शहीद सुखचैन सिंह की 30 मिनट रुकी अंतिम यात्रा,परिवार ने मांगी नौकरी और ₹1 करोड़ मुआवजा

शहीद सुखचैन सिंह की अंतिम यात्रा करीब 30 मिनट रुकी। परिवार ने नौकरी और ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग की, ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों के न पहुंचने पर रोष जताया।

शहीद सुखचैन सिंह की 30 मिनट रुकी अंतिम यात्रा,परिवार ने मांगी नौकरी और ₹1 करोड़ मुआवजा

शहीद सुखचैन सिंह की अंतिम यात्रा करीब 30 मिनट तक रुकी, परिवार ने नौकरी और ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग रखी
ग्रामीणों का आरोप- तीन दिन से कोई जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी परिवार का हाल जानने गांव नहीं पहुंचा
परिवार और ग्रामीणों को समझाने के बाद अंतिम यात्रा शुरू हुई, पूरा गांव परिवार के साथ खड़ा रहने का भरोसा

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में शहीद हुए हरियाणा के सिरसा जिले के आर्मी जवान सुखचैन सिंह की अंतिम यात्रा में शनिवार को हंगामा हो गया। सेना की टुकड़ी शनिवार सुबह करीब 10 बजे उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव कुत्ताबढ़ लेकर पहुंची तो परिवार और ग्रामीणों ने अंतिम यात्रा रुकवा दी। परिवार की शिकायत थी कि शहादत के बाद तीन दिन बीतने के बावजूद कोई भी जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी उनका हाल-चाल लेने तक गांव नहीं पहुंचा। इसी के साथ परिवार ने एक सदस्य को नौकरी और ₹1 करोड़ मुआवजा देने की मांग रखी।

ग्रामीणों ने कहा कि चुनाव के समय हर कोई गांव पहुंच जाता है, लेकिन इस दुख की घड़ी में कोई जिम्मेदार अधिकारी परिवार के पास नहीं आया। उनका कहना था कि बाद में परिवार को कुछ नहीं मिलता और उन्हें कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ग्रामीणों ने मांग की कि कोई जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी मौके पर आकर लिखित में आश्वासन दे। जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक अंतिम यात्रा आगे नहीं बढ़ने दी जाएगी।

डीएसपी ने एसपी से फोन पर बात कराने की कही, ग्रामीणों ने किया इनकार

शहीद की अंतिम यात्रा रुकवाने की सूचना मिलते ही एलनाबाद डीएसपी और रानियां थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। डीएसपी ने एसपी से फोन पर बात कराने की बात कही, लेकिन ग्रामीणों ने इससे इनकार कर दिया। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि वे फोन पर आश्वासन नहीं चाहते और कोई जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर लिखित में आश्वासन दे।

ग्रामीणों का कहना था, “चुनाव में हर कोई आ जाता है। इस समय कोई नहीं आया। बाद में परिवार को कुछ नहीं मिलता और कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कोई भी जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी मौके पर आकर लिखित में शिकायत दे। जब तक लिखित में आश्वासन नहीं मिलेगा, अंतिम यात्रा आगे नहीं बढ़ने देंगे।”

परिवार को समझाने के बाद शुरू हुई अंतिम यात्रा

करीब आधे घंटे तक अंतिम यात्रा रुकी रही। इस दौरान सेना के अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों व परिवार को समझाने का प्रयास करते रहे। बाद में ग्रामीणों ने परिवार को समझाकर अंतिम यात्रा शुरू कराई। ग्रामीणों ने कहा कि पूरा गांव शहीद के परिवार के साथ खड़ा है और वे जल्दी ही सीएम से मिलेंगे

शहीद सुखचैन सिंह के शोक में पूरा गांव एकजुट दिखाई दिया। बड़ी संख्या में युवाओं ने तिरंगा यात्रा निकाली और भारत माता के जयकारे लगाते हुए बाइकों पर शहीद के गांव पहुंचे। अंतिम यात्रा के दौरान “सुखचैन सिंह फौजी अमर रहे” के नारे भी लगाए गए। महिलाओं और बच्चों ने वंदेमातरम् के नारे लगाए, जबकि महिलाओं ने फूल बरसाकर शहीद को श्रद्धांजलि दी।

2015 में सेना में भर्ती हुए थे सुखचैन सिंह

सुखचैन सिंह 27 सितंबर 2015 को सेना में भर्ती हुए थे। वर्तमान में उनकी ड्यूटी 59 इंजीनियरिंग रेजीमेंट राजौरी, कश्मीर में चल रही थी। वे गुरुवार को सुबह 11 बजे जम्मू कश्मीर के राजौरी में ड्यूटी के दौरान देश के लिए शहीद हो गए।

सुखचैन सिंह के परिवार में उनकी पत्नी निर्मल कौर और 5 साल का बेटा है। उनकी शादी वर्ष 2020 में हुई थी।

7 साल की उम्र में पिता का हुआ था देहांत

सुखचैन सिंह जब 7 साल के थे, तभी उनके पिता बलविंद्र सिंह का देहांत हो गया था। उनकी माता का नाम अमर कौर है। शहीद सुखचैन सिंह के 2 भाई और एक बहन हैं। तीनों भाई-बहन शादीशुदा हैं।

उनके बड़े भाई गांव में शैटरिंग का काम करते हैं। सुखचैन सिंह का परिवार और उनके बड़े भाई का परिवार पिछले काफी समय से गांव कुत्ताबढ़ में ही रह रहे हैं।

सरपंच ने वीडियो जारी कर दी थी पार्थिव शरीर पहुंचने की जानकारी

गांव कुत्ताबढ़ के सरपंच बेअंत सिंह ने एक वीडियो जारी कर बताया था कि गुरुवार को शहीद होने के बाद परिवार को इसकी सूचना दी गई थी। परिवार को बताया गया था कि शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे तक पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंच जाएगा।

हालांकि, खराब मौसम के कारण पार्थिव शरीर को गांव पहुंचाने में देरी हुई।

राजौरी से पठानकोट और फिर सड़क मार्ग से सिरसा पहुंचा पार्थिव शरीर

जम्मू कश्मीर के राजौरी से शहीद सुखचैन सिंह के पार्थिव शरीर को हवाई जहाज से पठानकोट तक लाया गया। आगे खराब मौसम के कारण पठानकोट से पार्थिव शरीर को एम्बुलेंस से सड़क मार्ग के जरिए सिरसा के लिए शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे रवाना किया गया।

शुक्रवार रात करीब 11 बजे सुखचैन सिंह का पार्थिव शरीर सिरसा एयरफोर्स में रखा गया था। शनिवार सुबह पार्थिव शरीर पैतृक गांव की ओर रवाना हुआ।

गांव पहुंचने से पहले उमड़ी श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़

सुबह 9:27 बजे तक ग्रामीणों को बताया गया कि शहीद का पार्थिव शरीर कुछ देर में गांव पहुंचेगा। सुबह 9:30 बजे ग्रामीण हाथों में तिरंगा लेकर इंतजार करते दिखाई दिए। सुबह 9:56 बजे शहीद का पार्थिव शरीर गांव मंगाला पहुंचा, जहां अलग-अलग गांवों से आए लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

लोगों में इस बात को लेकर रोष भी दिखाई दिया कि दो दिन बीत जाने के बाद भी कोई प्रशासनिक अधिकारी परिवार को सांत्वना देने नहीं पहुंचा। सुबह 10:05 बजे पार्थिव शरीर केशुपुरा पहुंचा, जहां से पैतृक गांव तक पहुंचने में करीब 20 मिनट लगने की जानकारी दी गई।

सुबह 10:51 बजे शहीद सुखचैन सिंह का पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा। उनके साथ सेना के अधिकारी और सिरसा जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे। शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

तिरंगा लेकर पहुंचीं महिलाएं, युवाओं ने लगाए भारत माता के जयकारे

शहीद के गांव में सुबह से ही भावुक माहौल बना रहा। महिलाएं हाथों में तिरंगा लेकर खड़ी दिखाई दीं। युवा वंदेमातरम् गाते हुए गांव पहुंचे। बड़ी संख्या में लोग फूल-मालाएं लेकर शहीद को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

अंतिम यात्रा के रूट पर पुलिस फोर्स भी तैनात रही। गांव के एंट्री गेट से लेकर शहीद के घर तक लोगों की भीड़ दिखाई दी। सरपंच और पुलिस प्रशासन व्यवस्था बनाए रखने में जुटे रहे।

कई नेताओं ने जताया शोक, अंतिम यात्रा में पहुंचे विधायक भरत सिंह बेनीवाल

शहीद सुखचैन सिंह के शोक में सीएम सैनी ने भी श्रद्धांजलि दी। सिरसा सांसद कुमारी सैलजा, पूर्व विधायक नैना चौटाला, ऐलनाबाद विधायक भरत सिंह बेनीवाल और सर्व मित्र कंबोज ने भी शोक जताया।

बाद में ऐलनाबाद विधायक भरत सिंह बेनीवाल भी अंतिम यात्रा में पहुंचे। शहीद की अंतिम यात्रा में लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा और पूरे रास्ते देशभक्ति के नारों से माहौल गूंजता रहा।

शहीद के परिवार के साथ खड़ा रहा पूरा गांव

अंतिम यात्रा करीब 30 मिनट तक रुकने के दौरान परिवार की मांग और प्रशासन के प्रति नाराजगी खुलकर सामने आई। हालांकि बाद में ग्रामीणों ने परिवार को समझाया और अंतिम यात्रा दोबारा शुरू कराई। ग्रामीणों ने कहा कि पूरा गांव शहीद सुखचैन सिंह के परिवार के साथ है और उनकी मांगों को लेकर आगे भी आवाज उठाई जाएगी।