नई बाइक खरीदते ही करा रहे हैं मॉडिफाई? तेज LED और फॉग लाइट का शौक पड़ सकता है जेब पर भारी

बाइक में आफ्टरमार्केट LED, फॉग या तेज लाइट लगवाने पर चालान हो सकता है। पहली बार 1,000 से 2,000 और बार-बार गलती पर 5,000 रुपये तक जुर्माना है।

नई बाइक खरीदते ही करा रहे हैं मॉडिफाई? तेज LED और फॉग लाइट का शौक पड़ सकता है जेब पर भारी

बाइक में आफ्टरमार्केट LED और फॉग लाइट लगवाना पड़ सकता है भारी
अवैध मॉडिफिकेशन पर पहली बार 1,000 से 2,000 रुपये तक चालान कट सकता है
बार-बार पकड़े जाने पर जुर्माना 5,000 रुपये तक पहुंच सकता है, लाइट भी जब्त हो सकती है


इन दिनों नई बाइक खरीदते ही उसे मॉडिफाई कराने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। कई नए बाइक खरीदार शोरूम से बाइक खरीदने के तुरंत बाद उसे मॉडिफाई कराने की दुकान पर पहुंच जाते हैं। इसके बाद नई बाइक में कई तरह के आफ्टरमार्केट सामान लगवाए जाते हैं। इनमें आफ्टरमार्केट LED, हाई-इंटेन्सिटी डिस्चार्ज लाइट्स, एक्स्ट्रा फॉग लाइट्स और प्रोजेक्टर लाइट्स शामिल हैं।

बाइक को स्टाइलिश बनाने और रात में ज्यादा रोशनी पाने के लिए किया जाने वाला यह बदलाव अब वाहन मालिक की जेब पर भारी पड़ सकता है। सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रैफिक पुलिस ऐसी गाड़ियों और बाइक्स के खिलाफ सख्त अभियान चला रही है। कानून के मुताबिक, कंपनी से मिली ओरिजनल लाइट में ऐसा बदलाव करना गैर-कानूनी है, जिससे सड़क पर दूसरे लोगों के लिए खतरा पैदा हो। ऐसा करने पर वाहन का मोटा चालान कट सकता है।

बाइक में लगवा रहे हैं तेज LED और एक्स्ट्रा फॉग लाइट

इन दिनों बाइक में आफ्टरमार्केट LED और हाई-इंटेन्सिटी डिस्चार्ज लाइट्स लगवाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। कुछ लोग बाइक के बम्पर और लेग गार्ड पर अलग से एक्स्ट्रा फॉग लाइट्स या प्रोजेक्टर लाइट्स भी फिट करा लेते हैं।

लोग इन लाइट्स को बाइक की खूबसूरती और रोशनी बढ़ाने के लिए लगवाते हैं, लेकिन सड़क पर इनका इस्तेमाल दूसरे वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। खासकर रात के समय तेज और ब्लिंकिंग रोशनी सामने से आने वाले वाहन चालक की आंखों पर सीधी पड़ सकती है।

सामने वाले ड्राइवर को कुछ सेकंड तक नहीं देता दिखाई

आफ्टरमार्केट तेज LED लाइट्स के खिलाफ सख्ती की बड़ी वजह सड़क सुरक्षा है। रात के समय जब कोई बाइक सवार बहुत तेज रोशनी वाली ब्लिंकिंग या हाई-बीम LED लाइट जलाकर सड़क पर निकलता है तो सामने से आ रहे वाहन चालक की आंखों पर उसकी तेज रोशनी सीधे पड़ती है।

मेडिकल और ट्रैफिक की भाषा में इसे फ्लैश ब्लाइंडनेस कहा जाता है। इससे सामने वाले ड्राइवर को कुछ सेकंड के लिए दिखाई देना बिल्कुल बंद हो जाता है। अचानक आंखों के आगे अंधेरा छाने की वजह से चालक का वाहन पर से नियंत्रण छूट सकता है और बड़े सड़क हादसे हो सकते हैं।

यही वजह है कि सड़क पर दूसरे वाहन चालकों की सुरक्षा को देखते हुए ऐसी तेज रोशनी वाली लाइट्स के खिलाफ ट्रैफिक पुलिस सख्ती बरत रही है।

कितने रुपये का कट सकता है चालान?

मोटर व्हीकल एक्ट के सख्त नियमों के तहत बाइक या कार की फैक्ट्री फिटेड लाइट्स में ऐसा बदलाव करना अपराध है, जो दूसरों के लिए खतरा बने।

अगर ट्रैफिक पुलिस आपको बाइक में अवैध या तय सीमा से ज्यादा तेज रोशनी वाली आफ्टरमार्केट LED लाइट के साथ पकड़ती है तो धारा 190(2) के तहत पहली बार में 1,000 रुपये से लेकर 2,000 रुपये तक का चालान काटा जा सकता है।

वहीं, अगर आप बार-बार यही गलती करते हुए पकड़े जाते हैं या अवैध मॉडिफिकेशन के दोषी पाए जाते हैं तो यह जुर्माना बढ़कर 5,000 रुपये तक पहुंच सकता है।

इसलिए बाइक को स्टाइलिश बनाने के लिए लगवाई गई तेज LED या दूसरी गैर-कानूनी लाइट आपके लिए महंगी साबित हो सकती है।

सिर्फ चालान नहीं, लाइट भी निकलवा या जब्त की जा सकती है

अगर आपको लगता है कि चालान कटने के बाद आप उसी गैर-कानूनी लाइट के साथ बाइक चलाते रहेंगे तो ऐसा जरूरी नहीं है। ट्रैफिक पुलिस चेकिंग के दौरान चालान काटने के साथ बाइक में लगी गैर-कानूनी LED लाइट को मौके पर ही निकलवा या जब्त कर सकती है।

कई राज्यों में पुलिस ऐसे मॉडिफाइड वाहनों को सीज करके थाने में जमा रखती है। वाहन मालिक को उसे वापस लेने से पहले गाड़ी को दोबारा ओरिजनल कंडीशन में लाना पड़ता है, यानी कंपनी वाली लाइट लगवानी होती है।

ऐसे में सिर्फ चालान भरने तक मामला सीमित नहीं रहता। वाहन सीज होने पर उसे छुड़ाने और दोबारा ओरिजनल कंडीशन में कराने की परेशानी भी उठानी पड़ सकती है। इसलिए कोर्ट-कचहरी और आरटीओ के चक्करों से बचने के लिए नियमों का पालन करना ही बेहतर है।

कंपनी से आने वाली लाइट्स क्यों हैं सुरक्षित?

ऑटोमोबाइल कंपनियां जब भी किसी बाइक को डिजाइन करती हैं तो उसकी हेडलाइट की रोशनी और बीम एंगल को सरकार के तय सेफ्टी मानकों के हिसाब से सेट करती हैं। इन लाइट्स की रोशनी सड़क पर सही दूरी तक फैलती है और सामने से आ रहे व्यक्ति की आंखों में भी अनावश्यक रूप से नहीं चुभती।

कंपनी की ओर से लगाई गई ओरिजनल लाइट का डिजाइन और उसकी रोशनी सड़क पर सुरक्षित इस्तेमाल को ध्यान में रखकर तय की जाती है। इसलिए अपनी तरफ से ऐसी लाइट लगाने या ओरिजनल लाइट में बदलाव करने से बचना चाहिए, जिससे उसकी रोशनी या बीम का पैटर्न बदल जाए।

रात में रोशनी कम लगे तो क्या करें?

अगर रात में बाइक चलाते वक्त रोशनी कम लगती है तो सबसे पहले हेडलाइट ग्लास को साफ रखना चाहिए। इसके अलावा केवल कंपनी द्वारा प्रमाणित स्टैंडर्ड पावर वाले बल्ब का ही इस्तेमाल करना बेहतर है।

सिर्फ स्टाइल और फैशन के चक्कर में तेज LED, हाई-बीम या अतिरिक्त फॉग लाइट लगवाना समझदारी नहीं है। इससे एक तरफ चालान और कार्रवाई की परेशानी हो सकती है, वहीं दूसरी तरफ सामने से आने वाले वाहन चालक के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।

ऐसे में बाइक को अलग दिखाने के बजाय सुरक्षित तरीके से चलाना ज्यादा जरूरी है। अपनी और सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों की सुरक्षा के लिए कंपनी की ओर से दी गई लाइट और तय नियमों का पालन करना ही बेहतर विकल्प है।