तहसीलदार-नायब तहसीलदार पर 50 हजार जुर्माना, RTI की जानकारी देने में की थी देरी
गुरुग्राम के तहसीलदार दर्पण कंबोज और नायब तहसीलदार सुशील कुमार पर RTI की जानकारी नहीं देने पर 50 हजार रुपए जुर्माना लगाया गया। पेंशन से भी वसूली संभव है।
गुरुग्राम के तहसीलदार और नायब तहसीलदार पर RTI की जानकारी नहीं देने पर ₹50 हजार जुर्माना
➤ राज्य सूचना आयोग ने दर्पण कंबोज और सुशील कुमार पर 25-25 हजार रुपए की पेनल्टी लगाई
➤ तीन महीने में जुर्माना जमा कराने के निर्देश, रिटायर होने पर पेंशन से भी हो सकती है वसूली
गुरुग्राम में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराने के मामले में राज्य सूचना आयोग ने दो राजस्व अधिकारियों पर कुल 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। आयोग ने तत्कालीन तहसीलदार दर्पण कंबोज और नायब तहसीलदार सुशील कुमार पर 25-25 हजार रुपए की पेनल्टी लगाई है। इसके साथ ही संबंधित सक्षम प्राधिकारी को दोनों अधिकारियों के खिलाफ सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जुर्माने की राशि तीन महीने के भीतर जमा करानी होगी। यदि संबंधित अधिकारी रिटायर हो चुके हैं, तो कानून के अनुसार उनकी पेंशन से भी राशि वसूल की जा सकती है।
RTI की जानकारी देने में देरी पर आयोग ने तय की अधिकारियों की जवाबदेही
शिकायतकर्ता हरेंद्र ढींगड़ा का कहना है कि आयोग ने एक अन्य आरटीआई आवेदन से जुड़ी शिकायत के मामले में पहले ही इन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और आरटीआई अधिनियम की धारा 20(2) के तहत उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद निर्धारित समय सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।
राज्य सूचना आयोग ने इस लापरवाही और देरी को गंभीरता से लेते हुए आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 20(1) के तहत दोनों अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया। आयोग ने वर्ष 2024 में ‘शो कॉज नोटिस’ संख्या 1464 और 1468 पर फैसला सुनाते हुए यह जुर्माना लगाया।
दोनों अधिकारी 7 नवंबर 2022 को दाखिल किए गए आरटीआई आवेदन के समय राज्य लोक सूचना अधिकारी का प्रभार संभाल रहे थे। इस कारण वे मामले से सीधे तौर पर जुड़े हुए थे।
तहसीलदार और नायब तहसीलदार पर 25-25 हजार रुपए की पेनल्टी
आयोग ने तत्कालीन तहसीलदार दर्पण कंबोज और नायब तहसीलदार सुशील कुमार पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। इस तरह दोनों अधिकारियों पर कुल 50 हजार रुपए की पेनल्टी तय की गई है।
आयोग ने आदेश में कहा है कि जुर्माने की राशि आदेश मिलने के तीन महीने के भीतर जमा करानी होगी। इसके लिए आयोग के निर्दिष्ट हेड या स्टेट इंफॉर्मेशन कमिशन के पक्ष में डिमांड ड्राफ्ट बनवाकर पंचकूला में राशि जमा करानी होगी।
रिटायर हो चुके अधिकारियों की पेंशन से भी हो सकती है वसूली
राज्य सूचना आयोग ने अपने आदेश की प्रति आयोग सचिवालय को गुरुग्राम के उपायुक्त के पास भेजने के निर्देश दिए हैं। उपायुक्त को संबंधित अधिकारियों से जुर्माने की राशि वसूल करना सुनिश्चित करना होगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि संबंधित अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, तो कानून के प्रावधानों के अनुसार उनकी पेंशन से जुर्माने की राशि की वसूली की जा सकती है। इस निर्देश के जरिए आयोग ने जुर्माने की वसूली को लेकर भी स्थिति साफ कर दी है।
तीन महीने में देनी होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई की रिपोर्ट
आयोग ने उच्च अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि वे इस बात की जांच करें कि आरटीआई की जानकारी देने में देरी किन परिस्थितियों में हुई। सूचना उपलब्ध कराने में लापरवाही और कर्तव्य में ढिलाई बरतने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय सेवा नियमों के तहत बिना देरी उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
इस कार्रवाई की रिपोर्ट अगले तीन महीने के भीतर राज्य सूचना आयोग को सौंपनी होगी। आयोग ने भविष्य के लिए भी निर्देश दिए हैं कि हर आरटीआई आवेदन का निपटारा अधिनियम, 2005 में तय वैधानिक समय सीमा के भीतर किया जाए।
Akhil Mahajan