Video: ‘दफ्तर में हा-हा करते हो, काम करते नहीं’11 करोड़ के फंड पर कंगना का पारा चढ़ा, दिशा बैठक में डीसी समेत अफसरों की लगाई क्लास
मंडी की दिशा बैठक में कंगना रनौत ने 11 करोड़ के सांसद निधि खर्च पर अधिकारियों को फटकारा और कहा- दफ्तर में हा-हा करते हो, काम करते नहीं
➤ 11 करोड़ के फंड पर कंगना का गुस्सा, बोलीं- दफ्तर में हा-हा करते हो, काम करते नहीं
➤ दिशा बैठक में अफसरों से सवालों की बौछार, पिछली बैठकों के फैसलों पर भी मांगा जवाब
➤ कंगना बोलीं- मीटिंग करनी है तो जमीन पर काम भी दिखना चाहिए, वरना यह सिर्फ औपचारिकता है
मंडी: जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में सांसद कंगना रनौत का अधिकारियों के कामकाज को लेकर गुस्सा साफ दिखाई दिया। विकास कार्यों के लिए उपलब्ध करीब 11 करोड़ रुपये की सांसद निधि के इस्तेमाल में देरी और बैठकों में बार-बार एक जैसे मुद्दे सामने आने पर कंगना ने अधिकारियों से तीखे सवाल किए। उन्होंने साफ कहा कि बैठकों में बातें करने और सुझाव देने से काम पूरा नहीं होगा, बल्कि उसका असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
बैठक के दौरान कंगना ने अधिकारियों के काम करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि बैठकों में हर बार बातें और आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन जब अगली बैठक होती है तो वही समस्याएं दोबारा सामने आ जाती हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर कितनी दिशा समितियों की बैठकें हो चुकी हैं और यदि पिछली बैठकों में दिए गए सुझावों पर अमल ही नहीं होना है तो फिर लोगों और अधिकारियों का समय क्यों बर्बाद किया जा रहा है।
पिछली बैठक में जो कहा था, वह लागू क्यों नहीं हुआ?
कंगना ने अधिकारियों से पूछा कि पिछली दिशा बैठकों में जिन मुद्दों और सुझावों पर चर्चा हुई थी, उनकी स्थिति क्या है। उनका कहना था कि अलग-अलग विभागों में एक ही तरह का पैटर्न दिखाई दे रहा है। बैठक में सुझाव दिए जाते हैं, रिपोर्ट तैयार होती है और विभाग अपनी प्रस्तुति देते हैं, लेकिन असली चुनौती उसके बाद शुरू होती है।
उन्होंने अधिकारियों को यह समझाने की कोशिश की कि किसी योजना या काम के बारे में सिर्फ विचार और सुझाव देना पर्याप्त नहीं है। यह देखना जरूरी है कि उसे व्यावहारिक रूप से जमीन पर कैसे लागू किया जा रहा है और लागू होने के बाद वास्तविक स्थिति क्या है।
कंगना ने कहा कि विभागीय चर्चाओं से पहले PDF रिपोर्ट सामने आ जाती हैं, लेकिन केवल रिपोर्ट देखकर विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति नहीं समझी जा सकती। उनके मुताबिक जरूरी यह है कि रिपोर्ट में दर्ज बातों का मिलान ग्राउंड रियलिटी से हो।
‘सिर्फ विभागों की प्रस्तुति देकर काम खत्म नहीं हो सकता’
बैठक में कंगना ने विभागों की एक के बाद एक प्रस्तुति को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका जोर इस बात पर था कि दिशा बैठक महज विभागीय प्रेजेंटेशन का सिलसिला न बन जाए। बैठक का उद्देश्य यह होना चाहिए कि विकास कार्यों की वास्तविक प्रगति सामने आए और जहां काम अटका है, वहां उसकी वजह और जिम्मेदारी स्पष्ट हो।
उन्होंने अधिकारियों से यह भी पूछा कि आखिर बैठकों में बार-बार एक ही तरह की बातें क्यों दोहराई जा रही हैं। कंगना के सवालों का केंद्र यही रहा कि बैठक के बाद काम कितना हुआ, इसकी जानकारी ज्यादा महत्वपूर्ण है।
इसी दौरान उन्होंने अधिकारियों के कामकाज पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि “मेरे से ज्यादा अच्छी एक्टिंग यहां पे बाकी सब करते हैं।” उन्होंने जिम्मेदार MP LADs अधिकारियों को खड़ा होने के लिए कहा और सांसद निधि से जुड़े कामों की स्थिति पर जवाब मांगा।
‘11 करोड़ दिए, फिर राष्ट्रीय मीडिया के सामने जवाब क्या दूं?’
कंगना ने सांसद निधि के इस्तेमाल को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पूरे देश में यह बात रिपोर्ट हो रही है कि कंगना ने 11 करोड़ रुपये दिए, लेकिन एक भी काम नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उन्हें राष्ट्रीय मीडिया के सामने जवाब देने में शर्मिंदगी महसूस होती है।
कंगना ने यह भी कहा कि सांसद के तौर पर उनका काम फंड उपलब्ध करवाना है। उन्होंने बताया कि वह मार्च-अप्रैल में संबंधित मंत्रालय से भी इस मामले को लेकर फॉलोअप कर चुकी हैं। इसके बाद भी यदि फंड उपलब्ध होने के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ता तो सवाल संबंधित स्तर पर काम की गति और जिम्मेदारी को लेकर उठता है।
मौजूदा रिपोर्टों में भी दिशा बैठक के दौरान सांसद निधि के अपेक्षित इस्तेमाल नहीं होने और अधिकारियों से जवाब मांगने की बात सामने आई है।
दो साल में 11 करोड़ में से एक करोड़ भी खर्च नहीं होने पर सवाल
कंगना ने बैठक में बताया कि मार्च-अप्रैल तक पूरे क्षेत्र के लिए करीब 11 करोड़ रुपये में से दो साल में एक करोड़ रुपये से भी कम राशि का इस्तेमाल हुआ था। उन्होंने मंडी में भी फंड के इस्तेमाल की स्थिति पर सवाल उठाया और कहा कि करीब 50 से 60 लाख रुपये भी इस्तेमाल नहीं हुए थे।
उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि जब विकास कार्यों के लिए पैसा उपलब्ध है तो फिर उसे खर्च करने में इतनी देरी क्यों हो रही है। उनका सवाल सिर्फ पैसा जारी होने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह था कि फंड मिलने के बाद काम वास्तव में शुरू और पूरा क्यों नहीं हो रहा।
‘कई लोगों ने फंड ले रखा है, लेकिन काम शुरू नहीं किया’
कंगना ने बताया कि कई लोगों ने विकास कार्यों के लिए फंड ले रखा है, लेकिन काम शुरू नहीं किया गया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसे मामलों की स्पष्ट स्थिति सामने लाई जाए।
उनका कहना था कि कहीं जरूरी अनुमति, कहीं जमीन और कहीं NOC के कारण काम अटका हुआ है। ऐसे मामलों में संबंधित लोगों को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि काम आगे बढ़ाएं या फिर यदि काम नहीं करना है तो राशि वापस करें।
कंगना ने इस बात पर भी जोर दिया कि केवल यह कह देना पर्याप्त नहीं है कि संबंधित व्यक्ति या एजेंसी से पैसा वापस लेने के लिए कहा गया है। वास्तविक स्थिति तब मानी जाएगी, जब राशि वास्तव में वापस आए और उसका रिकॉर्ड स्पष्ट हो।
काम पूरा, फिर भी खाते में पैसा पड़ा तो क्यों?
बैठक में कंगना ने उन मामलों पर भी सवाल उठाया जहां काम पूरा होने के बाद भी राशि का इस्तेमाल या संबंधित प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में राशि खाते में पड़ी हुई है और उसे आगे की प्रक्रिया में नहीं लाया जा रहा।
उन्होंने अधिकारियों से विकास कार्यों की प्रगति के आधार पर स्पष्ट स्थिति तैयार करने को कहा। अलग-अलग स्तर पर हुए कामों का रिकॉर्ड रखने और यह देखने पर जोर दिया गया कि कौन सा काम कितना पूरा हुआ है और कौन सा काम अभी शुरू होना बाकी है।
काम पूरा करने वालों को अपलोडिंग तक की ट्रेनिंग नहीं मिली
कंगना ने यह भी सवाल उठाया कि जिन लोगों ने सांसद निधि से काम पूरे कर लिए हैं, उन्हें आगे की प्रक्रिया में काम की जानकारी अपलोड करने तक की जानकारी नहीं है। उन्होंने पूछा कि यदि संबंधित लोगों को प्रक्रिया की जानकारी ही नहीं है तो उन्हें प्रशिक्षण क्यों नहीं दिया गया।
उन्होंने मंडी कार्यालय को ऐसे लोगों को आवश्यक ट्रेनिंग देने की बात कही, ताकि काम पूरा होने के बाद रिकॉर्ड और ऑनलाइन प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।
‘व्हाट इज़ दिस बिहेवियर?’—कंगना ने अधिकारियों से मांगा काम का हिसाब
बैठक में कंगना का लहजा लगातार सख्त रहा। उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि एक ही तरह के मुद्दे बार-बार सामने आने के बावजूद उनमें सुधार क्यों नहीं हो रहा। उन्होंने “व्हाट इज़ दिस बिहेवियर?” कहते हुए काम करने के तरीके पर नाराजगी जाहिर की।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग केवल वेतन लेने के लिए कार्यालय आने तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें अपने काम की जिम्मेदारी समझनी चाहिए। उनका जोर इस बात पर था कि सरकारी व्यवस्था में जिम्मेदारी केवल बैठक में मौजूद रहने या रिपोर्ट देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
कंगना ने दिशा बैठक को लेकर साफ कहा कि यदि बैठकों में आने, चर्चा करने और सुझाव देने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम नहीं होना है, तो फिर ऐसी बैठकों का उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आ जाता है।
‘ये शोशा क्यों कर रहे हैं आप लोग?’
बैठक के दौरान कंगना ने अधिकारियों से तीखे अंदाज में पूछा कि जब काम ही नहीं करना है तो बार-बार बैठकों का आयोजन क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बैठकें केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर बैठकों में लिए गए फैसलों का जमीन पर असर नहीं दिखता तो यह पूरी प्रक्रिया मजाक बनकर रह जाती है। इसी नाराजगी के बीच उन्होंने कहा कि “मीटिंग्स करने का अगर आप लोगों को ये काम कुछ करना ही नहीं है… इट्स बिकम ए ब्लडी जोक।”
कंगना के सवालों के केंद्र में एक ही बात रही—फंड उपलब्ध होने के बाद विकास कार्यों की गति क्यों नहीं बढ़ रही और बैठकों में लिए गए फैसलों का असर जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा।
अब अधिकारियों से सिर्फ रिपोर्ट नहीं, जमीन पर काम की उम्मीद
दिशा बैठक में कंगना की नाराजगी का मुख्य कारण सांसद निधि के इस्तेमाल में देरी, लंबित विकास कार्य और पिछली बैठकों में उठाए गए मुद्दों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होना रहा। उन्होंने अधिकारियों को यह संदेश देने की कोशिश की कि बैठक में रिपोर्ट पेश करना तभी सार्थक है, जब उसके बाद काम की वास्तविक प्रगति भी दिखाई दे।
अब सवाल यही है कि बैठक में उठाए गए इन मुद्दों के बाद सांसद निधि से जुड़े लंबित काम कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं और जिन मामलों में पैसा, अनुमति या NOC के कारण काम रुका हुआ है, उनकी स्थिति कब तक स्पष्ट होती है।
Akhil Mahajan