33 घंटे बाद हुआ SE गीतू राम तंवर का अंतिम संस्कार, SIT जांच और भत्ते जारी करने के आश्वासन पर माने परिजन
करनाल SE गीतू राम तंवर का 33 घंटे बाद अंतिम संस्कार हुआ। SIT जांच और पेंडिंग भत्ते जारी करने के आश्वासन के बाद परिवार अंतिम संस्कार पर राजी हुआ।
➤ 33 घंटे बाद हुआ SE गीतू राम तंवर का अंतिम संस्कार, SIT जांच पर बनी सहमति
➤ सभी पेंडिंग भत्ते एक हफ्ते में जारी करने का आश्वासन, इसके बाद परिजन अंतिम संस्कार को हुए राजी
➤ FIR में 12 अधिकारियों के नाम को लेकर परिवार का सवाल, पुलिस ने कहा- जांच में दोषी पाए गए तो होगी कार्रवाई
करनाल। करनाल बिजली निगम के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (SE) गीतू राम तंवर का 33 घंटे बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। सोमवार सुबह उनके रिटायरमेंट के दिन उनका शव डीएवी स्कूल के पास खड़ी कार में मिला था। उनके पास से एक सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें बिजली निगम के कई अफसरों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे।
घटना के बाद गीतू राम तंवर के भाई विश्वंबर दयाल तंवर ने कहा था कि जब तक सुसाइड नोट में शामिल अफसरों की गिरफ्तारी और टर्मिनेशन नहीं होता, तब तक वे शव नहीं उठाएंगे। मंगलवार को DSP राजीव कुमार परिजनों से मिलने पहुंचे। उन्होंने पूरे मामले की जांच SIT से कराने का आश्वासन दिया। साथ ही परिजनों को बताया गया कि गीतू राम तंवर के सभी पेंडिंग भत्ते एक हफ्ते के अंदर जारी कर दिए जाएंगे। इन आश्वासनों के बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए राजी हुआ। मंगलवार को गीतू राम तंवर के आवास पर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा। रिश्तेदार और परिचित परिवार के सदस्यों को सांत्वना देने के लिए पहुंचते रहे।
किस अधिकारी पर क्या आरोप
FIR में आरोपियों का कॉलम खाली, परिवार ने उठाए सवाल
इस मामले की FIR कॉपी भी सामने आई है। इसमें तंवर के परिवार की ओर से सुसाइड नोट को ही शिकायत के रूप में दिया गया है। पुलिस ने बीएनएस की धारा-108, 351 और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। बीएनएस की धारा-108 आत्महत्या के लिए उकसाने और धारा-351 प्रतिष्ठा को नुकसान की धमकी से जुड़ी है।
हालांकि FIR में आरोपियों वाले कॉलम को खाली छोड़े जाने पर परिवार ने सवाल उठाए हैं। परिवार की ओर से अधिवक्ता सोनिया तंवर ने कहा कि पुलिस को दी गई शिकायत में 12 अधिकारियों के नाम दिए गए थे। इसके बावजूद पुलिस ने शिकायत के मुताबिक मामला दर्ज नहीं किया और FIR में आरोपियों को अज्ञात दिखा दिया।
सोनिया तंवर ने कहा कि परिवार की मांग है कि शिकायत में दिए गए नामों को FIR में शामिल किया जाए और उनकी भूमिका की जांच की जाए। साथ ही जो लोग दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
पुलिस बोली- 13 लोगों के नाम दिए गए, जांच में दोषी पर होगी कार्रवाई
इस मामले में सेक्टर 32-33 थाना के SHO सुनील कुमार ने बताया कि परिजनों ने जो शिकायत दी और सुसाइड नोट में जिन लोगों के नाम थे, उसी आधार पर पुलिस ने धारा 3(1), 108, 351(3) के तहत मामला दर्ज किया है।
SHO के मुताबिक परिजनों ने कुल 13 लोगों के नाम दिए थे और उन सभी के नाम FIR में दर्ज कर लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट में जिन पुराने वीडियो का जिक्र किया गया है, उनकी भी जांच की जाएगी।
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बेटियों ने कहा- पापा से हंसी-मजाक में बातें बुलवाकर वीडियो एडिट किया गया
गीतू राम तंवर की बेटियों वृंदा और नीति ने अपने पिता को लेकर कई बातें सामने रखीं। परिवार के मुताबिक बड़ी बेटी वृंदा MBBS कर रही हैं, छोटी बेटी नीति इंजीनियरिंग कर रही हैं, जबकि बेटा स्यास्तिक NEET की तैयारी कर रहा है।
वृंदा ने कहा कि कुछ महीने पहले उनके पिता का एक वीडियो वायरल हुआ था। उनके मुताबिक कुछ लोग जान-बूझकर उनके पिता के साथ बैठे और हंसी-मजाक में उनसे कुछ बातें बुलवा लीं, क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि गीतू राम तंवर उस पद पर रहें।
वृंदा का कहना था कि उनके पिता ने कुछ भी गलत नहीं बोला था, लेकिन उन लोगों ने वीडियो को अलग-अलग जगह से काटकर एडिट किया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
उन्होंने बताया कि इसके बाद न्यूज चैनल पर आकर उनके पिता ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी, लेकिन विभाग ने उसी दिन उन्हें सस्पेंड कर दिया। सस्पेंशन के बाद एक-दो महीने बीतने पर गीतू राम तंवर ने एमडी और सीएम तक हर जगह पत्र लिखकर कहा कि उनके साथ गलत हो रहा है और उन्हें बिना वजह इतना अपमानित किया जा रहा है।
वृंदा ने आरोप लगाया कि विभाग ने एक दिखावे की जांच कमेटी बनाई। उनके पिता वीडियो कॉल पर अपनी बात रखते रहे, लेकिन कमेटी वालों ने उनकी एक नहीं सुनी।
छोटी बेटी नीति ने चार अधिकारियों के नाम बताए
छोटी बेटी नीति ने कहा कि उनके पिता ने अपने पत्र में साफ-साफ चार लोगों के नाम लिखे हैं। इनमें रणवीर देशवाल, अश्विनी कौशिक, सतीश गोयल और प्रदीप कुमार के नाम शामिल हैं।
नीति ने कहा कि उनके पिता ने पूरी जिंदगी कानून और नियमों का पालन किया। उन्होंने जाने से पहले परिवार से यही कहा था कि उन्हें न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी है।
परिवार की मांग है कि जिन लोगों को गीतू राम तंवर ने अपनी शिकायतों और पत्रों में जिम्मेदार बताया है, उनकी भूमिका की जांच हो और जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
चार महीने से सस्पेंड थे गीतू राम तंवर
गीतू राम तंवर के एक वीडियो को लेकर विवाद करीब चार महीने पहले शुरू हुआ था। वीडियो में वे जाट समाज पर टिप्पणी करते दिखाई दे रहे थे। इसी वीडियो को लेकर वे चार महीने से सस्पेंड चल रहे थे।
परिवार के मुताबिक पत्नी और बेटियों को घर से निकलते समय गीतू राम तंवर ने कहा था कि “अपनी आखिरी चिट्ठी देकर आता हूं।” इसके बाद उनका शव डीएवी स्कूल के पास कार में मिला।
सुसाइड नोट में उन्होंने पिछले चार महीनों के दौरान डेटवाइज 28 पत्र शासन-प्रशासन को लिखने का जिक्र किया है। परिवार का कहना है कि उन्होंने लगातार अपनी शिकायतों और समस्याओं को अधिकारियों तक पहुंचाया, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला।
भाई बोले- पुलिस डरी हुई है, FIR में 12 घंटे लगाए
गीतू राम तंवर के भाई विश्वंबर दयाल तंवर ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब सोमवार को परिवार FIR करवाने के लिए गया तो उन्हें बताया गया कि सिस्टम नहीं चल रहा है।
विश्वंबर दयाल तंवर के मुताबिक शाम करीब साढ़े 6 बजे परिवार को आधी-अधूरी FIR दी गई, जिसमें आरोपियों के नाम नहीं थे।
उन्होंने सवाल उठाया कि सुसाइड नोट भी शिकायत के साथ पुलिस को दिया गया था, फिर FIR दर्ज करने में इतना समय क्यों लगा। उन्होंने कहा कि 12 घंटे के बाद पोस्टमार्टम हुआ। परिवार ने सवाल किया कि आखिर पुलिस किससे डरी हुई है।
विश्वंबर दयाल तंवर ने प्रशासन से मांग की कि जो भी दोषी हैं, उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाए, ताकि परिवार को न्याय मिल सके।
सुसाइड नोट में फर्जी वीडियो और शिकायतों का जिक्र
गीतू राम तंवर ने अपने सुसाइड नोट में आरोप लगाया कि सोनीपत सर्कल के इंजीनियर रणबीर देशवाल और इंजीनियर अश्विनी कौशिक ने एक फर्जी और एडिटेड यानी डॉक्टर्ड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कराया।
नोट में उन्होंने लिखा कि इसका उद्देश्य उन्हें उकसाना और शांति भंग करना था। विवाद से बचने के लिए उन्होंने 02/04/26 को माफी मांगी, लेकिन उसी दिन उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।
उन्होंने यह भी लिखा कि करीब 3 महीने बाद मिली चार्जशीट का आधार पूछने पर RTI के जरिए पता चला कि इसके पीछे कोई जांच रिपोर्ट ही मौजूद नहीं थी।
27 से ज्यादा शिकायतों का किया जिक्र
गीतू राम तंवर ने अपने नोट में 19 फरवरी 25 से लेकर 26 अगस्त 2026 तक 27 से भी ज्यादा बार पत्र लिखकर एमडी कार्यालय से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने का जिक्र किया है।
उन्होंने पुलिस की FIR नंबर 90, RTI और आयोग तक गुहार लगाने की बात भी लिखी। उनके अनुसार बार-बार मांग करने के बावजूद वायरल वीडियो की कोई फोरेंसिक जांच नहीं कराई गई। उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर दबाव बनाने का भी आरोप लगाया और कहा कि उनका पक्ष तक दर्ज नहीं किया गया।
8.37 करोड़ रुपये की शिकायत का भी नोट में जिक्र
सुसाइड नोट में रणबीर देशवाल की 21 फरवरी 2025 की शिकायत का भी जिक्र किया गया है। इसमें TDI द्वारा 8.37 करोड़ रुपये वापस किए जाने का मामला उठाया गया था।
गीतू राम तंवर के अनुसार उनका आरोप था कि जांच अधिकारी को सबूत देने के बजाय देशवाल ने एक साल से अधिक समय बाद 1 अप्रैल को मीडिया में खबर प्रकाशित कराई।
तंवर के अनुसार इस मामले की जांच हो चुकी थी और मुख्य अभियंता रोहतक ने बीती 23 जून को रिपोर्ट दे दी थी।
जातिगत भेदभाव और राजनीतिक संरक्षण के भी लगाए आरोप
गीतू राम तंवर ने अपने नोट में जातिगत भेदभाव और राजनीतिक संरक्षण से जुड़े आरोप भी लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी अधिकारी रणबीर देशवाल, अश्विनी कौशिक, सतीश गोयत और प्रदीप कुमार अनुसूचित जाति के बॉस को स्वीकार नहीं करते थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन अधिकारियों ने हमेशा सत्ताधारी दल के नेता मोहन लाल बड़ौली से संबंध और अपने प्रभाव का धौंस दिखाया।
तंवर ने यह भी आरोप लगाया कि सामान्य वर्ग के अन्य अधिकारियों मोहित भटनागर और अजय कोहर के वीडियो सामने आने के बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनके अनुसार ये वीडियो बीती 9 अगस्त और 17 अगस्त को एमडी कार्यालय में जमा किए गए थे।
रिटायरमेंट के दिन ही मिला था शव
गीतू राम तंवर के लिए 31 अगस्त 2026 का दिन रिटायरमेंट का था। इसी दिन उनका शव डीएवी स्कूल के पास खड़ी उनकी कार में मिला था। कार से सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें बिजली निगम के कई अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।
परिवार के मुताबिक सेवानिवृत्ति के दिन तक न तो गीतू राम तंवर को बहाल किया गया था और न ही उनका रिटायरमेंट ऑर्डर जारी हुआ था। परिवार ने बताया कि इससे उनके पेंशन लाभ भी रुक गए थे।
पूरे मामले में अब परिवार की प्रमुख मांग जांच को लेकर है। मंगलवार को DSP राजीव कुमार की ओर से SIT जांच का आश्वासन मिलने और पेंडिंग भत्ते एक सप्ताह के भीतर जारी करने की बात कहे जाने के बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए राजी हुआ। पुलिस ने भी कहा है कि जांच के दौरान जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
Akhil Mahajan