बीजेपी से गठबंधन का फैसला उस समय उचित था, जनता ने नहीं माना तो मिली सजा : अजय सिंह चौटाला

अजय चौटाला ने भाजपा-जजपा गठबंधन को लेकर कहा कि फैसला उस समय उचित था, लेकिन जनता ने इसे नहीं माना। उन्होंने जजपा की वापसी और जनगणना पर भी बात रखी।

बीजेपी से गठबंधन का फैसला उस समय उचित था, जनता ने नहीं माना तो मिली सजा : अजय सिंह चौटाला

गठबंधन का फैसला उचित था, लेकिन जनता ने नहीं माना
अजय बोले- राजनीतिक नुकसान का खामियाजा भुगत चुके, अब जनता के बीच जाएंगे
जनगणना के सवालों को लेकर भी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप


 जननायक जनता पार्टी (जजपा) के सुप्रीमो अजय सिंह चौटाला ने भाजपा के साथ गठबंधन के फैसले को लेकर अपनी पार्टी का पक्ष रखा है। गोहाना में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि राजनीति में कई बार किसी फैसले के सही या गलत होने का आकलन बाद में होता है। उनके अनुसार जब जजपा ने भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन का फैसला लिया था, तब पार्टी की नजर में वह उचित था, लेकिन जनता ने इसे उचित नहीं माना और चुनाव में पार्टी को उसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा। अजय चौटाला ने कहा कि पार्टी उस नुकसान का खामियाजा भुगत चुकी है और अब वह दोबारा जनता के बीच जा रही है।

अजय चौटाला ने कहा कि जजपा कभी भाजपा की बड़ी तो कभी छोटी सहयोगी के रूप में काम करती रही है। उनके अनुसार गठबंधन के समय लिया गया निर्णय उस वक्त उचित लगा था, लेकिन जनता की प्रतिक्रिया अलग रही। उन्होंने कहा कि जहां-जहां भाजपा का प्रभाव रहा, वहां लोगों ने भाजपा को समर्थन दिया और जजपा को चुनावी नुकसान उठाना पड़ा। अब पार्टी जनता के बीच जाकर अपनी राजनीतिक जमीन दोबारा मजबूत करने की बात कह रही है।

दीपेंद्र हुड्डा के बी-टीम वाले बयान पर पलटवार

कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा की ओर से जजपा को भाजपा की बी-टीम बताए जाने के सवाल पर भी अजय चौटाला ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस आरोप को खारिज करते हुए कांग्रेस पर ही भाजपा के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया। यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप है और दोनों पक्षों की अपनी-अपनी राजनीतिक व्याख्या है।

अजय चौटाला ने कहा कि जजपा को बी-टीम कहने के बजाय दूसरे राजनीतिक दलों की भूमिका पर सवाल उठाए जाने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी अब लोगों के बीच जाकर अपनी बात रखेगी और राजनीतिक वापसी की कोशिश करेगी।

जनगणना के सवालों पर भी सरकार को घेरा

अजय चौटाला ने जनगणना को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि जनगणना के फॉर्म में परिवार के सदस्यों की संख्या और जाति के अलावा मकान, फर्श, पशुओं और वाहन से संबंधित जानकारी भी पूछी जा रही है। उनके अनुसार इस तरह की जानकारी से परिवार की आर्थिक स्थिति का आंकलन किया जा सकता है।

अजय चौटाला ने आरोप लगाया कि इस जानकारी का इस्तेमाल भविष्य में बुढ़ापा पेंशन और बीपीएल कार्ड जैसी सरकारी सुविधाओं को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने इसे सरकार का अगला षड्यंत्र बताया। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आरोप है। केंद्र सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार जनगणना 2027 की प्रक्रिया दो चरणों में प्रस्तावित है और मकानों की सूची तथा आवास संबंधी गणना अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान तथा जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में प्रस्तावित है।

पहले भी युवाओं को लेकर दे चुके हैं बयान

अजय चौटाला इससे पहले भी युवाओं और सरकार के खिलाफ आंदोलन को लेकर बयान दे चुके हैं। जनवरी 2026 में महेंद्रगढ़ के एक युवा सम्मेलन में उनके भाषण का वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में हुए आंदोलनों का उदाहरण देते हुए युवाओं से संगठित होने की बात कही थी। उन्होंने सत्ता में बैठे लोगों को गद्दी से हटाने और उन्हें सड़कों पर पीटने जैसी भाषा का इस्तेमाल किया था। इस बयान पर भाजपा नेताओं की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी।

बाद में इस बयान को लेकर राजनीतिक विवाद हुआ और भाजपा नेताओं ने अजय चौटाला के बयान की आलोचना की। दूसरी ओर जजपा की ओर से युवाओं और राजनीतिक बदलाव की बात को लेकर अपनी राजनीतिक स्थिति रखी गई।

अब जनता के बीच जाने की बात

गोहाना में दिए गए ताजा बयान में अजय चौटाला ने कहा कि पार्टी अपने पिछले राजनीतिक अनुभवों से निष्कर्ष निकाल चुकी है। उनका कहना है कि जजपा अब जनता के बीच जाकर अपनी बात रखेगी और संगठन को दोबारा सक्रिय करेगी।

भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर उनका ताजा बयान ऐसे समय में आया है जब हरियाणा की राजनीति में अलग-अलग दल अपने संगठन और राजनीतिक आधार को मजबूत करने में जुटे हैं। अजय चौटाला का बयान इस बात का संकेत देता है कि जजपा अपने पिछले गठबंधन के अनुभव और उसके राजनीतिक प्रभाव को लेकर जनता के बीच अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है।