TMC के नाम-चुनाव चिन्ह पर EC के अंतरिम फैसले से सियासत गरम, राहुल गांधी ने लगाया BJP-EC पर पार्टी तोड़ने का आरोप

TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के बाद राहुल गांधी ने BJP और EC पर पार्टी तोड़ने और चिन्ह छीनने के आरोप लगाए।

TMC के नाम-चुनाव चिन्ह पर EC के अंतरिम फैसले से सियासत गरम, राहुल गांधी ने लगाया BJP-EC पर पार्टी तोड़ने का आरोप

TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर EC का अंतरिम फैसला
राहुल गांधी ने BJP और चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप
कहा- पहले शिवसेना, फिर NCP और अब TMC में दिख रहा एक जैसा पैटर्न


तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पहले शिवसेना, फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और अब तृणमूल कांग्रेस के मामले में उन्हें एक जैसा पैटर्न दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर पहले किसी राजनीतिक दल को तोड़ते हैं और उसके बाद उसका चुनाव चिन्ह छीन लेते हैं। ये आरोप राहुल गांधी ने लगाए हैं।

दरअसल, चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे विवाद के बीच अंतरिम व्यवस्था के तहत पार्टी के नाम ‘All India Trinamool Congress’ और उसके आरक्षित ‘Flowers and Grass’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। आयोग के मुताबिक, दोनों पक्ष पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा कर रहे हैं और इस विवाद पर अंतिम निर्णय के लिए चुनाव चिन्ह आदेश के पैरा 15 के तहत आगे की प्रक्रिया जरूरी है।

आयोग के अंतरिम आदेश के अनुसार, आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव में दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट फिलहाल TMC के मूल नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। दोनों पक्षों से वैकल्पिक नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प मांगे गए हैं। आयोग ने कहा है कि अंतिम निर्णय होने तक यह अंतरिम व्यवस्था लागू रहेगी।

राहुल गांधी बोले- वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी

राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इस घटनाक्रम को व्यापक राजनीतिक संदर्भ से जोड़ते हुए कहा कि अगर पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं है। उन्होंने ‘वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’ का उल्लेख करते हुए इसे लोकतांत्रिक पतन का प्रतीक बताया।

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि आयोग का काम जनता के जनादेश की रक्षा करना है, लेकिन उनके आरोप के मुताबिक आयोग ऐसी ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को पलट देती हैं। राहुल गांधी ने इन आरोपों के आधार पर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।

TMC के नाम और चिन्ह पर आयोग की अंतरिम व्यवस्था

चुनाव आयोग के अनुसार, TMC से जुड़े विवाद में दो प्रतिद्वंद्वी समूह सामने आए हैं और दोनों ही स्वयं को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का प्रतिनिधि बता रहे हैं। आयोग ने कहा कि इस विवाद का अंतिम निर्धारण विस्तृत प्रक्रिया के तहत किया जाना है। आगामी उपचुनावों की समय-सीमा को देखते हुए आयोग ने फिलहाल दोनों पक्षों को अलग-अलग नाम और मुक्त चुनाव चिन्ह आवंटित करने की अंतरिम व्यवस्था की है।

आयोग ने दोनों समूहों से अपने पसंदीदा तीन नाम और तीन चुनाव चिन्ह प्राथमिकता के क्रम में देने को कहा था। इन विकल्पों में से आयोग प्रत्येक समूह के लिए एक नाम और एक चुनाव चिन्ह आवंटित कर सकता है। यह व्यवस्था अंतिम निर्णय तक अंतरिम तौर पर लागू रहने की बात कही गई है।

फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं

चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले पर TMC से जुड़े पक्षों की प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग रही हैं। एक पक्ष ने आदेश को स्वीकार नहीं करने की बात कही और इसे कानून के अनुरूप नहीं बताया, जबकि दूसरे पक्ष ने अंतरिम व्यवस्था को स्वीकार करने की बात कही है। इससे साफ है कि पार्टी के नाम, संगठनात्मक नियंत्रण और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद अभी अंतिम रूप से समाप्त नहीं हुआ है।

इस बीच राहुल गांधी के बयान ने इस पूरे विवाद को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बना दिया है। उन्होंने अपने आरोपों के जरिए चुनाव आयोग की भूमिका और राजनीतिक दलों से जुड़े नाम तथा चुनाव चिन्ह के विवादों को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, चुनाव आयोग का मौजूदा आदेश अंतरिम है और पार्टी के नाम तथा चुनाव चिन्ह पर अंतिम निर्धारण की प्रक्रिया आगे जारी है।