10 दिन बाद बेटे के जन्मदिन पर घर आने की बात कही थी... लेकिन अब तिरंगे में लिपटा आएगा हरियाणा का वीर सपूत सुखचैन , रजौरी में शहीद

सिरसा के कुत्ताबढ़ निवासी जवान सुखचैन सिंह राजौरी में शहीद हो गए। शुक्रवार को पैतृक गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा।

10 दिन बाद बेटे के जन्मदिन पर घर आने की बात कही थी... लेकिन अब तिरंगे में लिपटा आएगा हरियाणा का वीर सपूत सुखचैन , रजौरी में शहीद

राजौरी में तैनात सिरसा के जवान सुखचैन सिंह शहीद
10 दिन बाद बेटे के जन्मदिन पर घर आने की कही थी बात
आज पैतृक गांव कुत्ताबढ़ में राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार


 सिरसा जिले के गांव कुत्ताबढ़ के रहने वाले जवान सुखचैन सिंह जम्मू-कश्मीर के राजौरी में देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। उनकी शहादत की खबर मिलते ही गांव में मातम पसर गया और परिवार के घर पर रिश्तेदारों तथा ग्रामीणों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। जवान का पार्थिव शरीर शुक्रवार को उनके पैतृक गांव कुत्ताबढ़ पहुंचेगा, जहां दोपहर करीब 12 बजे तक राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, सुखचैन सिंह राजौरी में ड्यूटी पर तैनात थे, जहां वे शहीद हो गए। उनका पार्थिव शरीर राजौरी से सिरसा लाया जाएगा और इसके बाद उनके गांव कुत्ताबढ़ ले जाया जाएगा। सैनिक बोर्ड भवन में अधिकारियों से बातचीत के दौरान एक जवान के शहीद होने की सूचना की पुष्टि की गई।

गांव के सरपंच बेअंत सिंह ने कहा कि इस दुख की घड़ी में पूरा गांव शहीद के परिवार के साथ खड़ा है। गांव में अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। गर्मी को देखते हुए घर पर टेंट आदि लगाकर भी व्यवस्था की जा रही है।

10 दिन बाद बेटे के जन्मदिन पर घर आने की थी उम्मीद, अब शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचेगा

सुखचैन सिंह के छोटे भाई सरबजीत सिंह ने बताया कि करीब दो महीने पहले सुखचैन छुट्टी पर घर आए थे। इसके बाद वीरवार सुबह करीब आठ बजे उनकी बड़े भाई सुखचैन सिंह से बातचीत हुई थी।

सरबजीत के मुताबिक, बातचीत के दौरान सुखचैन ने कहा था कि वह बिल्कुल ठीक हैं और दस दिन बाद छुट्टी लेकर घर जरूर आएंगे। परिवार को भी उनके घर लौटने का इंतजार था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद ऐसी खबर आई, जिसने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

सरबजीत सिंह ने बताया कि दस दिन बाद सुखचैन के बेटे आकाशदीप का जन्मदिन है। इसी वजह से सुखचैन ने घर आने की बात कही थी। परिवार को उम्मीद थी कि वह बेटे के जन्मदिन पर घर आएंगे, लेकिन अब उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचेगा।

राजौरी से अधिकारी का आया फोन, कहा- सुखचैन अमर हो चुका है

सरबजीत सिंह ने बताया कि वीरवार को करीब एक बजे परिवार को सुखचैन सिंह के शहीद होने की जानकारी मिली। उस समय परिवार के लोग रिश्तेदारी में किसी मरगत में गए हुए थे।

उन्होंने बताया कि वहीं उनके पास राजौरी से किसी अधिकारी का फोन आया। अधिकारी ने उन्हें बताया कि सुखचैन अमर हो चुका है। यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

जिस भाई से उसी सुबह बातचीत हुई थी और जिसने कुछ दिन बाद घर आने की बात कही थी, उसके शहीद होने की खबर ने परिवार को झकझोर दिया।

2015 में सेना में भर्ती हुए थे सुखचैन सिंह

शहीद सुखचैन सिंह 27 सितंबर 2015 को सेना में भर्ती हुए थे। उनकी उम्र करीब 30 साल थी। वे ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र के गांव कुत्ताबढ़ के रहने वाले थे।

हाल ही में उनकी तैनाती 59 इंजीनियरिंग रेजीमेंट राजौरी, कश्मीर में थी। देश की रक्षा के दौरान राजौरी में उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी।

पीछे रह गई पत्नी और 5 साल का बेटा

सुखचैन सिंह के परिवार में उनकी पत्नी निर्मल कौर और 5 साल का बेटा है। उनकी शादी करीब 6 साल पहले हुई थी। बेटे का नाम आकाशदीप है।

सुखचैन सिंह के पिता बलविंदर सिंह का पहले ही देहांत हो चुका था। उनकी माता का नाम अमर कौर है। बेटे के जन्मदिन पर घर लौटने की उम्मीद लगाए परिवार को अब उनके अंतिम दर्शन का इंतजार है।

कंबोज समाज से थे शहीद सुखचैन सिंह, दो भाई और एक बहन

शहीद सुखचैन सिंह कंबोज समाज से थे। उनके परिवार में 2 भाई और एक बहन हैं और तीनों भाई-बहन शादीशुदा हैं।

उनके बड़े भाई गांव में शैटरिंग का काम करते हैं। सुखचैन सिंह का परिवार और उनके बड़े भाई का परिवार पिछले काफी समय से गांव कुत्ताबढ़ में ही रह रहे हैं।

पार्थिव शरीर पहुंचने से पहले गांव में अंतिम संस्कार की तैयारियां

सुखचैन सिंह के शहीद होने की सूचना के बाद कुत्ताबढ़ में बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर पहुंचकर परिवार को सांत्वना दे रहे हैं। गांव में शोक का माहौल है।

ग्रामीण और सरपंच बेअंत सिंह शहीद के पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने से पहले अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटे हुए हैं। घर पर भी परिवार और रिश्तेदारों के पहुंचने का सिलसिला जारी है।

शुक्रवार को सुखचैन सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचेगा और दोपहर करीब 12 बजे तक राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। पूरे गांव की निगाहें अब उस अंतिम विदाई पर टिकी हैं, जब कुत्ताबढ़ अपने वीर सपूत को नम आंखों से विदा करेगा।