SE की मौत के बाद गरमाया मामला, परिवार ने 12 अफसरों पर कार्रवाई की मांग को लेकर शव लेने से किया इनकार

करनाल में रिटायरमेंट के दिन SE गीतूराम तंवर का शव कार में मिला। परिवार ने नोट में नामजद 12 अफसरों की गिरफ्तारी तक अंतिम संस्कार से इनकार किया।

SE की मौत के बाद गरमाया मामला, परिवार ने 12 अफसरों पर कार्रवाई की मांग को लेकर शव लेने से किया इनकार

रिटायरमेंट के दिन कार में मिला SE गीतूराम तंवर का शव
परिवार ने 12 नामजद अफसरों की गिरफ्तारी तक शव लेने से किया इनकार
परिजनों ने जातिगत भेदभाव और कार्रवाई में अनदेखी के लगाए गंभीर आरोप


करनाल। हरियाणा के करनाल बिजली निगम के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (SE) गीतूराम तंवर के सुसाइड केस ने तूल पकड़ लिया है। सोमवार को उनके रिटायरमेंट के दिन उनका शव डीएवी स्कूल के पास खड़ी कार में मिला था। कार से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ, जिसमें उन्होंने बिजली निगम के कई अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए थे। परिवार ने सोमवार को करीब 12 घंटे बाद पोस्टमॉर्टम तो कराया, लेकिन अब तक शव लेने और अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया है।

परिवार की मांग है कि सुसाइड नोट में नामजद 12 अफसरों के खिलाफ एफआईआर में नाम शामिल किए जाएं और उनकी गिरफ्तारी की जाए। मृतक के भाई सुरेश तंवर ने चेतावनी दी है कि जब तक सुसाइड नोट में शामिल एक-एक अधिकारी की गिरफ्तारी और टर्मिनेशन नहीं होता, तब तक परिवार शव नहीं उठाएगा।

एसई गीतूराम तंवर की बेटियों वृंदा और नीति ने कहा कि पापा ने कुछ भी गलत नहीं बोला था, लेकिन वीडियो को एडिट कर वायरल कर दिया गया।

गीतूराम तंवर करीब चार महीने से सस्पेंड चल रहे थे। यह कार्रवाई एक वायरल वीडियो को लेकर हुई थी, जिसमें उन पर जाट समाज के खिलाफ टिप्पणी करने का आरोप लगा था। खास बात यह है कि 31 अगस्त 2026 को ही उनका रिटायरमेंट था। परिवार के मुताबिक, घर से निकलते समय उन्होंने पत्नी और बेटियों से कहा था कि वह अपनी "आखिरी चिट्ठी देकर आता हूं।" इसके बाद उनका शव डीएवी स्कूल के पास खड़ी कार में मिला।

करीब चार माह पहले एसई गीतूराम तंवर का यह वीडियो डीसी कैंप ऑफिस में बनाया गया था। इसमें वे जाट समाज पर टिप्पणी करते दिखाई दे रहे हैं।

परिवार ने कहा- 12 अफसरों की गिरफ्तारी के बाद ही उठाएंगे शव

गीतूराम तंवर के भाई सुरेश कुमार ने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि परिवार जब एफआईआर दर्ज करवाने के लिए पहुंचा तो उन्हें बताया गया कि सिस्टम काम नहीं कर रहा है। उनके मुताबिक, शाम करीब साढ़े 6 बजे उन्हें आधी-अधूरी एफआईआर दी गई, जिसमें आरोपियों के नाम तक शामिल नहीं थे।

सुरेश तंवर का कहना है कि सुसाइड नोट भी शिकायत के साथ पुलिस को सौंपा गया था, इसके बावजूद एफआईआर दर्ज करने में इतना समय लगा। उन्होंने सवाल उठाया कि एक अधिकारी के साथ इतना बड़ा हादसा होने के बाद पोस्टमॉर्टम के लिए भी करीब 12 घंटे क्यों लगे।

उन्होंने कहा कि जब तक सुसाइड नोट में शामिल सभी अधिकारियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक परिवार शव नहीं उठाएगा। परिवार ने प्रशासन से दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने की मांग की है।

एसई गीतू राम तंवर के सुसाइड के बाद फैमिली को संभालती उनकी बेटी।

भाई ने जातिगत भेदभाव का आरोप लगाते हुए उठाया सवाल

सुरेश तंवर ने कहा कि उनके परिवार के साथ जो हुआ, वह गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा, "क्या दलित समाज में जन्म लेकर हमने बहुत बड़ा गुनाह कर दिया।" उनका आरोप है कि उनके भाई ने लगातार अपनी शिकायतें अधिकारियों के सामने रखीं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई।

उन्होंने गीतूराम तंवर के मामले की तुलना IPS वाई पूरन कुमार केस से भी की। परिवार का कहना है कि जिस तरह पूरन कुमार के मामले में जातिगत भेदभाव के आरोप सामने आए थे, उसी तरह गीतूराम तंवर ने भी अपने साथ हो रहे व्यवहार को लेकर शिकायतें की थीं।

परिवार के अनुसार, तंवर ने आईजी सोनीपत और एमडी को शिकायतें दी थीं, लेकिन उन्हें अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली।

बेटियों ने कहा- पापा ने कुछ गलत नहीं बोला, वीडियो एडिट कर वायरल किया गया

गीतूराम तंवर की बड़ी बेटी वृंदा एमबीबीएस कर रही हैं, जबकि छोटी बेटी नीति इंजीनियरिंग कर रही हैं। उनका बेटा स्यास्तिक नीट की तैयारी कर रहा है।

बड़ी बेटी वृंदा ने आरोप लगाया कि कुछ महीने पहले उनके पिता का एक वीडियो वायरल हुआ था। उनके मुताबिक, कुछ लोग जान-बूझकर उनके पिता के साथ बैठे और हंसी-मजाक में उनसे कुछ बातें बुलवा लीं। वृंदा का कहना है कि उन लोगों का उद्देश्य उनके पिता को उस पद पर बने रहने से रोकना था।

उन्होंने कहा कि उनके पिता ने कुछ भी गलत नहीं बोला था, लेकिन वीडियो को अलग-अलग हिस्सों से काटकर एडिट किया गया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। इसके बाद गीतूराम तंवर ने एक न्यूज चैनल पर आकर सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी। वृंदा के अनुसार, इसके बावजूद विभाग ने उसी दिन उन्हें सस्पेंड कर दिया।

बेटी के मुताबिक, लगातार अधिकारियों को पत्र लिखते रहे तंवर

वृंदा ने बताया कि सस्पेंड होने के बाद उनके पिता ने एमडी और सीएम समेत कई स्तरों पर पत्र लिखे। उनका कहना था कि उनके साथ गलत हो रहा है और बिना वजह उन्हें इतना अपमानित किया जा रहा है।

परिवार के मुताबिक, विभाग ने एक जांच कमेटी बनाई थी। तंवर वीडियो कॉल के जरिए कमेटी के सामने अपनी बात रखते रहे, लेकिन बेटी का आरोप है कि कमेटी के सदस्यों ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया।

छोटी बेटी नीति ने कहा कि उनके पिता ने अपने पत्र में रणवीर देशवाल, अश्विनी कौशिक, सतीश गोयल और प्रदीप कुमार के नाम साफ तौर पर लिखे हैं। उनका कहना है कि उनके पिता ने पूरी जिंदगी कानून और नियमों का पालन किया और जाने से पहले परिवार से न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही थी।

सस्पेंशन से सुसाइड तक चार महीने में क्या हुआ

गीतूराम तंवर ने अपने सुसाइड नोट में चार महीने के घटनाक्रम का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि उनके खिलाफ कार्रवाई और शिकायतों को लेकर उन्होंने शासन-प्रशासन को लगातार पत्र लिखे।

एडिटेड वीडियो वायरल होने के बाद उसी दिन हुआ सस्पेंशन

तंवर ने अपने सुसाइड नोट में आरोप लगाया कि सोनीपत सर्कल के इंजीनियर रणबीर देशवाल और इंजीनियर अश्विनी कौशिक ने एक फर्जी और एडिटेड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कराया। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य उन्हें उकसाना और शांति भंग करना था।

तंवर ने लिखा कि विवाद से बचने के लिए उन्होंने 02/04/26 को माफी मांगी, लेकिन उसी दिन उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। उन्होंने यह भी लिखा कि करीब तीन महीने बाद मिली चार्जशीट का आधार पूछने पर आरटीआई से पता चला कि उसके पीछे कोई जांच रिपोर्ट मौजूद नहीं थी।

27 से ज्यादा पत्र लिखने का किया सुसाइड नोट में जिक्र

तंवर ने लिखा कि उन्होंने 19 फरवरी 25 से लेकर 26 अगस्त 2026 तक 27 से भी ज्यादा बार पत्र लिखकर एमडी कार्यालय से दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।

उन्होंने पुलिस, FIR नंबर 90, आरटीआई और आयोग तक शिकायत करने का जिक्र किया। उनके मुताबिक, बार-बार मांग के बावजूद वायरल वीडियो की फोरेंसिक जांच नहीं कराई गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों की ओर से उन पर दबाव बनाया गया और उनका पक्ष तक दर्ज नहीं किया गया।

8.37 करोड़ रुपये की शिकायत का भी सुसाइड नोट में उल्लेख

तंवर ने अपने सुसाइड नोट में रणबीर देशवाल की 21 फरवरी 2025 की शिकायत का भी जिक्र किया। इसमें टीडीआई द्वारा 8.37 करोड़ रुपये वापस किए जाने का मामला उठाया गया था।

तंवर के अनुसार, जांच अधिकारी को सबूत देने के बजाय देशवाल ने एक साल से अधिक समय बाद 1 अप्रैल को मीडिया में खबर प्रकाशित कराई। तंवर ने लिखा कि इस मामले की जांच हो चुकी थी और मुख्य अभियंता रोहतक ने बीती 23 जून को रिपोर्ट दे दी थी।

जातिगत भेदभाव और राजनीतिक संरक्षण के भी लगाए आरोप

तंवर ने आरोप लगाया कि रणबीर देशवाल, अश्विनी कौशिक, सतीश गोयत और प्रदीप कुमार अनुसूचित जाति के बॉस को स्वीकार नहीं करते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि ये अधिकारी सत्ताधारी दल के नेता मोहन लाल बड़ौली से अपने संबंध और प्रभाव का धौंस दिखाते थे।

तंवर ने यह भी आरोप लगाया कि सामान्य वर्ग के अन्य अधिकारियों मोहित भटनागर और अजय कोहर के वीडियो सामने आने के बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनके अनुसार, ये वीडियो बीती 9 अगस्त और 17 अगस्त को एमडी कार्यालय में जमा किए गए थे।

रिटायरमेंट तक बहाली और आदेश नहीं मिलने का लगाया आरोप

तंवर ने लिखा कि उनकी सेवानिवृत्ति यानी 31 अगस्त, 2026 के दिन तक न तो उन्हें बहाल किया गया और न ही रिटायरमेंट ऑर्डर जारी किए गए। उनके अनुसार, इससे उनके पेंशन लाभ रुक गए थे।

उन्होंने अपने पत्रों में यह भी जताया था कि जानबूझकर की जा रही अनदेखी के कारण उनके साथ कोई गंभीर घटना हो सकती है। उन्होंने इसका उल्लेख दिवंगत वाई पूरन कुमार (IPS) के मामले के संदर्भ में किया।

तंवर ने लिखा कि पूरन कुमार ने भी जातिगत भेदभाव की बात कही थी और बाद में डीजीपी समेत 13 अफसरों पर केस हुआ। इसी तरह तंवर ने आरोप लगाया कि 12 अफसरों ने उनके साथ जातिगत भेदभाव किया। उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा कि यदि उन्हें या उनके परिवार को कुछ होता है तो यही अधिकारी जिम्मेदार होंगे।

इसके बाद 31 अगस्त 2026, यानी उनके रिटायरमेंट के दिन, उनका शव डीएवी स्कूल के पास कार में मिला।

अब जानिए किस अधिकारी पर क्या आरोप लगाए गए

रणबीर देशवाल पर शिकायत और विभागीय कार्रवाई में भूमिका का आरोप

तंवर ने आरोप लगाया कि रणबीर देशवाल ने 22 जनवरी को उनके खिलाफ शिकायत की। उसी दिन शिकायत सक्षम प्राधिकारी के सामने रखकर बर्खास्तगी, पेंशन और ग्रेच्युटी जब्त करने जैसी कार्रवाई की सिफारिश कर दी गई।

तंवर का आरोप था कि इस प्रक्रिया में उनकी रिपोर्टिंग अधिकारी की राय नहीं ली गई और उनका पक्ष भी नहीं सुना गया। उन्होंने वीडियो तैयार करने में भी देशवाल की भूमिका होने की आशंका जताई।

अश्विनी कौशिक पर वीडियो तैयार करने में भूमिका का आरोप

तंवर ने आरोप लगाया कि अश्विनी कौशिक ने वीडियो तैयार करने में भूमिका निभाई। उन्होंने दावा किया कि कौशिक अपने पिता के नाम पर प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं और निजी मोबाइल नंबर से आर्थिक लेनदेन करते हैं।

तंवर ने यह भी आरोप लगाया कि कौशिक खुद को भाजपा नेता मोहन लाल बडोली का रिश्तेदार बताते रहे हैं।

हालांकि, दैनिक भास्कर से बातचीत में अश्विनी कौशिक ने कहा कि तंवर से उनका कोई विवाद नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल इसलिए शिकायत की थी क्योंकि तंवर उन्हें गलत बोलते थे। जब उनसे साजिशकर्ता के रूप में नाम होने के बारे में पूछा गया तो कौशिक ने कहा कि इसमें तो सभी के नाम लिखे हुए हैं।

सतीश गोयत और प्रदीप कुमार पर घटनाक्रम तैयार करने का आरोप

तंवर ने सतीश गोयत और प्रदीप कुमार पर रणबीर देशवाल और अश्विनी कौशिक के साथ मिलकर उनके खिलाफ घटनाक्रम तैयार करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि चारों अधिकारियों ने तत्कालीन एसई प्रशासन मनिंदर सिंह और मोहित भटनागर के साथ मिलकर बदले की भावना से कार्रवाई कराई।

मनिंदर सिंह और मोहित भटनागर पर विभागीय कार्रवाई में भूमिका का आरोप

तंवर ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई में मनिंदर सिंह और मोहित भटनागर की भूमिका रही।

उनका दावा था कि मनिंदर सिंह के एसई प्रशासन के कार्यकाल में उन्हें कम समय में छह चार्जशीट और कारण बताओ नोटिस मिले, जबकि 15 साल की नौकरी में इससे पहले कभी इतनी कार्रवाई नहीं हुई थी।

धर्म सुहाग पर निर्धारित रिपोर्टिंग चैनल दरकिनार करने का आरोप

तंवर ने आरोप लगाया कि सोनीपत सर्किल के लिंक अधिकारी इंजीनियर धर्म सुहाग ने उनके खिलाफ गुप्त तरीके से चार्जशीट तैयार की और उसे पानीपत सर्किल के माध्यम से मुख्य अभियंता प्रशासन को भेजा।

उनका आरोप था कि इस प्रक्रिया में निर्धारित रिपोर्टिंग चैनल यानी मुख्य अभियंता रोहतक को दरकिनार किया गया।

राज सिंह, रूपेश और आशीष मेहल पर पर्दे के पीछे समर्थन का आरोप

तंवर ने राज सिंह, रूपेश और आशीष मेहल पर भी आरोप लगाए। उनके अनुसार, इन अधिकारियों ने सामने आकर कोई भूमिका नहीं निभाई, लेकिन जातिगत कारणों से पर्दे के पीछे से दूसरे अधिकारियों को समर्थन दिया।

पुलिस की कार्रवाई पर परिवार ने उठाए सवाल

परिवार का कहना है कि सुसाइड नोट में कई अधिकारियों के नाम और आरोप दर्ज होने के बावजूद एफआईआर में उनके नाम शामिल नहीं किए गए। भाई सुरेश तंवर ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज करने में 12 घंटे का समय क्यों लगा और पोस्टमॉर्टम के लिए भी इतना इंतजार क्यों करना पड़ा।

परिवार ने साफ किया है कि जब तक सुसाइड नोट में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती और उनकी गिरफ्तारी नहीं की जाती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।

गीतूराम तंवर की मौत के बाद परिवार ने इसे केवल एक सुसाइड का मामला मानने के बजाय उनके सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को केंद्र में रखा है।