हिमाचल आएं, राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग का लुत्‍फ उठाएं, बैन हटा,राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग शुरू, पहले दिन ब्यास में उतरीं 60 राफ्टें

कुल्लू-मनाली में दो महीने बाद राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग फिर शुरू हो गई। पहले दिन 60 राफ्टें उतरीं और करीब 10 हजार पर्यटन कारोबारियों को राहत मिली।

हिमाचल आएं,  राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग का लुत्‍फ उठाएं, बैन हटा,राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग शुरू, पहले दिन ब्यास में उतरीं 60 राफ्टें

दो माह की मानसूनी रोक के बाद कुल्लू-मनाली में राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग फिर शुरू
पहले दिन ब्यास में उतरी करीब 60 राफ्टें, डोभी-सोलंगनाला के आसमान में दिखे पैराग्लाइडर
करीब 10 हजार पर्यटन कारोबारियों को राहत, पैराग्लाइडिंग 3500 और राफ्टिंग 200 रुपये प्रति किलोमीटर

कुल्लू-मनाली घाटी में करीब दो महीने से बंद पड़ी रिवर राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग गतिविधियां अब दोबारा शुरू हो गई हैं। मानसून के दौरान ब्यास नदी का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण प्रशासन ने साहसिक पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगा दी थी। अब मौसम साफ होने और ब्यास नदी का जलस्तर अनुकूल पाए जाने के बाद प्रशासन की अनुमति से बुधवार से राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग फिर शुरू कर दी गई।

बुधवार सुबह करीब 10 बजे डोभी और सोलंगनाला के आसमान में पैराग्लाइडर उड़ते नजर आए। वहीं करीब 11 बजे कुल्लू-मनाली के बीच बबेली राफ्टिंग साइट से पहली राफ्ट ब्यास नदी में उतरी। पहले ही दिन करीब 60 राफ्टें नदी में उतरीं और शाम तक पर्यटकों ने साहसिक गतिविधियों का आनंद लिया। गतिविधियां दोबारा शुरू होने से पर्यटन कारोबार से जुड़े करीब 10 हजार लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

दो महीने बाद लौटी एडवेंचर टूरिज्म की रौनक

करीब दो महीने की रोक के बाद बुधवार को जैसे ही डोभी और सोलंगनाला के आसमान में पैराग्लाइडर दिखाई दिए और बबेली से पहली राफ्ट ब्यास की धारा में उतरी, कुल्लू-मनाली के एडवेंचर टूरिज्म कारोबार में फिर से रौनक लौटती नजर आई।

लंबे समय से गतिविधियां बंद होने के कारण पैराग्लाइडिंग संचालक, राफ्टिंग ऑपरेटर, गाइड, प्रशिक्षक और इससे जुड़े अन्य लोग काम शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। गतिविधियों के दोबारा शुरू होने के साथ ही इन लोगों को फिर से काम मिलने की उम्मीद जगी है।

सुबह आसमान में दिखे पैराग्लाइडर, 11 बजे ब्यास में उतरी पहली राफ्ट

बुधवार सुबह करीब 10 बजे डोभी और सोलंगनाला में पैराग्लाइडिंग शुरू हुई। इसके बाद दोपहर करीब 2 बजे से आसमान में नियमित रूप से पैराग्लाइडर उड़ते दिखाई दिए। पर्यटकों ने ऊंचाई से कुल्लू-मनाली घाटी के प्राकृतिक नजारों का आनंद लिया।

वहीं, पूर्वाह्न करीब 11 बजे कुल्लू-मनाली के बीच स्थित बबेली राफ्टिंग साइट से पहली राफ्ट ब्यास नदी में उतारी गई। इसके बाद दिनभर राफ्टिंग गतिविधियां जारी रहीं। बताया गया कि शाम करीब 5 बजे तक पर्यटक ब्यास की धारा में राफ्टिंग का रोमांच लेते रहे।

पहले दिन करीब 60 राफ्टें ब्यास नदी में उतरीं। गतिविधियां शुरू होने से पहले राफ्टिंग संचालक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियों में जुटे नजर आए। राफ्टिंग प्वाइंटों पर सुरक्षा उपकरणों की जांच की गई और पर्यटकों को नदी में उतरने से पहले जरूरी निर्देश दिए गए।

मानसून में क्यों बंद रहती है राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग

मानसून के दौरान हिमाचल के पहाड़ी इलाकों में बारिश बढ़ने के साथ नदियों का जलस्तर भी बढ़ जाता है। ब्यास नदी में तेज बहाव और बढ़े जलस्तर के कारण रिवर राफ्टिंग को सुरक्षित नहीं माना जाता। इसी वजह से मानसून के दौरान प्रशासन की ओर से साहसिक गतिविधियों पर रोक लगाई जाती है।

अब मौसम की परिस्थितियां अनुकूल होने और ब्यास नदी का जलस्तर राफ्टिंग के लिए उचित पाए जाने के बाद गतिविधियों को दोबारा शुरू करने की अनुमति दी गई है। प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद राफ्टिंग संचालकों ने अपने उपकरणों और सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की और फिर पर्यटकों के लिए सेवा शुरू की।

पर्यटकों को लाइफ जैकेट समेत दिए जा रहे सुरक्षा उपकरण

राफ्टिंग शुरू होने के साथ ही संचालक पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतते नजर आए। पर्यटकों को लाइफ जैकेट समेत निर्धारित सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। राफ्टिंग शुरू करने से पहले पर्यटकों को सुरक्षा संबंधी जरूरी निर्देश भी दिए जा रहे हैं।

संचालकों की ओर से राफ्टिंग में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की भी जांच की गई। प्रशासन की अनुमति के बाद गतिविधियां शुरू होने से पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों में उत्साह देखा गया।

करीब 10 हजार लोगों को मिलेगा काम, पर्यटन कारोबार को राहत

कुल्लू-मनाली में साहसिक पर्यटन स्थानीय पर्यटन कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग बंद रहने के कारण इन गतिविधियों से सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोगों का कारोबार प्रभावित हुआ था।

अब इन गतिविधियों के दोबारा शुरू होने से राफ्टिंग संचालकों के साथ-साथ पैराग्लाइडिंग पायलट, गाइड, प्रशिक्षक, उपकरण उपलब्ध कराने वाले कारोबारी और अन्य पर्यटन व्यवसायों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। साहसिक पर्यटन से जुड़े करीब 10 हजार लोगों को गतिविधियां शुरू होने के बाद राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।

कुल्लू-मनाली आने वाले पर्यटकों के लिए राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। ऐसे में इन गतिविधियों के शुरू होने से घाटी में पर्यटकों के लिए मनोरंजन और एडवेंचर के विकल्प भी बढ़ गए हैं।

पैराग्लाइडिंग के लिए 3500 रुपये, राफ्टिंग का शुल्क 200 रुपये प्रति किलोमीटर

जिला पर्यटन विकास अधिकारी रोहित शर्मा के अनुसार बुधवार से साहसिक पर्यटन गतिविधियों पर लगी रोक हटा दी गई है। उन्होंने बताया कि पैराग्लाइडिंग के लिए 3500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

वहीं, रिवर राफ्टिंग के लिए 200 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से शुल्क लिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार इन गतिविधियों के शुल्क में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। यानी पर्यटकों से पहले निर्धारित दरों के अनुसार ही शुल्क लिया जाएगा।

सितंबर के बाद पर्यटन कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार

कुल्लू-मनाली में पर्यटन कारोबार के लिए सितंबर के बाद का समय महत्वपूर्ण माना जाता है। मानसून के कारण साहसिक गतिविधियों पर लगी रोक हटने के बाद अब पर्यटकों को घाटी में राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग दोनों का विकल्प मिल गया है।

ब्यास में राफ्टिंग और पहाड़ों के ऊपर पैराग्लाइडिंग के साथ घाटी में पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने की उम्मीद है। बुधवार को पहले ही दिन राफ्टिंग साइट पर गतिविधियां शुरू होना और डोभी-सोलंगनाला के आसमान में पैराग्लाइडर उड़ना इस बात का संकेत रहा कि करीब दो महीने के विराम के बाद कुल्लू-मनाली का एडवेंचर टूरिज्म फिर से सक्रिय हो गया है।

हालांकि, साहसिक गतिविधियों के संचालन में मौसम और नदी की परिस्थितियां अहम रहेंगी। प्रशासन की अनुमति और निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार ही राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग गतिविधियां संचालित की जाएंगी।