RO का पानी कितना सेफ? TDS कम हुआ तो बढ़ सकती है परेशानी?
RO पानी की सुरक्षा TDS पर निर्भर करती है। जानें 500 से ज्यादा TDS में RO कब जरूरी है, 150-250 TDS पर क्या सावधानी रखें और UV+UF कब बेहतर विकल्प है।
RO पानी की शुद्धता ही हमेशा सेहत के लिए फायदेमंद नहीं, TDS के अनुसार प्यूरीफायर चुनना जरूरी
➤ 150-250 TDS वाले पानी में RO जरूरत से ज्यादा मिनरल्स निकाल सकता है, कैल्शियम और मैग्नीशियम की कमी का दावा
➤ 80 से नीचे TDS न रखने की सलाह, 300 से कम TDS होने पर UV+UF प्यूरीफायर का विकल्प बताया गया
आजकल ज्यादातर घरों की रसोई में RO वॉटर प्यूरीफायर आम हो गया है। साफ और मीठा पानी पीने की चाहत में लोग नल के पानी की जगह RO के पानी को अधिक सुरक्षित मानते हैं। कंपनियां भी RO को पानी को शुद्ध करने और बीमारियों से बचाने के विकल्प के तौर पर पेश करती हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या RO का पानी हर स्थिति में सेहत के लिए फायदेमंद होता है?
इस लेख के अनुसार, RO तकनीक पानी से गंदगी और बैक्टीरिया के साथ शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स भी निकाल सकती है। खासतौर पर यदि पानी का TDS पहले से कम है और उसे RO से फिल्टर किया जाता है, तो कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स की मात्रा कम हो सकती है। इसलिए पानी की गुणवत्ता और उसके TDS को ध्यान में रखकर ही प्यूरीफायर का इस्तेमाल करना जरूरी बताया गया है।
कब फायदेमंद है RO और कब हो सकता है नुकसान?
RO तकनीक पानी में मौजूद TDS, हैवी मेटल, आर्सेनिक, फ्लोराइड और बैक्टीरिया को हटाने के लिए उपयोगी मानी जाती है। लेख के मुताबिक, यदि घर में आने वाले पानी का TDS 500 से ज्यादा है, तो RO लगाना जरूरी है।
वहीं, अगर पानी का TDS 150 से 250 के बीच है, तो RO उस पानी को जरूरत से ज्यादा साफ कर सकता है। इससे पानी में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल्स भी कम हो जाते हैं। ये मिनरल्स शरीर के लिए महत्वपूर्ण बताए गए हैं और हड्डियों, दिल तथा पाचन से जुड़े कार्यों में इनकी भूमिका होती है।
ऐसे में सिर्फ पानी को अधिक से अधिक शुद्ध करना ही पर्याप्त नहीं है। पानी में मौजूद मिनरल्स की मात्रा को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
1. हड्डियों और दिल पर असर
RO के जरिए बहुत ज्यादा फिल्टर किए गए पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा काफी कम हो सकती है। ये दोनों मिनरल्स हड्डियों की मजबूती और शरीर के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी माने जाते हैं।
लेख में बताया गया है कि लगातार डिमिनरलाइज्ड पानी पीने से शरीर में इनकी कमी हो सकती है। इससे जोड़ों में दर्द, मसल्स क्रैम्प और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ने की बात कही गई है।
हालांकि, किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर इसका असर उसकी कुल डाइट और शरीर को मिलने वाले पोषक तत्वों पर भी निर्भर करता है। इसलिए केवल पीने के पानी को मिनरल्स का स्रोत मानने के बजाय पूरे खान-पान को ध्यान में रखना जरूरी है।
2. पाचन और इम्यूनिटी को लेकर भी चिंता
लेख के मुताबिक, शरीर में मिनरल्स की भूमिका पाचन और सामान्य स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण होती है। मिनरल-रहित पानी लगातार पीने से गैस, एसिडिटी और थकान जैसी समस्याएं महसूस होने का दावा किया गया है।
इसमें यह भी कहा गया है कि बच्चों और बुजुर्गों में इसका असर जल्दी दिखाई दे सकता है। ऐसे में इन आयु वर्गों के लिए पानी की गुणवत्ता के साथ-साथ भोजन से मिलने वाले जरूरी पोषक तत्वों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
3. बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए ज्यादा सावधानी
बच्चों के शारीरिक विकास और गर्भवती महिलाओं के लिए कैल्शियम और मैग्नीशियम महत्वपूर्ण पोषक तत्व हैं। लेख में कहा गया है कि अगर इन लोगों को लगातार गलत TDS वाला RO पानी ही मिलता रहे, तो पोषण से जुड़ी कमी की स्थिति बन सकती है।
इसलिए ऐसे मामलों में घर के पानी का TDS जानना और उसी के अनुसार प्यूरीफायर का चुनाव करना महत्वपूर्ण बताया गया है।
TDS कितना रखें और कब RO की जगह UV+UF लें?
लेख में सलाह दी गई है कि पानी का TDS 150-250 के बीच रखा जाए और इसे 80 से नीचे कभी न रखने की बात कही गई है।
अगर घर में आने वाले पानी का TDS पहले से ही 300 से कम और 80 से ज्यादा है, तो RO की जगह UV+UF प्यूरीफायर इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है।
इसका मकसद यह है कि पानी को जरूरत के मुताबिक शुद्ध किया जाए और बिना जरूरत उसमें मौजूद मिनरल्स को कम न किया जाए।
मटके या तांबे के बर्तन का पानी पीने की सलाह
लेख में यह भी सुझाव दिया गया है कि दिन में एक-दो बार मटके या तांबे के बर्तन का पानी पिया जा सकता है, ताकि प्राकृतिक मिनरल्स मिलते रहें।
हालांकि, पानी की सुरक्षा सिर्फ उसके TDS पर निर्भर नहीं करती। पानी में मौजूद बैक्टीरिया, हैवी मेटल, आर्सेनिक, फ्लोराइड और अन्य दूषित तत्वों की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए प्यूरीफायर का चुनाव केवल TDS देखकर नहीं, बल्कि घर में आने वाले पानी की वास्तविक गुणवत्ता को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
जरूरत से ज्यादा शुद्ध पानी से बचने की बात
RO का इस्तेमाल कब करना है और कब नहीं, यह मुख्य रूप से घर में आने वाले पानी की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। बहुत अधिक TDS वाले पानी में RO उपयोगी हो सकता है, लेकिन पहले से कम TDS वाले पानी को RO से फिल्टर करने पर जरूरी मिनरल्स भी कम हो सकते हैं।
इसलिए पानी को सिर्फ साफ और स्वाद में मीठा बनाने के बजाय उसकी सुरक्षा और मिनरल्स का संतुलन भी देखना जरूरी है। पानी शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन उसे जरूरत से ज्यादा शुद्ध करके मिनरल्स से रहित करना भी उचित नहीं माना जाता।
Akhil Mahajan