हथिनीकुंड बैराज हादसा: दो जवान अभी भी लापता, 3 बचाए गए, रातभर सर्च ऑपरेशन,हेलिकॉप्टर से भी निगरानी
हथिनीकुंड बैराज में सेना की बोट डूबने से दो जवान लापता हैं। तीन जवान बचाए गए। यमुना में 10 किलोमीटर तक रातभर सर्च ऑपरेशन चला।
➤ हथिनीकुंड बैराज के पास सेना की बोट डूबी, दो जवान 15 घंटे बाद भी लापता
➤ तीन जवान 600 मीटर तैरकर पश्चिमी यमुना नहर के गेट से बाहर निकले, हेलिकॉप्टर से भी निगरानी
➤ यमुना की नहरों में 10 किलोमीटर तक रातभर सर्च, तेज बहाव के बीच आज फिर बड़े स्तर पर तलाश
यमुनानगर। हरियाणा के यमुनानगर जिले में हथिनीकुंड बैराज के पास मंगलवार शाम यमुना नदी में सेना की मोटर बोट डूबने के बाद लापता हुए दो जवानों का करीब 15 घंटे बाद भी कोई पता नहीं चल पाया है। हादसे के बाद मंगलवार शाम करीब 5 बजे शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन पूरी रात जारी रहा। जवानों की तलाश के लिए सेना के साथ हरियाणा और उत्तर प्रदेश की SDRF टीमें, स्थानीय गोताखोर और अन्य बचाव दल जुटे रहे। रात में हेलिकॉप्टर से भी यमुना क्षेत्र की निगरानी की गई।
बैराज से निकलने वाली पूर्वी और पश्चिमी यमुना नहर के किनारों पर सर्च लाइटों के जरिए निगरानी की गई। वहीं नहरों में पानी की सप्लाई कम करके बुधवार को दोबारा बड़े स्तर पर तलाश करने की तैयारी है। तेज बहाव और गहरे पानी के कारण बचाव टीमों के लिए अभियान लगातार चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
हादसा सेना के वन पैरा स्पेशल फोर्स के बाढ़ बचाव अभ्यास के दौरान हुआ। बोट में सवार पांच जवान पानी में डूबने लगे थे। इनमें से तीन जवान करीब 600 मीटर तक तेज बहाव में तैरकर पश्चिमी यमुना नहर (डब्ल्यूजेसी) के गेट से बाहर निकलने में सफल रहे। वहीं दो जवानों का अभी तक पता नहीं चल सका है। लापता जवानों की पहचान महाराष्ट्र निवासी आर्यन पाटिल और जम्मू-कश्मीर के अखनूर निवासी अजय के रूप में हुई है।
रातभर चला सर्च ऑपरेशन, हेलिकॉप्टर से भी हुई निगरानी
दो जवानों के लापता होने की सूचना के बाद बचाव अभियान को तेज कर दिया गया। रातभर सेना, SDRF और स्थानीय गोताखोरों की टीमें अलग-अलग हिस्सों में तलाश करती रहीं। बैराज से निकलने वाली नहरों के किनारों पर सर्च लाइटों की मदद से निगरानी की गई।
हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश की SDRF टीमों को भी अभियान में लगाया गया। सेना के डाइवर्स और स्थानीय गोताखोर भी पानी के भीतर जवानों की तलाश में जुटे रहे। रात के समय हेलिकॉप्टर से भी इलाके पर नजर रखी गई।
तेज बहाव वाले पानी में गोताखोरों के लिए सर्च करना आसान नहीं था। इसके बावजूद बचाव दलों ने नहर के अलग-अलग हिस्सों को खंगालते हुए लापता जवानों तक पहुंचने की कोशिश जारी रखी।
जवानों के लापता होने की सूचना पर मौके पर पहुंचे एसडीएम
जवानों के लापता होने की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी बढ़ा दी। देर रात एसडीएम जसपाल गिल और डीएसपी रजत गुलिया मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने बचाव अभियान का जायजा लिया और मौके पर मौजूद सेना, SDRF तथा पुलिस अधिकारियों से सर्च ऑपरेशन की जानकारी ली।
प्रतापनगर थाना प्रभारी रोहताश सिंह के अनुसार, सूचना मिलते ही हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश SDRF की टीम को भी मौके पर बुलाया गया था। सेना के डाइवर्स और स्थानीय गोताखोर भी दोनों जवानों की तलाश में जुटे हुए हैं।
हथिनीकुंड बैराज से 10 किलोमीटर आगे तक खंगाली नहर
रेस्क्यू टीमों ने हथिनीकुंड बैराज से आगे निकलने वाली नहर में करीब 10 किलोमीटर तक सर्च ऑपरेशन चलाया। हालांकि तेज बहाव के कारण कई जगहों पर गोताखोरों के लिए पानी में उतरना बेहद जोखिम भरा बना हुआ है।
बैराज से निकलने वाली नहर के आगे करीब सात पुल भी पड़ते हैं। इन पुलों के नीचे से पानी काफी तेज गति से बह रहा है। ऐसे में पुलों के आसपास पानी में उतरकर तलाश करना बचाव टीमों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
इसके बावजूद सेना, SDRF और स्थानीय गोताखोर अलग-अलग हिस्सों में लगातार दोनों जवानों की तलाश कर रहे हैं। नहर के किनारे और तेज बहाव वाले हिस्सों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है।
नहर की शाखाओं और झाल पर भी रखी जा रही नजर
गोताखोरों के अनुसार, हथिनीकुंड बैराज से निकलने वाली नहर आगे जाकर कई हिस्सों में बंट जाती है। मुख्य नहर से निकलने वाली कुछ छोटी नहरों पर झाल भी बने हुए हैं।
ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि यदि तेज बहाव में दोनों जवान मुख्य नहर से बहकर किसी दूसरी नहर की तरफ पहुंचे हैं और वहां किसी झाल में फंस गए हैं, तो उनके मिलने की संभावना बन सकती है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए नहर के अलग-अलग हिस्सों पर नजर रखी जा रही है।
प्रशासन ने नहर के किनारे पड़ने वाले सभी गांवों के सरपंचों को भी अलर्ट कर दिया है। उन्हें नहर पर नजर बनाए रखने के लिए कहा गया है। यदि दोनों जवानों में से कोई पानी के बहाव के साथ आगे पहुंचता है या कहीं दिखाई देता है, तो तत्काल प्रशासन और पुलिस को सूचना देने के लिए कहा गया है।
मंगलवार शाम 5 बजे बाढ़ बचाव अभ्यास के दौरान हुआ हादसा
हादसा मंगलवार शाम करीब 5 बजे कलेसर से नीचे और हथिनीकुंड बैराज से कुछ पहले यमुना की अप स्ट्रीम में हुआ था। यहां सेना के वन पैरा स्पेशल फोर्स का बाढ़ बचाव अभ्यास चल रहा था। यह अभ्यास 30 अगस्त से जारी था और मंगलवार को इसका अंतिम दिन था।
बताया जा रहा है कि अभ्यास के दौरान हेलिकॉप्टर से जवान एक-एक करके यमुना में खड़ी मोटर बोट में कूदे। जवानों के बोट में पहुंचने के बाद मोटर बोट स्टार्ट नहीं हुई और अचानक डूबने लगी। इसी दौरान हेलिकॉप्टर भी वहां से निकल गया।
बोट डूबने के बाद जवानों को तेज बहाव और गहरे पानी में उतरना पड़ा। तीन जवान तैरते हुए पश्चिमी यमुना नहर के गेट की तरफ पहुंचे। उन्होंने करीब 600 मीटर का सफर तय किया और बाहर निकलने में सफल रहे।
हालांकि आर्यन पाटिल और अजय का कोई पता नहीं चल सका। इसके बाद सेना और प्रशासन ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया, जो पूरी रात जारी रहा।
पानी का तेज बहाव बना सबसे बड़ी चुनौती
हादसे के समय यमुना में पानी का बहाव काफी तेज था। एक दिन पहले हथिनीकुंड बैराज पर यमुना का जलस्तर करीब 26 हजार क्यूसेक दर्ज किया गया था, जबकि पश्चिमी यमुना नहर में करीब 14,500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था।
तेज बहाव के कारण नहर में सर्च ऑपरेशन चलाना बचाव टीमों के लिए मुश्किल बना हुआ है। कई जगह पानी की रफ्तार इतनी अधिक है कि गोताखोरों के लिए सुरक्षित तरीके से नीचे उतरना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। पुलों के नीचे और नहर की शाखाओं के आसपास भी पानी का बहाव तेज है।
इसी वजह से बचाव दल नहर के किनारों, पुलों, तेज बहाव वाले हिस्सों और आगे निकलने वाली शाखा नहरों पर विशेष निगरानी रख रहे हैं।
आज बड़े स्तर पर फिर शुरू होगा सर्च ऑपरेशन
रातभर चले अभियान के बावजूद दोनों जवानों का कोई सुराग नहीं मिलने के बाद अब बुधवार को बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाने की तैयारी है। सेना, SDRF, स्थानीय गोताखोर और प्रशासन की टीमें नहर के अलग-अलग हिस्सों में तलाश करेंगी।
नहर के किनारों के साथ-साथ पुलों और शाखा नहरों पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी। वहीं नहरों में पानी की सप्लाई कम करके तलाश को आसान बनाने की कोशिश की जाएगी।
पूरे अभियान के दौरान तेज बहाव वाले स्थानों को सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। ऐसे में बचाव टीमें अलग-अलग हिस्सों में लगातार तलाश कर रही हैं, ताकि लापता आर्यन पाटिल और अजय का पता लगाया जा सके।
Akhil Mahajan