगे मंथन
हरियाणा के रादौर में गन्ने के ₹600 रेट, MSP और बढ़ती खेती लागत को लेकर किसान महापंचायत होगी। गुरनाम सिंह चढ़ूनी आगे की रणनीति पर मंथन करेंगे।
➤ रादौर में कल प्रदेश स्तरीय किसान महापंचायत, गन्ने के ₹600 रेट पर होगी चर्चा
➤ गुरनाम सिंह चढ़ूनी और सत्यवान नरवाल की अगुवाई में प्रदेशभर से जुटेंगे किसान
➤ MSP, स्वामीनाथन आयोग और बढ़ती खेती लागत पर भी बनेगी आगे की रणनीति
रादौर। हरियाणा में एक तरफ चीनी के बढ़ते दाम आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गन्ना उत्पादक किसानों को उनकी फसल का उचित भाव नहीं मिलने का मुद्दा फिर गरमाता दिखाई दे रहा है। इसी को लेकर भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी ने आर-पार की रणनीति की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए रादौर में कल प्रदेश स्तरीय किसान महापंचायत आयोजित की जा रही है।
महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी और प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल समेत प्रदेशभर से बड़ी संख्या में किसान नेताओं और किसानों के पहुंचने की संभावना है। किसान संगठनों ने महापंचायत को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं।
इस महापंचायत में केवल गन्ने के रेट का मुद्दा ही नहीं उठेगा, बल्कि खाद-बीज, दवाइयों, कृषि यंत्रों, डीजल, मजदूरी और खेती की लगातार बढ़ती लागत के बीच किसानों की घटती आमदनी समेत कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके अलावा MSP, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप फसल मूल्य और सरकार की कृषि नीतियों को लेकर भी आगे की रणनीति पर मंथन किया जाएगा।
चीनी के दाम बढ़ रहे तो गन्ने का भाव क्यों नहीं बढ़ा, किसानों का सवाल
किसान नेताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि बाजार में चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन जिस किसान की फसल से चीनी तैयार होती है, उसे उसकी उपज का पर्याप्त मूल्य क्यों नहीं मिल रहा।
गुरनाम सिंह चढ़ूनी का कहना है कि एक तरफ आम आदमी महंगी चीनी खरीदने को मजबूर है, वहीं दूसरी तरफ गन्ना पैदा करने वाले किसान को ऐसा भाव नहीं मिल रहा, जिससे उसकी बढ़ती उत्पादन लागत पूरी हो सके।
किसानों का तर्क है कि खेती में इस्तेमाल होने वाली लगभग हर चीज महंगी हो चुकी है। खाद, कीटनाशक और दवाइयों के दाम बढ़े हैं। कृषि यंत्रों की कीमतों में इजाफा हुआ है। डीजल और मजदूरी का खर्च भी बढ़ा है। इसके बावजूद किसान की फसल के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़ रहे हैं।
इसी असंतुलन को लेकर रादौर की महापंचायत को किसान संगठन महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
गन्ने के ₹600 प्रति क्विंटल रेट की मांग पर होगा मंथन
महापंचायत का सबसे प्रमुख मुद्दा गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल किए जाने की मांग रहने वाला है। किसान नेताओं का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में गन्ने की खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसानों को फसल का ऐसा भाव मिलना चाहिए, जिससे खेती लाभकारी बन सके और किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो सके।
महापंचायत में इस मांग को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। किसान नेता यह तय कर सकते हैं कि सरकार के सामने ₹600 प्रति क्विंटल की मांग किस तरह मजबूती से रखी जाए। यदि मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं होता है तो भविष्य में किस तरह का आंदोलन किया जाए, इस पर भी चर्चा हो सकती है।
खेती की लागत बढ़ी, आमदनी घटने से किसानों में बढ़ रहा आक्रोश
किसान नेताओं के मुताबिक, आज किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती खेती की लागत और घटती आमदनी है। खाद से लेकर दवाइयों तक, कृषि यंत्रों से लेकर डीजल तक और मजदूरी से लेकर सिंचाई तक खेती का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
दूसरी ओर फसल बेचते समय किसानों को अपेक्षित मूल्य नहीं मिल पाता। किसानों का कहना है कि अगर उत्पादन लागत इसी तरह बढ़ती रही और फसलों के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़े तो आने वाले समय में खेती करना और मुश्किल हो जाएगा।
इसी मुद्दे को लेकर महापंचायत में व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए आगे की दिशा तय करने पर चर्चा होगी।
MSP से लेकर स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों तक उठेंगे मुद्दे
रादौर में होने वाली महापंचायत में किसानों की ओर से सरकार के सामने कई मांगें रखने की रणनीति पर चर्चा हो सकती है। इनमें गन्ने का ₹600 प्रति क्विंटल भाव, फसलों के लिए उचित MSP और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप फसल मूल्य की मांग प्रमुख रहेगी।
इसके अलावा खाद और कृषि दवाइयों की बढ़ती कीमत, कृषि यंत्रों और डीजल की बढ़ती लागत तथा खेती की लगातार बढ़ती उत्पादन लागत जैसे मुद्दे भी उठाए जाएंगे।
महापंचायत में किसान नेताओं और किसानों की राय लेकर यह तय किया जाएगा कि इन मुद्दों को सरकार तक किस तरीके से मजबूती के साथ पहुंचाया जाए।
सरकार को घेरने की रणनीति पर भी हो सकता है फैसला
महापंचायत को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि किसान नेता पहले ही संकेत दे चुके हैं कि अगर सरकार किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती तो आगे संघर्ष का रास्ता अपनाने पर विचार किया जा सकता है।
हालांकि महापंचायत में अंतिम फैसला क्या होगा, यह बैठक के दौरान किसान नेताओं और किसानों की राय सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा। इसके बावजूद प्रदेशभर के किसानों से बड़ी संख्या में रादौर पहुंचने की अपील किए जाने से साफ है कि किसान संगठन इस आयोजन को महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
सत्यवान नरवाल ने किसानों से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की
भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल ने किसानों से अधिक से अधिक संख्या में रादौर पहुंचने और महापंचायत को सफल बनाने की अपील की है।
किसान नेताओं का कहना है कि जब तक किसान एकजुट होकर अपनी आवाज मजबूती से नहीं उठाएगा, तब तक सरकार के सामने अपनी मांगों को प्रभावी तरीके से रखना मुश्किल होगा। इसी वजह से आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ हरियाणा के अलग-अलग हिस्सों से किसानों को रादौर पहुंचने का आह्वान किया गया है।
महापंचायत में किसानों की समस्याओं और मांगों को लेकर प्रदेशभर से आने वाले किसानों की राय भी ली जाएगी।
तीन कृषि कानूनों के आंदोलन के बाद फिर संघर्ष के संकेत
किसान आंदोलनों के इतिहास को देखते हुए रादौर की यह महापंचायत काफी अहम मानी जा रही है। किसान नेता इससे पहले केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में बड़े आंदोलन का हिस्सा रह चुके हैं।
उस दौरान दिल्ली की सीमाओं पर लंबे समय तक किसानों ने आंदोलन किया था और देशभर में कृषि कानूनों को लेकर बड़ा राजनीतिक संघर्ष देखने को मिला था। अब एक बार फिर गन्ने के भाव, MSP और खेती की बढ़ती लागत जैसे मुद्दों को लेकर किसान संगठन सक्रिय होते दिखाई दे रहे हैं।
ऐसे में यदि रादौर की महापंचायत में कोई बड़ा आंदोलनात्मक फैसला लिया जाता है तो आने वाले दिनों में हरियाणा की राजनीति और किसान आंदोलन दोनों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने गन्ने के उचित भाव को लेकर उठाया सवाल
गुरनाम सिंह चढ़ूनी लगातार किसानों के मुद्दों को लेकर मुखर रहे हैं। उनका कहना है कि जब आम आदमी बाजार में महंगी चीनी खरीदने को मजबूर है तो गन्ना पैदा करने वाले किसान को भी उसकी फसल का उचित मूल्य मिलना चाहिए।
किसानों का कहना है कि गन्ने से चीनी तैयार होने तक पूरी प्रक्रिया में कई स्तर होते हैं, लेकिन किसान को उसकी फसल की लागत और मेहनत के अनुरूप पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता। इसी वजह से गन्ने के भाव को लेकर किसान संगठनों की मांग लगातार तेज होती जा रही है।
महापंचायत में इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा
रादौर की महापंचायत में मुख्य रूप से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल किए जाने की मांग सबसे प्रमुख है।
इसके साथ ही किसानों को फसलों का उचित MSP देने, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार फसल मूल्य तय करने, खाद और कृषि दवाइयों की बढ़ती कीमत तथा कृषि यंत्रों और डीजल की बढ़ती लागत पर भी चर्चा होगी।
किसान नेता खेती की लगातार बढ़ती उत्पादन लागत, किसानों की आमदनी और खर्च के बीच बढ़ते अंतर तथा फसलों के उचित मूल्य को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर भी मंथन करेंगे। मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन की आगे की रणनीति और प्रदेशभर के किसानों को एकजुट करने की योजना भी चर्चा का हिस्सा हो सकती है।
अब रादौर महापंचायत के फैसले पर टिकी निगाहें
रादौर में होने वाली किसान महापंचायत अब केवल एक सामान्य बैठक तक सीमित नहीं मानी जा रही है। गन्ने के भाव से लेकर MSP और खेती की बढ़ती लागत तक कई बड़े मुद्दे इसमें उठने वाले हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि क्या महापंचायत में किसानों की मांगों को लेकर कोई बड़ा और कड़ा फैसला लिया जाएगा। क्या सरकार को मांगों का ज्ञापन देकर बातचीत का रास्ता अपनाया जाएगा या फिर आंदोलन की घोषणा की जाएगी? क्या गन्ने के ₹600 प्रति क्विंटल भाव की मांग को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन की रणनीति तैयार होगी?
इन तमाम सवालों के जवाब रादौर की महापंचायत में सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल किसान नेताओं की ओर से प्रदेशभर के किसानों से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की गई है। ऐसे में अब सभी की निगाहें रादौर पर टिकी हैं कि गुरनाम सिंह चढ़ूनी और किसान नेता महापंचायत के मंच से सरकार को लेकर क्या बड़ा फैसला सुनाते हैं।
Akhil Mahajan