मैनेजर की ह*त्या का खुलासा, पूर्व सहकर्मी और लिव-इन पार्टनर गिरफ्तार
गुरुग्राम में मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा की हत्या का पुलिस ने खुलासा किया। पूर्व सहकर्मी आन्या और संयम गिरफ्तार, दो गोलियां मारकर शव नाले में फेंका।
गुरुग्राम में मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा की हत्या, पूर्व सहकर्मी और लिव-इन पार्टनर गिरफ्तार
➤ रुपयों के लेनदेन को लेकर विवाद के बाद गर्दन में मारी दो गोलियां, शव सात घंटे कार में रखा
➤ हत्या के बाद सेक्टर-70 के नाले में शव फेंककर उत्तराखंड भागे, नए सिम से पुलिस ने पकड़ा
गुरुग्राम: हरियाणा के गुरुग्राम में सेक्टर-70 के नाले से मृत मिले युवक की पहचान दिल्ली के सरिता विहार निवासी युवराज सिंह मनचंदा के रूप में हुई है। युवराज गुरुग्राम सेक्टर-29 स्थित अडानी रियल्टी कंपनी में मैनेजर था। शुक्रवार को पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए युवराज की पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स और उसके लिव-इन पार्टनर संयम सचदेवा को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, युवराज अपनी शादी की शॉपिंग करने घर से निकला था। इसी दौरान उसकी आन्या और संयम से कहासुनी हुई। आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद दोनों ने युवराज की गर्दन में दो गोली मारकर हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को करीब सात घंटे तक क्रेटा कार में रखा गया। इसके बाद शव को सेक्टर-70 के नाले में फेंककर दोनों उत्तराखंड भाग गए। पुलिस ने दोनों को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया।
6 सितंबर को बहन के साथ शादी की शॉपिंग पर निकला था युवराज
पुलिस के मुताबिक, 6 सितंबर को युवराज सिंह मनचंदा अपनी बहन के साथ दिल्ली के लाजपत नगर सेंट्रल मार्केट में शादी की शॉपिंग करने गया था। इसी साल उसकी शादी होने वाली थी। इसके बाद दोनों लाजपत नगर-2 के K-Block स्थित गोल्डन ड्रैगन रेस्टोरेंट पहुंचे।
शाम करीब 4 बजे युवराज ने अपनी बहन से कहा कि उसकी गुरुग्राम में एक मीटिंग है और वह रात करीब 10 बजे तक घर वापस आ जाएगा। इसके बाद युवराज वहां से चला गया, लेकिन रात तक घर नहीं लौटा।
मोबाइल बंद हुआ तो परिवार ने शुरू की तलाश
युवराज के घर नहीं लौटने और उसका मोबाइल फोन बंद आने के बाद परिवार ने उसकी तलाश शुरू कर दी। परिवार को पांच दिन तक युवराज का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद उसकी बहन हरसिमरन मनचंदा ने 11 सितंबर को शाम करीब 4:15 बजे लाजपत नगर थाने में युवराज के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने युवराज की तलाश के साथ उसके मोबाइल फोन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच शुरू की।
मोबाइल रिकॉर्ड से पूर्व सहकर्मी आन्या तक पहुंची पुलिस
जांच के दौरान पुलिस ने युवराज के मोबाइल से जुड़े सीडीआर और आईपीडीआर रिकॉर्ड की जांच की। इसमें सामने आया कि युवराज ने अपनी पूर्व ऑफिस सहकर्मी आन्या वत्स से बातचीत की थी।
परिवार से बातचीत में भी पुलिस को जानकारी मिली कि युवराज ने बताया था कि वह गुरुग्राम में आन्या से मिलने जा रहा है। इसके बाद पुलिस ने आन्या की तलाश शुरू की, लेकिन उसका मोबाइल बंद मिला।
पुलिस ने युवराज और आन्या के ऑफिस से जुड़े लोगों से भी जानकारी जुटाई। जांच में पता चला कि आन्या ने नया सिम खरीदा है। नए सिम की जांच के बाद पुलिस को उसकी लोकेशन उत्तराखंड में मिली।
उत्तराखंड से आन्या और संयम गिरफ्तार
आन्या की लोकेशन उत्तराखंड में मिलने के बाद दिल्ली पुलिस वहां पहुंची। पुलिस ने आन्या वत्स और उसके लिव-इन पार्टनर संयम सचदेवा को वहां से पकड़ लिया।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आन्या और संयम ने युवराज सिंह मनचंदा की हत्या में हाथ होने की बात कबूल ली। दोनों को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाई।
रुपयों के लेनदेन को लेकर हुआ था विवाद
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि युवराज के साथ रुपयों के लेनदेन को लेकर कहासुनी हुई थी। विवाद बढ़ने के बाद दोनों ने उसकी गर्दन में दो गोली मार दी। गोली लगने से युवराज की मौके पर ही मौत हो गई।
हत्या के बाद दोनों डर गए। उन्होंने शव को ठिकाने लगाने के लिए जगह तलाशने की कोशिश की, लेकिन कोई पुख्ता जगह नहीं मिलने पर शव को कार में ही रखा।
सात घंटे तक कार में रखा शव, फिर सेक्टर-70 के नाले में फेंका
आरोपियों के मुताबिक, युवराज की मौत के बाद उन्होंने उसके शव को कम से कम सात घंटे तक कार में रखा। इस दौरान वे शव को ठिकाने लगाने के लिए जगह तलाशते रहे।
जब उन्हें कोई पुख्ता जगह नहीं मिली तो उन्होंने युवराज का शव सेक्टर-70 के नाले में फेंक दिया। इसके बाद दोनों उत्तराखंड भाग गए।
गुरुग्राम में मिला शव तो तस्वीरों से हुई युवराज की पहचान
परिवार की ओर से युवराज के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद दिल्ली पुलिस को जानकारी मिली कि गुरुग्राम में एक युवक का शव मिला है। इसके बाद पुलिस ने गुरुग्राम पुलिस से संपर्क कर शव की तस्वीरें हासिल कीं।
तस्वीरें युवराज के परिवार वालों को दिखाई गईं। परिवार ने मृतक की पहचान युवराज सिंह मनचंदा के रूप में की।
बादशाहपुर थाना पुलिस को युवराज की डेडबॉडी इसी हालत में मिली थी।
हत्या के बाद नया सिम बना पुलिस के लिए अहम सुराग
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आन्या एक नए मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर रही है। पुलिस ने इस नंबर के कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन की जांच शुरू की।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को आन्या की लोकेशन उत्तराखंड में मिली। इसके बाद पुलिस ने वहां पहुंचकर आन्या और संयम को गिरफ्तार कर लिया। इस तरह नए सिम की जानकारी दोनों आरोपियों तक पहुंचने में अहम कड़ी बनी।
आन्या और युवराज के बीच पहले से था वित्तीय विवाद
पुलिस के मुताबिक, आन्या और युवराज पहले एमार कंपनी में साथ काम करते थे। वर्ष 2022 में वित्तीय कुप्रबंधन के आरोपों के चलते कंपनी ने आन्या को नौकरी से निकाल दिया था। उस समय तक युवराज कंपनी छोड़ चुका था।
दोनों के बीच कथित तौर पर कुछ वित्तीय लेनदेन भी अनसुलझे थे। युवराज को बाद में दूसरी नौकरी मिल गई, लेकिन आन्या को नौकरी नहीं मिली।
युवराज के परिवार ने आरोप लगाया है कि इसके बाद से आन्या उसे परेशान कर रही थी। परिवार के मुताबिक, आन्या लगातार फोन करती थी और युवराज से झगड़ा करती थी। परिवार का आरोप है कि यह उसकी आदत बन गई थी।
पुलिस के अनुसार, 6 सितंबर को आन्या ने ही युवराज को कॉल कर बुलाया था।
पुलिस को अब वारदात में इस्तेमाल गन की तलाश
पुलिस के मुताबिक, युवराज की हत्या में इस्तेमाल की गई गन को बरामद करने की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस आरोपियों से पूछताछ के साथ वारदात से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जांच कर रही है।
फिलहाल दोनों आरोपी पांच दिन की पुलिस रिमांड पर हैं। पुलिस रिमांड के दौरान हत्या में इस्तेमाल हथियार, वारदात की पूरी कड़ी और शव को ठिकाने लगाने से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।
युवती बार-बार बदल रही बयान, पैसे के लेनदेन को शुरुआती कारण बताया
दक्षिण-पूर्व दिल्ली जिला पुलिस उपायुक्त विनीत कुमार ने बताया कि मामले में गहनता से जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में युवराज की हत्या का कारण पैसे का लेन-देन बताया जा रहा है।
हालांकि, पुलिस के अनुसार युवती बार-बार अपने बयान बदल रही है। दोनों आरोपियों को बृहस्पतिवार को कोर्ट में पेश कर 5 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस अब रिमांड के दौरान मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
Akhil Mahajan