डॉक्टर की अपॉइंटमेंट बुक करते ही साइबर ठगी, दीपिका भारद्वाज के पिता के खाते से निकले सारे पैसे
गुरुग्राम में डॉक्टर की ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक करते समय सत्य नारायण भारद्वाज साइबर ठगी का शिकार हुए। 13 अक्टूबर को खाते से रकम निकली और जयपुर के खाते में पहुंची।
रुग्राम में डॉक्टर की अपॉइंटमेंट बुक करने के चक्कर में साइबर ठगी, बुजुर्ग के खाते से निकले सारे पैसे
➤ फिल्म मेकर दीपिका भारद्वाज के पिता को फर्जी हेल्पलाइन नंबर से बनाया शिकार, व्हाट्सएप पर भेजा था ऐप डाउनलोड करने का लिंक
➤ 13 अक्टूबर को खाते से निकली रकम, जयपुर के खाताधारक तक पहुंचा पैसा; बैंक और साइबर शिकायत के बावजूद परिवार परेशान
गुरुग्राम। ऑनलाइन डॉक्टर की अपॉइंटमेंट बुक करना एक बुजुर्ग के लिए बड़ी मुसीबत बन गया। हरियाणा सरकार से रिटायर्ड एग्जिक्यूटिव इंजीनियर सत्य नारायण भारद्वाज साइबर ठगों के जाल में फंस गए। वे अपनी पत्नी की आंखों के इलाज के लिए गुरुग्राम के एक नामी डॉक्टर की अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए इंटरनेट पर हेल्पलाइन नंबर तलाश रहे थे। इसी दौरान उन्हें सर्च इंजन पर एक ऐसा नंबर मिला, जो देखने में असली अस्पताल से जुड़ा हुआ लग रहा था। लेकिन उस नंबर के पीछे साइबर ठग बैठे थे।
ठगों ने अस्पताल की वेबसाइट से मिलती-जुलती फर्जी साइट तैयार कर रखी थी और उसे सर्च इंजन पर ऊपर दिखाया जा रहा था। पांच अक्टूबर को सत्य नारायण भारद्वाज ने उस नंबर पर फोन किया तो दूसरी तरफ मौजूद व्यक्ति ने डॉक्टर की अपॉइंटमेंट बुक करने के नाम पर उन्हें एक मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करने को कहा। जब बुजुर्ग तकनीकी परेशानी के कारण प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड नहीं कर पाए, तो ठग ने मदद करने का नाटक किया और व्हाट्सएप पर एक लिंक भेज दिया।
बुजुर्ग ने लिंक पर भरोसा करके फाइल डाउनलोड कर ली। आरोप है कि यह ऐप फोन तक रिमोट एक्सेस हासिल करने और उसकी स्क्रीन साझा करने में सक्षम था। इसके जरिए ठगों को फोन की गतिविधियों और बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच मिल गई। इसके बाद परिवार को फोन पर लगातार ओटीपी और दूसरे संदेश आने लगे।
इस पूरे मामले का खुलासा फिल्म मेकर और सोशल एक्टिविस्ट दीपिका नारायण भारद्वाज ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर किया है। उन्होंने लोगों, खासकर बुजुर्गों को ऑनलाइन डॉक्टर की अपॉइंटमेंट बुक करते समय सावधान रहने की अपील की है। साथ ही पुलिस से ठगों को पकड़ने की मांग की है। मामले में यह भी सामने आया है कि जिस बैंक खाते में रकम ट्रांसफर हुई, उसका मालिक जयपुर का रहने वाला है।
डॉक्टर की अपॉइंटमेंट के नाम पर फोन में पहुंच बनाई
सत्य नारायण भारद्वाज हरियाणा सरकार में एग्जिक्यूटिव इंजीनियर के पद से सेवानिवृत्त हैं। पांच अक्टूबर को उन्होंने डॉक्टर की अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए ऑनलाइन मिले नंबर पर कॉल किया था। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को मददगार की तरह पेश किया और कहा कि अपॉइंटमेंट के लिए एक विशेष मोबाइल ऐप डाउनलोड करना होगा। इसी ऐप के जरिए फीस का भुगतान भी किया जाना था।
जब सत्य नारायण भारद्वाज ने बताया कि तकनीकी दिक्कतों के कारण वे प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड नहीं कर पा रहे हैं, तो ठग ने व्हाट्सएप पर लिंक भेजकर उसे इंस्टॉल करने को कहा। बुजुर्ग को इस बात का अंदाजा नहीं था कि मदद के नाम पर उन्हें साइबर ठगी के जाल में फंसाया जा रहा है।
लिंक से डाउनलोड की गई फाइल के जरिए ठगों ने फोन तक रिमोट एक्सेस हासिल कर लिया। इसके बाद फोन में मौजूद संदेशों, बैंकिंग से जुड़ी जानकारी और आने वाले ओटीपी तक पहुंच मिलने का खतरा पैदा हो गया। एक सामान्य ऑनलाइन बुकिंग की कोशिश इस तरह साइबर ठगी में बदल गई।
पत्नी को हुआ शक, बेटी दीपिका ने तुरंत उठाए कदम
जब सत्य नारायण भारद्वाज काफी देर तक फोन पर उलझे रहे, तो पास बैठी उनकी पत्नी को संदेह हुआ। उन्हें लगा कि डॉक्टर की अपॉइंटमेंट बुक करने में इतना समय क्यों लग रहा है। अनहोनी की आशंका होने पर उन्होंने तुरंत अपनी बेटी दीपिका भारद्वाज को इसकी जानकारी दी।
दीपिका ने पिता का मोबाइल फोन अपने पास ले लिया। उस समय फोन पर लगातार ओटीपी और दूसरे संदेश आ रहे थे। हालांकि, उन्हें भी शुरुआत में समझ नहीं आया कि आखिर फोन पर क्या हो रहा है। स्थिति को देखते हुए उन्होंने संबंधित नंबरों को ब्लॉक किया और पिता के फोन से सभी ऐप अनइंस्टॉल कर दिए। इसके बाद परिवार ने उनके सभी बैंक खाते फ्रीज करवा दिए।
परिवार को लगा कि समय रहते कदम उठाने से खतरा टल गया है। कुछ समय तक खाते से किसी तरह की गड़बड़ी सामने नहीं आई, जिससे उन्हें लगा कि समस्या सुलझ गई है। लेकिन कुछ दिनों बाद खाते दोबारा चालू होने पर मामला फिर सामने आ गया।
13 अक्टूबर को खाते से निकले सारे पैसे, कोई अलर्ट भी नहीं मिला
दीपिका नारायण भारद्वाज के मुताबिक, 13 अक्टूबर को साइबर ठगों ने उनके पिता के एक बैंक खाते से पूरी रकम निकाल ली। उन्होंने बताया कि ट्रांजेक्शन सुबह-सुबह हुए, लेकिन परिवार को न तो पैसे कटने का कोई संदेश मिला और न ही ओटीपी या किसी अन्य तरह का अलर्ट आया।
दीपिका ने इस बात पर हैरानी जताई कि जब उनके पिता ने पहले ही बैंक खाते फ्रीज करवा दिए थे, तो कुछ दिनों बाद रकम कैसे निकल गई। परिवार को यह भी समझ नहीं आ रहा कि बिना किसी संदेश या अलर्ट के खाते से पैसे निकालने की प्रक्रिया कैसे पूरी हो गई।
उनके मुताबिक, शुरुआत में फोन पर संदिग्ध गतिविधियां सामने आने के बाद उन्होंने तत्काल कदम उठाए थे। संबंधित नंबर ब्लॉक किए, ऐप हटाए और बैंक खातों को फ्रीज करवाया। इसके बावजूद बाद में रकम निकल जाने से परिवार के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं।
जयपुर के खाते में पहुंची रकम, परिवार ने बैंक में की शिकायत
मामले में सामने आया है कि जिस खाते में ठगी की रकम गई, उसका मालिक जयपुर का रहने वाला है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में खाताधारक की पहचान और रकम के आगे के लेनदेन का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है।
दीपिका भारद्वाज ने बताया कि परिवार ने ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की कोशिश भी की, लेकिन उन्हें इससे कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने बैंक में शिकायत दर्ज कराई है और अब स्थानीय पुलिस स्टेशन में भी शिकायत देने की बात कही है।
दीपिका का कहना है कि इस घटना के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब फोन से संदिग्ध ऐप हटा दिए गए थे और बैंक खाते फ्रीज करवा दिए गए थे, तो कई दिन बाद खाते से रकम कैसे निकल गई। परिवार बैंक से इस पूरे लेनदेन की जानकारी और कार्रवाई की उम्मीद कर रहा है।
बुजुर्गों को निशाना बनाने वाले ऑनलाइन ठगों से सतर्क रहने की जरूरत
यह घटना बताती है कि इंटरनेट पर किसी डॉक्टर या अस्पताल का संपर्क नंबर तलाशते समय सावधानी बरतना जरूरी है। सर्च इंजन पर सबसे ऊपर दिखाई देने वाला नंबर हमेशा आधिकारिक हो, यह जरूरी नहीं है। ठग असली अस्पताल या संस्थान से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों को भ्रमित कर सकते हैं।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर व्हाट्सएप से ऐप या फाइल डाउनलोड करना भी जोखिम भरा हो सकता है। खासकर तब, जब सामने वाला व्यक्ति फोन का नियंत्रण लेने या किसी अनजान लिंक को इंस्टॉल करने के लिए कहे।
सत्य नारायण भारद्वाज के परिवार ने इस घटना को सार्वजनिक करते हुए लोगों को सतर्क रहने की अपील की है। परिवार ने पुलिस से ठगों को पकड़ने की मांग की है, ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके और दूसरे लोग ऐसे जाल में फंसने से बच सकें।
Akhil Mahajan