भारत-बेल्जियम के बीच डिफेंस सेक्टर में 10 बड़े समझौते, जोरावर टैंक से रॉकेट और गोला-बारूद तक सहयोग

भारत-बेल्जियम के बीच डिफेंस सेक्टर में 10 बड़े समझौते, जोरावर टैंक टरेट, 70mm रॉकेट, समुद्री माइन्स तकनीक और सालाना 10 करोड़ राउंड उत्पादन शामिल

भारत-बेल्जियम के बीच डिफेंस सेक्टर में 10 बड़े समझौते, जोरावर टैंक से रॉकेट और गोला-बारूद तक सहयोग

➤ भारत-बेल्जियम के बीच डिफेंस सेक्टर में करीब 10 बड़े समझौते
➤ जोरावर टैंक के लिए 3105 टरेट और भारत में 70mm रॉकेट निर्माण पर सहमति
➤ समुद्री माइन्स हटाने की तकनीक और सालाना 10 करोड़ राउंड उत्पादन की योजना


भारत और बेल्जियम के बीच डिफेंस सेक्टर में सहयोग को लेकर कई बड़े समझौते हुए हैं। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की भारत यात्रा के दौरान बेल्जियम की 15 डिफेंस कंपनियों के प्रतिनिधि भी भारत पहुंचे। दोनों देशों की कंपनियों के बीच करीब 10 समझौते हुए हैं। इनमें हथियारों के साथ-साथ ड्रोन, समुद्री सुरक्षा, माइन्स हटाने वाली तकनीक, रडार, गोला-बारूद और दूसरे डिफेंस सिस्टम शामिल हैं।

इस सहयोग की खास बात यह है कि भारत का जोर केवल तैयार हथियार खरीदने पर नहीं है। दोनों देशों की कंपनियां तकनीक विकसित करने और भारत में उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं। इससे देश की घरेलू डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

जोरावर टैंक के लिए बेल्जियम की 3105 टरेट

भारत के हल्के जोरावर टैंक के लिए बेल्जियम की जॉन कॉकरिल डिफेंस की 3105 टरेट अहम है। यह टरेट 105mm की गन से लैस है और जोरावर के शुरुआती प्रोटोटाइप में इसका इस्तेमाल किया जा चुका है।

जोरावर टैंक को खास तौर पर ऊंचाई वाले और मुश्किल पहाड़ी इलाकों में काम करने के लिए विकसित किया जा रहा है। इसे भारत-चीन सीमा जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनाती को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।

भारत में इस टरेट के उत्पादन की दिशा में भी काम हो रहा है। जॉन कॉकरिल और भारत की कंपनी इलेक्ट्रो न्यूमैटिक्स एंड हाइड्रोलिक्स के बीच साझेदारी के जरिए टरेट बनाने की योजना है।

भारत में बनेंगे 70mm रॉकेट

डिफेंस सहयोग के तहत बेल्जियम की थेल्स और भारत की कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड के बीच 70mm रॉकेट सिस्टम को लेकर समझौता हुआ है।

इसमें बिना गाइडेंस वाले और लेजर गाइडेड, दोनों तरह के रॉकेट पर काम किया जाएगा। इन रॉकेटों की भारत में मैन्युफैक्चरिंग क्षमता तैयार करने की योजना है।

थेल्स अपनी तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराएगा, जबकि भारत में कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स उत्पादन, टेस्टिंग और सिस्टम इंटीग्रेशन में भूमिका निभाएगी। पहला पूरी तरह भारत में तैयार रॉकेट 2027 की शुरुआत तक बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

ये 70mm रॉकेट भारतीय सशस्त्र बलों में इस्तेमाल होने वाले प्लेटफॉर्म के लिए काम आ सकते हैं। थेल्स के मुताबिक इस तकनीक का इस्तेमाल एयर, लैंड और समुद्री मिशन में भी किया जा सकता है।

समुद्र में माइन्स खोजने और हटाने के लिए रोबोटिक सिस्टम

भारत-बेल्जियम सहयोग में समुद्री माइन्स से निपटने वाली तकनीक भी महत्वपूर्ण है। लार्सन एंड टुब्रो और एक्सेल रोबोटिक्स के बीच हुए समझौते के तहत ऐसी तकनीक पर काम किया जाएगा, जो समुद्र के अंदर माइन्स को ढूंढने, उनकी पहचान करने और उन्हें हटाने में मदद करेगी।

भारतीय नौसेना के लिए यह क्षमता महत्वपूर्ण है, क्योंकि समुद्री रास्तों की सुरक्षा और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए माइन्स की पहचान और उन्हें हटाना जरूरी होता है। भारत की नौसेना के लिए माइन काउंटरमेजर क्षमता बढ़ाने की दिशा में लंबे समय से काम की जरूरत बताई जाती रही है।

हर साल 10 करोड़ राउंड बनाने की योजना

बेल्जियम की लाचॉसी कंपनी और भारत की टेम्बो क्लासिक इंजीनियरिंग के बीच गोला-बारूद के उत्पादन को लेकर भी बड़ा समझौता हुआ है।

इसके तहत भारत में एक प्रोडक्शन लाइन तैयार करने की योजना है, जिसकी प्रस्तावित क्षमता हर साल करीब 10 करोड़ राउंड बनाने की होगी। इस प्रोजेक्ट की कीमत करीब 50 मिलियन यूरो बताई गई है।

प्लांट में दो तरह के गोला-बारूद के लिए पूरी प्रोडक्शन लाइन और दो अन्य कैलिबर के लिए जरूरी मशीनरी और टूलिंग उपलब्ध कराई जाएगी। इसकी स्थापना और डिलीवरी 2028 और 2029 के दौरान होने की योजना है।

ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक पर भी समझौते

भारत और बेल्जियम के बीच डिफेंस सहयोग सिर्फ टैंक, रॉकेट और गोला-बारूद तक सीमित नहीं है। दोनों देशों की कंपनियों के बीच ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल उपकरण और दूसरे आधुनिक डिफेंस सिस्टम को लेकर भी समझौते हुए हैं।

भारत का लक्ष्य इन तकनीकों में विदेशी कंपनियों की विशेषज्ञता को अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के साथ जोड़ना है। इससे रक्षा क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के साथ भारत में उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी जोर रहेगा।

तैयार हथियारों के बजाय तकनीक और उत्पादन पर जोर

भारत-बेल्जियम के बीच हुए इन समझौतों में एक बड़ा फोकस तकनीक हस्तांतरण, संयुक्त विकास और भारत में निर्माण पर दिखाई देता है। जोरावर टैंक की टरेट से लेकर 70mm रॉकेट, समुद्री माइन्स हटाने वाली रोबोटिक तकनीक और बड़े पैमाने पर गोला-बारूद उत्पादन तक कई क्षेत्रों में दोनों देशों की कंपनियां साथ काम करेंगी।

इस तरह डिफेंस सेक्टर में यह सहयोग हथियारों की खरीद के साथ-साथ भारत में रक्षा उत्पादन और आधुनिक तकनीकी क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।