युवराज म*र्डर में 5 अफसरों पर एक्शन,IO सस्पेंड, शव की पहचान में हुई थी बड़ी चूक
गुरुग्राम युवराज हत्याकांड में पांच अफसरों पर कार्रवाई की तैयारी है। शव की पहचान में लापरवाही के बाद पुलिस ने नई गाइडलाइन और निगरानी व्यवस्था लागू की है।
गुरुग्राम युवराज हत्याकांड में 5 अफसरों पर कार्रवाई की तैयारी, जांच अधिकारी पहले ही सस्पेंड
➤ अज्ञात शवों की पहचान के लिए नई व्यवस्था, ACP हेडक्वार्टर को बनाया गया स्पेशल नोडल ऑफिसर
➤ युवराज की बहन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, दिल्ली-गुरुग्राम पुलिस कमिश्नरों से मांगा हलफनामा
गुरुग्राम के हाई-प्रोफाइल युवराज सिंह मनचंदा हत्याकांड में शव की शिनाख्त और अंतिम संस्कार में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अफसरों और कर्मचारियों पर बड़ी विभागीय कार्रवाई की तैयारी है। जांच में कोताही के मामले में जांच अधिकारी सहायक सब-इंस्पेक्टर साहून खान को पहले ही तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया जा चुका है। अब एसएचओ बादशाहपुर, कंट्रोल रूम के अधिकारी और फॉरेंसिक टीम के दो अधिकारियों समेत कम से कम पांच अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सकती है।
युवराज की बहन हरसिमरन मनचंदा ने गुरुग्राम पुलिस की गंभीर लापरवाही के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता अमित प्रसाद के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि शव बरामद होने के बाद भी पुलिस ने उसकी जानकारी इंटर-स्टेट पुलिस डेटाबेस ‘जिपनेट’ पर अपलोड नहीं की। इसके चलते परिवार को अपने भाई की पहचान करने का मौका नहीं मिला और पुलिस ने शव को अज्ञात मानकर उसका गुपचुप तरीके से अंतिम संस्कार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए दिल्ली और गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नरों से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। याचिका में लापता लोगों और अज्ञात शवों की बरामदगी से जुड़े मामलों के लिए एक प्रभावी और कड़ा देशव्यापी कानून या प्रक्रिया यानी एसओपी तय करने की मांग भी की गई है।
जांच अधिकारी के बाद अब पांच अफसरों पर कार्रवाई की तैयारी
इस पूरे मामले में जांच अधिकारी एएसआई साहून खान को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है। उन पर आरोप है कि अज्ञात शव मिलने के बाद उसकी शिनाख्त कराने के प्रयासों और कानूनी प्रक्रिया में भारी लापरवाही बरती गई।
पुलिस के मुताबिक, यदि समय रहते त्वरित कदम उठाए गए होते तो युवराज के हत्यारों तक पुलिस बहुत पहले पहुंच सकती थी। एएसआई के निलंबन के बाद अब एसएचओ बादशाहपुर, कंट्रोल रूम के अधिकारी और फॉरेंसिक टीम के दो अधिकारी भी कार्रवाई के निशाने पर हैं। इन अधिकारियों की देखरेख में मामले की तफ्तीश चल रही थी।
डीसीपी (साउथ) आयुष यादव के अनुसार, इंस्पेक्टर और फोरेंसिक इकाइयों के अधिकारियों सहित कम से कम पांच अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही और चूक के लिए एक या दो दिन के भीतर कार्रवाई की जा सकती है। मामले के जांच अधिकारी को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
अज्ञात शवों की पहचान के लिए अब नई व्यवस्था
युवराज हत्याकांड के बाद गुरुग्राम पुलिस ने अज्ञात शवों की बरामदगी और उनकी पहचान को लेकर नई और सख्त गाइडलाइन जारी की है। अब जिले में मिलने वाले किसी भी अज्ञात शव की निगरानी के लिए एसीपी (हेडक्वार्टर) को स्पेशल नोडल ऑफिसर नियुक्त किया गया है।
इसके साथ ही क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी की भी विशेष ड्यूटी लगाई गई है। यह अधिकारी सीधे डीसीपी (क्राइम) को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
नई व्यवस्था के तहत किसी भी अज्ञात शव की सूचना को दबाया या लंबित नहीं रखा जा सकेगा। ऐसे सभी मामलों की जानकारी सीधे उच्च अधिकारियों की निगरानी में रहेगी।
दिल्ली और आसपास के जिलों के पुलिस कंट्रोल रूम से करना होगा संपर्क
नई व्यवस्था में पुलिस कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली में भी बदलाव किया गया है। अब इस तरह के मामलों में दिल्ली पुलिस और आसपास के सीमावर्ती जिलों के पुलिस कंट्रोल रूम से संपर्क करना जरूरी होगा।
इन जिलों में फरीदाबाद, झज्जर, नूंह, रेवाड़ी और पलवल शामिल हैं। अज्ञात शव मिलने की स्थिति में तुरंत इन सभी कंट्रोल रूम में शव की फोटो और हुलिए की जानकारी साझा करनी होगी।
इसका उद्देश्य यह है कि यदि किसी दूसरे राज्य या जिले से कोई व्यक्ति लापता है तो अज्ञात शव की पहचान जल्द की जा सके। युवराज मामले में भी समन्वय की कमी के कारण शव की पहचान समय पर नहीं हो सकी थी। अब पुलिस ने इसी कमी को दूर करने के लिए नई व्यवस्था लागू की है।
PCR की वर्किंग स्टाइल में भी बदलाव
युवराज हत्याकांड के बाद पुलिस कंट्रोल रूम और पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल की गश्त व रिस्पॉन्स सिस्टम में भी बदलाव किया जा रहा है। पुलिस की कोशिश है कि भविष्य में किसी अज्ञात शव या इस तरह के गंभीर मामले में सूचना और कार्रवाई के बीच देरी न हो।
पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल की गश्त और रिस्पॉन्स सिस्टम को पूरी तरह से बदला जा रहा है। नई व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर पर भी कार्रवाई की सिफारिश
मामले में शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। हरियाणा स्वास्थ्य विभाग को डॉक्टर की लापरवाही के लिए कार्रवाई हेतु सिफारिशें भेजी जाएगी।
डॉक्टर ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अपनी राय दी थी कि मौत का कारण डूबना हो सकता है। पुलिस अब इस मामले में स्वास्थ्य विभाग को कार्रवाई के लिए सिफारिश भेजने की तैयारी में है।
6 सितंबर को लापता हुए थे युवराज, 10 सितंबर को मिला था शव
31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा 6 सितंबर को लापता हुए थे। इसके बाद गुरुग्राम पुलिस को 10 सितंबर को उनका शव बादशाहपुर के पास एक नाले से बरामद हुआ था।
पुलिस ने शव को अज्ञात मानते हुए 14 सितंबर को ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। परिवार को इसकी जानकारी नहीं मिल सकी और युवराज के शव की पहचान भी समय पर नहीं हो पाई।
युवराज की बहन हरसिमरन मनचंदा ने इसी लापरवाही को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उनका आरोप है कि शव बरामद होने के बाद पुलिस ने उसकी जानकारी इंटर-स्टेट पुलिस डेटाबेस ‘जिपनेट’ पर अपलोड नहीं की। इसी वजह से परिवार को अपने भाई की पहचान करने का अवसर नहीं मिला।
तकनीकी जांच से सामने आया हत्या का राज
बाद में दिल्ली पुलिस ने तकनीकी जांच की मदद से युवराज की पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने पैसों के विवाद में युवराज की गोली मारकर हत्या की थी। इस तरह युवराज के लापता होने और बाद में अज्ञात शव मिलने के मामले की कड़ियां सामने आईं।
अब इस मामले में पुलिस की शुरुआती जांच में हुई कथित लापरवाही को लेकर विभागीय कार्रवाई की तैयारी चल रही है। साथ ही अज्ञात शवों की पहचान और लापता लोगों से जुड़े मामलों में ऐसी चूक दोबारा न हो, इसके लिए पुलिस कंट्रोल रूम से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी तक नई व्यवस्था लागू की गई है।
Akhil Mahajan