हरियाणा में मानसून की विदाई,राजस्थान से सटे इलाकों में धुंध, 22% कम बारिश
हरियाणा में मानसून की विदाई शुरू हो गई है। सीजन में 22% कम बारिश, राजस्थान से सटे इलाकों में धुंध और किसानों को सिंचाई-स्प्रे से बचने की सलाह दी गई।
हरियाणा में मानसून की विदाई शुरू, 20 सितंबर से मौसम मुख्य रूप से शुष्क
➤ सीजन में अब तक 317 मिमी बारिश, सामान्य 408 मिमी से 22% कम
➤ राजस्थान से सटे इलाकों में हल्की धुंध, किसानों को 2-3 दिन सिंचाई और स्प्रे से बचने की सलाह
हरियाणा में मानसून की गतिविधियों पर अब ब्रेक लगने जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के अनुसार पश्चिमी राजस्थान के रास्ते दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू होने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन गई हैं। इसके असर से 20 सितंबर से हरियाणा में मौसम मुख्य रूप से शुष्क हो जाएगा।
मानसून की विदाई के साथ प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम में बदलाव दिखाई देने लगा है। हिसार सहित राजस्थान से सटे इलाकों में सुबह के समय हल्की धुंध देखने को मिली। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक मानसूनी ट्रफ रेखा अब कमजोर पड़ रही है, जिसके कारण राज्य में नमी का असर धीरे-धीरे कम होने लगा है।
दो दिन पहले हुई बारिश थमने और धूप खिलने के कारण प्रदेश के औसत अधिकतम तापमान में 0.8°C की बढ़ोतरी दर्ज की गई। राज्य में सबसे ज्यादा तापमान फरीदाबाद और नूंह में 35.2°C दर्ज किया गया।
हरियाणा में सामान्य से 22 फीसदी कम बारिश, 317 मिमी पर अटका आंकड़ा
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस मानसून सीजन में हरियाणा में बारिश का कोटा पूरा नहीं हो पाया है। जून से अब तक प्रदेश में 317 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जबकि सामान्य औसत बारिश 408 मिमी है। इस तरह प्रदेश में अब तक सामान्य से 22% कम बारिश हुई है।
प्रदेश के 12 जिलों में सामान्य, 9 जिलों में कम और सिर्फ 1 जिले में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है। सितंबर में भी बारिश की स्थिति बहुत बेहतर नहीं रही। पंचकूला और पलवल को छोड़कर शेष राज्य में कम बारिश दर्ज की गई है।
सितंबर में अब तक प्रदेश में कुल 34.1 मिमी बारिश हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 58.3 मिमी मानी जाती है। इस लिहाज से सितंबर में अब तक बारिश सामान्य से 42 फीसदी कम रही है।
25 साल में 9वीं बार 300 मिमी के आसपास या उससे कम बारिश
हरियाणा में इस मानसून सीजन की कम बारिश का आंकड़ा पिछले 25 वर्षों के रिकॉर्ड में भी नजर आ रहा है। प्रदेश में पिछले 25 वर्षों में यह 9वीं बार है, जब मानसून सीजन में 300 मिमी के आसपास या उससे कम बारिश दर्ज की गई है।
सबसे कम बारिश का रिकॉर्ड वर्ष 2014 में रहा था। उस साल प्रदेश में सिर्फ 200 मिमी बारिश हुई थी, जो सामान्य से 57% कम थी।
पिछले वर्षों के आंकड़ों के अनुसार 2002 में 320.5 मिमी, 2006 में 290.6 मिमी, 2007 में 314.5 मिमी, 2009 में 290.7 मिमी, 2012 में 277.8 मिमी, 2014 में 200.1 मिमी, 2015 में 287.7 मिमी, 2019 में 255 मिमी और 2026 में अब तक 317 मिमी बारिश दर्ज की गई है।
किसानों के लिए मौसम विभाग की एडवाइजरी, 2-3 दिन सिंचाई और स्प्रे से बचें
मानसून की विदाई और वातावरण में बनी नमी को देखते हुए आईएमडी ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने कहा है कि अगले 2-3 दिनों तक फसलों में सिंचाई न करें और न ही किसी रसायन का छिड़काव करें।
मौसम में नमी की मात्रा 50% से 90% तक रहने के कारण फसलों में कुछ कीटों का खतरा बढ़ सकता है। कपास की फसल में सफेद मक्खी और गुलाबी सुंडी, जबकि धान में तना छेदक कीट का खतरा बढ़ने की संभावना है।
मौसम साफ होने के बाद ही अनुशंसित दवाओं का स्प्रे करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही किसानों को कहा गया है कि सब्जियों की तुड़ाई साफ मौसम में करें।
पशुओं को हवादार शेड में रखने की सलाह
मौसम विभाग ने पशुपालकों के लिए भी जरूरी सलाह जारी की है। नमी वाले मौसम में पशुओं को हवादार शेड में रखने के लिए कहा गया है। साथ ही उन्हें 50-100 ग्राम मिनरल मिक्सचर देने की सलाह दी गई है।
मानसून की वापसी के साथ आने वाले दिनों में प्रदेश में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने की स्थिति बन रही है। वहीं कम बारिश के चलते इस सीजन में हरियाणा का कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे ही बना हुआ है।
Akhil Mahajan