नई हाउस टैक्स दरों पर रोष, मुख्य बाजार को एक जोन में रखने पर उठे सवाल

रामपुर में प्रस्तावित नई हाउस टैक्स दरों पर शहरवासियों ने आपत्ति जताई। जोन निर्धारण का आधार, टैक्स फार्मूला और पुरानी-नई दरों का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की।

नई हाउस टैक्स दरों पर रोष, मुख्य बाजार को एक जोन में रखने पर उठे सवाल

रामपुर में प्रस्तावित नई हाउस टैक्स दरों को लेकर शहरवासियों और पूर्व पार्षदों ने जताई आपत्ति
जोन निर्धारण का आधार, टैक्स फार्मूला और पुरानी-नई दरों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग
मुख्य बाजार को एक ही जोन में रखने पर सवाल, आपत्तियों पर विचार के बाद दरों में संशोधन की मांग

रामपुर नगर परिषद क्षेत्र में संपत्तियों की पैमाइश और वार्डों के नए सिरे से विभाजन के बाद अब प्रस्तावित नई हाउस टैक्स दरों को लेकर शहरवासियों की आपत्तियां सामने आने लगी हैं। मंगलवार को आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि तक स्थानीय लोगों और पूर्व पार्षदों ने नगर परिषद की टैक्स निर्धारण प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जोन निर्धारण का आधार सार्वजनिक करने और कर प्रणाली में आवश्यक बदलाव करने की मांग की।

नगर परिषद ने शहर के नौ वार्डों को ए, बी, सी और डी जोन में बांटा है। वहीं, रामपुर के मुख्य बाजार को एक ही जोन में रखा गया है। स्थानीय लोगों और पूर्व पार्षदों ध्रुव शर्मा, सुशील बॉबी, संजीव गुप्ता, हिमेश ठाकुर और बसंत शर्मा का कहना है कि मुख्य बाजार, शिव दवाला मंदिर, रघुनाथ मोहल्ला, शीश महल और अलग-अलग गलियों में व्यावसायिक गतिविधियों का स्वरूप एक जैसा नहीं है।

उनका कहना है कि इन क्षेत्रों में संपत्तियों के प्रकार, व्यावसायिक गतिविधियां और उपलब्ध सुविधाएं भी अलग-अलग हैं। ऐसे में पूरे मुख्य बाजार को एक ही श्रेणी में रखकर समान टैक्स दर लागू करना तर्कसंगत नहीं माना जा सकता। शहरवासियों ने नगर परिषद से मांग की है कि जोन तय करने के पीछे अपनाए गए आधार और मापदंड को सार्वजनिक किया जाए, ताकि लोगों को यह स्पष्ट हो सके कि उनकी संपत्ति को किस आधार पर संबंधित जोन में रखा गया है।

सर्वे के बाद टैक्स तय करने का फार्मूला अब तक स्पष्ट नहीं

स्थानीय निवासियों के अनुसार कुछ माह पहले नगर परिषद की ओर से वार्डों में स्थित मकानों की नाप-नपाई और पैमाइश करवाई गई थी। लोगों का कहना है कि सर्वे तो पूरा कर लिया गया, लेकिन इसके बाद संपत्तियों पर हाउस टैक्स किस फार्मूले के आधार पर तय किया जाएगा, इसकी जानकारी अभी तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है।

शहरवासियों की मांग है कि नगर परिषद इस संबंध में पूरी जानकारी सार्वजनिक करे। इसमें मकान का कुल क्षेत्रफल, निर्मित क्षेत्र, आवासीय या व्यावसायिक उपयोग और संबंधित जोन के आधार पर टैक्स निर्धारण की प्रक्रिया स्पष्ट की जाए।

इसके साथ ही लोगों ने पुरानी और प्रस्तावित नई टैक्स दरों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रत्येक श्रेणी की संपत्ति पर पहले कितना टैक्स लिया जा रहा था और नई व्यवस्था में कितना टैक्स निर्धारित किया गया है, इसकी स्पष्ट जानकारी लोगों के सामने होनी चाहिए।

इससे संपत्ति मालिकों को प्रस्तावित बदलाव को समझने में आसानी होगी और वे अपनी आपत्तियां भी तथ्यों के आधार पर दर्ज करा सकेंगे।

मुख्य बाजार को एक ही जोन में रखने पर उठे सवाल

नगर परिषद द्वारा रामपुर के मुख्य बाजार को एक ही जोन में रखने के फैसले को लेकर भी शहरवासियों ने आपत्ति जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य बाजार से लेकर शिव दवाला मंदिर, रघुनाथ मोहल्ला, शीश महल और विभिन्न गलियों तक संपत्तियों और कारोबार की परिस्थितियां समान नहीं हैं।

कहीं व्यावसायिक गतिविधियां अधिक हैं तो कहीं आवासीय उपयोग प्रमुख है। इसी तरह अलग-अलग इलाकों में उपलब्ध सुविधाओं और संपत्तियों की स्थिति में भी अंतर है। ऐसे में सभी क्षेत्रों को एक ही श्रेणी में रखकर समान दर लागू करने से टैक्स निर्धारण में असमानता पैदा हो सकती है।

पूर्व पार्षदों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नगर परिषद क्षेत्रीय परिस्थितियों और संपत्तियों की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए जोन निर्धारण की समीक्षा करे।

शिमला नगर निगम की तर्ज पर टैक्स व्यवस्था को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग

शहरवासियों ने रामपुर में शिमला नगर निगम की तर्ज पर हाउस टैक्स लागू करने की चर्चा का मुद्दा भी उठाया है। लोगों का कहना है कि यदि इसी आधार पर टैक्स व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है तो नगर परिषद को इसकी पूरी प्रक्रिया और प्रस्तावित फार्मूले के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।

स्थानीय प्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने नगर परिषद प्रशासन से आग्रह किया है कि नई टैक्स दरों को अंतिम रूप देने से पहले प्राप्त सभी आपत्तियों और सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाए।

लोगों का कहना है कि टैक्स निर्धारण की प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए पुरानी और नई दरों का तुलनात्मक विवरण, जोन निर्धारित करने का आधार तथा टैक्स तय करने का फार्मूला सार्वजनिक किया जाना जरूरी है। इसके बाद ही क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक संशोधन किए जाएं।

शहरवासियों ने उम्मीद जताई है कि नगर परिषद आपत्तियों और सुझावों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित नई दरों की समीक्षा करेगी और क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुरूप टैक्स व्यवस्था को अंतिम रूप देगी।