तहसीलदार पर ₹25 हजार जुर्माना,RTI की जानकारी साबित करने में ChatGPT भी फेल,आयोग ने विभाग को लगाई कड़ी फटकार

गुरुग्राम में RTI जानकारी समय पर न देने पर तत्कालीन तहसीलदार सतीश कुमार पर ₹25 हजार जुर्माना लगा। चैटजीपीटी और गूगल से जानकारी साबित करने का प्रयास भी विफल रहा।

तहसीलदार पर ₹25 हजार जुर्माना,RTI की जानकारी साबित करने में ChatGPT भी फेल,आयोग ने विभाग को लगाई कड़ी फटकार

गुरुग्राम के तत्कालीन तहसीलदार सतीश कुमार पर ₹25 हजार का जुर्माना

RTI जानकारी साबित करने के लिए चैटजीपीटी और गूगल सर्च का सहारा, आयोग ने बताया निरर्थक

आयोग की सख्ती, सेवानिवृत्ति होने पर पेंशन से भी वसूली के निर्देश

गुरुग्राम: हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी समय पर और सही तरीके से न देने के एक मामले में सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने कड़ी फटकार लगाते हुए तत्कालीन राज्य जन सूचना अधिकारी-सह-तहसीलदार सतीश कुमार पर ₹25 हजार का जुर्माना लगाया है। मामला इसलिए भी चर्चा में आ गया, क्योंकि सुनवाई के दौरान विभाग के प्रतिनिधि ने सूचना की उपलब्धता साबित करने के लिए चैटजीपीटी और गूगल सर्च जैसे आधुनिक माध्यमों का सहारा लिया, लेकिन यह प्रयास पूरी तरह विफल साबित हुआ। यह आदेश राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा की कोर्ट द्वारा 3 अलग-अलग, लेकिन समान प्रकृति के मामलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए जारी किया गया।

7 नवंबर 2022 को RTI लगाकर मांगी थी प्रशासनिक जानकारी

मामले के अनुसार गुरुग्राम के डीएलएफ निवासी हरिंदर धींगड़ा ने 7 नवंबर 2022 को एक आरटीआई आवेदन दाखिल कर कुछ प्रशासनिक जानकारियां मांगी थीं। अधिनियम के अनुसार यह जानकारी 30 दिनों के भीतर दी जानी अनिवार्य थी, लेकिन तत्कालीन एसपीआईओ सतीश कुमार इसमें पूरी तरह विफल रहे।

लंबे समय बाद 10 मई 2026 को विभाग की ओर से एक अधूरा जवाब दिया गया। इसमें दावा किया गया कि मांगी गई जानकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर पहले से ही मौजूद है। इस जवाब से असंतुष्ट होकर आवेदक ने राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया।

वेबसाइट पर जानकारी लाइव दिखाने में विभाग रहा असफल

मामला जब जून 2026 में आयोग के समक्ष सुनवाई के लिए आया तो एसपीआईओ के प्रतिनिधि ने अपने पुराने रुख का बचाव करने की कोशिश की। जब आयोग ने उनसे वेबसाइट पर उस जानकारी को लाइव दिखाने या एक्सेस करने के लिए कहा, तो वे बार-बार प्रयास करने के बाद भी असफल रहे।

मामला उस समय और चर्चा में आ गया, जब विभाग के प्रतिनिधि ने यह साबित करने के लिए कि जानकारी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ‘चैटजीपीटी’ और सामान्य ‘गूगल सर्च’ का सहारा लिया। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा कि एआई और गूगल के माध्यम से जानकारी की उपलब्धता दर्शाने का यह अनोखा प्रयास पूरी तरह से निरर्थक और बेअसर साबित हुआ।

आयोग के अनुसार इससे साफ हो गया कि विभाग ने गलत और भ्रामक दलील देकर आवेदक को गुमराह किया था।

सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने जताई नाराजगी

राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने इस रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आरटीआई आवेदनों को निपटाने में अधिकारियों द्वारा दिखाई जा रही इस तरह की लापरवाही और ढीला ढाला रवैया पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि बिना किसी उचित कारण के देरी करना दंडात्मक कार्रवाई को आमंत्रित करता है।

आयोग ने पाया कि हालांकि बाद में आयोग के कड़े हस्तक्षेप के बाद 21 अगस्त 2026 को आवेदक को पूरी जानकारी उपलब्ध करा दी गई थी, लेकिन यह कार्रवाई शुरुआती वैधानिक चूक को खत्म नहीं करती।

तीन महीने में जमा करने होंगे ₹25 हजार

आयोग ने अधिकारी सतीश कुमार पर ₹25,000 का कुल जुर्माना लगाते हुए इसे तीन महीने के भीतर सरकारी खाते में जमा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही गुरुग्राम के उपायुक्त को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस जुर्माने की वसूली सुनिश्चित करें।

आदेश में विशेष रूप से यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि संबंधित अधिकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं तो नियमानुसार यह राशि उनकी पेंशन से वसूली जाए। आयोग ने उच्च अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि वे देरी के कारणों की जांच करें और दोषी स्टाफ के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करें।

तीन अन्य मामलों में हाईकोर्ट जाने की बात

इस संबंध में शिकायतकर्ता हरेंद्र ढींगरा का कहना है कि उनकी तरफ से चार अपील याचिका दायर की गई थी। जिसमें एक में ये सजा दी गई है, जबकि तीन केस में माफ करते हुए निपटारा कर दिया गया है। हम इन तीन केसों में भी सजा दिलवाने के लिए हाईकोर्ट में अपील करेंगे।