मणिमहेश में बर्फ के बीच राधाष्टमी का शाही स्नान, त्रिलोचन महादेव के वंशज करेंगे डल झील की रस्म,जानें शुभ मुहूर्त
मणिमहेश में राधाष्टमी का शाही स्नान दोपहर 1:02 बजे शुरू होगा। त्रिलोचन महादेव के वंशज डल झील तोड़ेंगे, बर्फबारी के बीच 26 घंटे 26 मिनट तक स्नान चलेगा।
दोपहर 1:02 बजे शुरू होगा राधाष्टमी का शाही स्नान
➤ त्रिलोचन महादेव के वंशज डल झील तोड़कर करेंगे शाही स्नान की शुरुआत
➤ तीन इंच बर्फबारी और माइनस तापमान के बीच 26 घंटे 26 मिनट तक चलेगा स्नान
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के भरमौर स्थित मणिमहेश में राधाष्टमी के पावन अवसर पर आज पवित्र डल झील में शाही स्नान की शुरुआत होगी। उत्तर भारत की प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा के इस बड़े धार्मिक स्नान को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। पुरानी धार्मिक परंपरा के अनुसार भरमौर के संचुई से पहुंचे त्रिलोचन महादेव के वंशज और शिव चेले डल झील को तोड़कर शाही स्नान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालु विधिवत रूप से पवित्र झील में आस्था की डुबकी लगाएंगे।
इस बार मणिमहेश का शाही स्नान बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के बीच हो रहा है। धार्मिक पंचांग के अनुसार राधाष्टमी के शाही स्नान का शुभ मुहूर्त आज दोपहर 1 बजकर 2 मिनट से शनिवार दोपहर 2 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। इस तरह श्रद्धालुओं को करीब 26 घंटे 26 मिनट तक पवित्र डल झील में स्नान का अवसर मिलेगा।
पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली सहित उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु मणिमहेश पहुंच रहे हैं। राधाष्टमी के इस बड़े स्नान के साथ ही इस वर्ष की मणिमहेश यात्रा के संपन्न होने की परंपरा है।
त्रिलोचन महादेव के वंशज निभाएंगे सदियों पुरानी धार्मिक रस्म
मणिमहेश की धार्मिक परंपराओं में शिव चेले की भूमिका विशेष मानी जाती है। संचुई से आने वाले त्रिलोचन महादेव के वंशजों द्वारा डल झील को तोड़कर शाही स्नान की शुरुआत किए जाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।
इसी धार्मिक रस्म के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए पवित्र झील में स्नान का क्रम शुरू होता है। शाही स्नान के दौरान विभिन्न छड़ियां भी डल झील तक पहुंचती हैं और पवित्र स्नान करती हैं। इस दौरान मणिमहेश का पूरा क्षेत्र धार्मिक आस्था और सदियों पुरानी परंपराओं के रंग में नजर आता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राधाष्टमी के दिन मणिमहेश की डल झील में स्नान का विशेष महत्व है। श्रद्धालु भगवान शिव और मणिमहेश के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए पवित्र झील में डुबकी लगाते हैं।
मान्यता है कि रक्षाबंधन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और राधाष्टमी के अवसर पर डल झील में स्नान का विशेष धार्मिक महत्व रहता है। यही वजह है कि राधाष्टमी के बड़े स्नान के लिए देश के कई राज्यों से श्रद्धालु मणिमहेश पहुंचते हैं।
तीन इंच बर्फबारी के बीच होगा शाही स्नान
इस बार मणिमहेश यात्रा का शाही स्नान मौसम की चुनौती के बीच हो रहा है। मणिमहेश क्षेत्र में बीते गुरुवार को करीब तीन इंच बर्फबारी हुई। बर्फबारी के बाद ऊंचाई वाले क्षेत्र में ठंड काफी बढ़ गई और रात का तापमान माइनस में पहुंच गया।
ऐसे मौसम में श्रद्धालुओं को बेहद ठंडे वातावरण और बर्फ के बीच डल झील में पवित्र स्नान करना होगा। हालांकि, बर्फबारी के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कमी नहीं आई है। बड़ी संख्या में शिव भक्त मणिमहेश की ओर पहुंच रहे हैं।
बर्फ की सफेद चादर के बीच स्थित डल झील में होने वाला शाही स्नान इस बार श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आस्था के साथ-साथ कठिन मौसम में तपस्या जैसा अनुभव भी रहेगा।
श्रद्धालुओं के लिए राहत की बात यह है कि आज मौसम साफ हो गया है। मौसम साफ रहने से दिन के समय तापमान में हल्की बढ़ोतरी की उम्मीद है। इससे शाही स्नान के दौरान श्रद्धालुओं को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, ऊंचाई वाले क्षेत्र में ठंड को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए गर्म कपड़े और आवश्यक सावधानियां रखना महत्वपूर्ण रहेगा।
अब तक करीब एक लाख श्रद्धालु कर चुके डल झील में स्नान
25 अगस्त से शुरू हुई मणिमहेश यात्रा के दौरान अब तक करीब एक लाख शिव भक्त पवित्र डल झील में स्नान कर चुके हैं। राधाष्टमी के शाही स्नान के साथ यात्रा का अंतिम बड़ा धार्मिक पड़ाव भी पूरा हो जाएगा।
इस दौरान हिमाचल प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों से श्रद्धालु मणिमहेश पहुंचे हैं। श्रद्धालुओं ने यहां भगवान शिव के दर्शन किए और पवित्र डल झील में स्नान किया।
हालांकि, पिछले वर्ष की आपदा का असर इस बार की यात्रा में भी दिखाई दिया है। 2025 में भरमौर से मणिमहेश के बीच बादल फटने और भारी बारिश के कारण 25 हजार से अधिक श्रद्धालु रास्ते में फंस गए थे। उस घटना के बाद इस वर्ष मणिमहेश यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या में कुछ कमी दर्ज की गई है।
इसके बावजूद बड़ी संख्या में शिव भक्तों का मणिमहेश पहुंचना यह दर्शाता है कि कठिन परिस्थितियों के बीच भी धार्मिक आस्था का सिलसिला जारी है।
शाही स्नान के साथ संपन्न होगा यात्रा का यह चरण
राधाष्टमी के शाही स्नान के साथ मणिमहेश यात्रा का यह चरण धार्मिक परंपराओं के अनुसार संपन्न होगा। दोपहर 1 बजकर 2 मिनट से शुरू होने वाला यह स्नान शनिवार दोपहर 2 बजकर 28 मिनट तक चलेगा।
बर्फ से ढकी चोटियों, ठंडे मौसम और पवित्र डल झील के बीच होने वाला यह शाही स्नान श्रद्धालुओं के लिए यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और आस्था से जुड़ा पड़ाव माना जा रहा है। त्रिलोचन महादेव के वंशजों द्वारा सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार डल झील को तोड़कर स्नान की शुरुआत किए जाने के बाद श्रद्धालु पवित्र झील में आस्था की डुबकी लगाएंगे।
Akhil Mahajan