BJP नेता के इकलौते बेटे के हत्यारे दंपती-बेटे को उम्रकैद
भिवानी में भाजपा नेता गुणपाल के बेटे प्रमोद पूनिया हत्याकांड में शमशेर, सुनीता और नवीन को उम्रकैद मिली, छह साल बाद परिवार को न्याय मिला
➤ प्रमोद पूनिया हत्याकांड में दंपती और बेटे को उम्रकैद
➤ 17 मई 2019 की रात लाठी-डंडों से पीटकर कमरे में किया था बंद
➤ छह साल की कानूनी लड़ाई के बाद पिता गुणपाल ने कहा- बेटे को न्याय मिला
हरियाणा के भिवानी में भाजपा नेता गुणपाल के बेटे प्रमोद पूनिया की हत्या के छह साल पुराने मामले में अदालत ने पति-पत्नी और उनके बेटे को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने शमशेर, उसकी पत्नी सुनीता और बेटे नवीन को हत्या का दोषी माना। प्रमोद को 17 मई 2019 की रात रास्ते में घेरकर लाठी-डंडों से बुरी तरह पीटा गया था। गंभीर रूप से घायल प्रमोद को बाद में कमरे में बंद कर दिया गया था।
परिजनों और पुलिस की मदद से प्रमोद को कमरे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। पहले उसे सिविल अस्पताल भिवानी ले जाया गया, जहां हालत गंभीर होने पर उसे PGI रोहतक रेफर किया गया। इसके बाद 18 मई 2019 को उसे AIIMS ट्रामा सेंटर, दिल्ली में भर्ती कराया गया। यहां ICU में 11 दिनों तक इलाज चलने के बाद 28 मई 2019 को प्रमोद की मौत हो गई।
परिवार की ओर से इस मामले में दंपती सहित कई लोगों के खिलाफ हत्या और अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराया गया था। सुनवाई के बाद कोर्ट ने शमशेर, सुनीता और नवीन को हत्या का दोषी माना और तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
17 मई की रात घर लौटते समय प्रमोद को घेरकर पीटा
इस मामले की FIR प्रमोद पूनिया के चाचा महेश कुमार ने दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, 17 मई 2019 की रात करीब 11-12 बजे प्रमोद अपने घर लौट रहा था। जब वह गांव के ही राजेश पुत्र अमरसिंह के घर के पास पहुंचा, तो वहां राजेश और उसके साथ अन्य लोग मौजूद थे।
महेश कुमार के अनुसार, राजेश और उसके साथ शमशेर, नवीन, सुनीता, सुरेश, धर्मबीर, कृष्ण, प्रदीप, पवन और नरेश ने प्रमोद को घेर रखा था। सभी ने मिलकर प्रमोद को लाठी-डंडों से पीटना शुरू कर दिया।
महेश ने जब अपने भतीजे को बचाने की कोशिश की तो आरोप है कि राजेश ने रिवाल्वर निकालकर उसकी कनपटी पर लगा दी। उसे धमकी दी गई कि अगर वह बीच में आया या चिल्लाया तो उसे गोली मार दी जाएगी।
इसके बाद आरोपियों ने प्रमोद को बुरी तरह पीटा और उसे खींचकर शमशेर के घर के अंदर ले गए। प्रमोद को कमरे में बंद कर दिया गया।
बंद कमरे में भी प्रमोद को पीटने का आरोप
महेश कुमार के मुताबिक, कमरे के अंदर प्रमोद को काफी मारा-पीटा गया। जब वह दरवाजे तक पहुंचा तो शमशेर ने अपने साथियों से कहा कि महेश को भी मार दो या धक्के देकर बाहर निकाल दो।
इसके बाद राजेश और अन्य लोगों ने महेश को धक्का देकर घर से बाहर निकाल दिया और दरवाजा बंद कर लिया। महेश वहां से तुरंत अपने भाई गुणपाल के पास पहुंचा और पूरी घटना के बारे में बताया।
इसके बाद दोनों किसी तरह मौके पर पहुंचे और प्रमोद को कमरे से बाहर निकाला। उस समय प्रमोद खून से लथपथ हालत में था। उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
सिविल अस्पताल से PGI और फिर AIIMS ट्रामा सेंटर पहुंचाया गया
प्रमोद की हालत गंभीर होने के कारण उसे पहले सिविल अस्पताल भिवानी ले जाया गया। वहां से उसे PGI रोहतक भेजा गया। इसके बाद 18 मई 2019 को प्रमोद को AIIMS ट्रामा सेंटर, दिल्ली में भर्ती कराया गया।
AIIMS के ICU में प्रमोद का 11 दिनों तक इलाज चला। परिवार को उम्मीद थी कि वह जिंदगी की जंग जीत जाएगा, लेकिन 28 मई 2019 को प्रमोद ने दम तोड़ दिया।
छह साल बाद अदालत के फैसले में शमशेर, उसकी पत्नी सुनीता और बेटे नवीन को हत्या का दोषी माना गया। तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
भाजपा की टिकट पर तोशाम से चुनाव लड़ चुके हैं गुणपाल
प्रमोद के पिता गुणपाल भाजपा नेता हैं। उन्होंने साल 2014 में भाजपा की टिकट पर तोशाम विधानसभा से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उनका मुकाबला किरण चौधरी से हुआ था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
गुणपाल सांसद धर्मबीर सिंह के करीब रहे हैं। बेटे की हत्या के बाद उन्होंने मामले की लगातार पैरवी की और छह साल तक न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी।
इकलौते बेटे की हत्या के बाद IVF से दूसरे बेटे का जन्म
प्रमोद पूनिया अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी हत्या के बाद परिवार के सामने ऐसा खालीपन आया, जिसे भरना आसान नहीं था। प्रमोद की मौत के बाद गुणपाल की पत्नी ने IVF तकनीक से दूसरे बेटे को जन्म दिया। उसका नाम रितिक रखा गया है।
गुणपाल ने कहा कि प्रमोद को उन्होंने बड़े लाड़-प्यार से पाल-पोसकर बड़ा किया था। उन्होंने बेटे को बीए की पढ़ाई करवाई थी और इसके बाद वह लॉ की पढ़ाई कर रहा था। परिवार की उम्मीदें उसी से जुड़ी थीं।
गुणपाल बोले- छह साल तक बेटे को न्याय दिलाने के लिए लड़ते रहे
बेटे के हत्यारों को उम्रकैद की सजा मिलने के बाद गुणपाल ने कहा कि प्रमोद उनका इकलौता बेटा था। वह उनकी आंखों का तारा, बुढ़ापे की लाठी और उनके जीवन का एकमात्र सपना था।
उन्होंने कहा कि प्रमोद को बड़े लाड़-प्यार से पाल-पोसकर बड़ा किया। पहले उसे बीए की पढ़ाई करवाई और फिर लॉ की पढ़ाई शुरू कराई। उन्हें उम्मीद थी कि बेटा एक दिन उनका सहारा बनेगा। परिवार की हर खुशी, हर उम्मीद और आने वाला पूरा भविष्य उसी के कंधों पर टिका हुआ था।
गुणपाल ने कहा कि 17 मई 2019 की रात एक ही झटके में वह सब कुछ छिन गया, जिस पर उनकी पूरी दुनिया निर्भर थी। पीछे उसकी पुरानी किताबें और अधूरी हसरतें रह गईं।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। बेटे को न्याय दिलाने के लिए छह साल तक पैरवी की। अब अदालत के फैसले के बाद उन्हें लगा है कि बेटे के हत्यारों को उम्रकैद की सजा मिलने से उसे न्याय मिला है।
Akhil Mahajan