कैलाश दर्शन: 13,500 फीट पर आस्था का अद्भुत नजारा, मणिमहेश डल में हजारों शिवभक्तों ने आस्था की डुबकी
राधा अष्टमी पर चंबा की मणिमहेश डल झील में शाही स्नान शुरू हुआ। हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र झील में आस्था की डुबकी लगाकर भगवान शिव का आशीर्वाद मांगा।
➤ मणिमहेश डल झील में विधिवत शुरू हुआ शाही स्नान
➤ 13,500 फीट की ऊंचाई पर आस्था के साथ पहुंचे हजारों श्रद्धालु
➤ ‘डल तोड़ने’ की रस्म के बाद शुरू हुआ पवित्र बड़ा न्हौण
चंबा। राधा अष्टमी के पावन अवसर पर हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की पवित्र मणिमहेश डल झील में शाही स्नान यानी बड़ा न्हौण विधिवत रूप से शुरू हो गया। समुद्र तल से करीब 13,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस पवित्र झील में स्नान के लिए सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। कड़ाके की ठंड और कठिन पर्वतीय परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालुओं में भगवान शिव के प्रति आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा है। श्रद्धालु पवित्र डल झील में आस्था की डुबकी लगाकर सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संचुई के शिव चेलों और त्रिलोचन महादेव के वंशजों ने विधि-विधान के साथ ‘डल तोड़ने’ की रस्म अदा की। इस रस्म के पूरा होने के बाद ही शाही स्नान की शुरुआत हुई। मणिमहेश यात्रा में ‘डल तोड़ने’ की यह रस्म विशेष धार्मिक महत्व रखती है और इसके बाद होने वाले बड़े न्हौण को यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र पड़ाव माना जाता है।
विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु
राधा अष्टमी के अवसर पर पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मणिमहेश पहुंचे हैं। दुर्गम पर्वतीय रास्तों और कठिन मौसम की परिस्थितियों के बीच श्रद्धालु भगवान शिव के पवित्र धाम तक पहुंच रहे हैं। मणिमहेश पहुंचने के बाद श्रद्धालु डल झील में स्नान कर धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं और सुख-समृद्धि तथा परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
राधा अष्टमी पर होने वाला शाही स्नान मणिमहेश यात्रा का मुख्य आकर्षण माना जाता है। इस दौरान पवित्र डल झील में स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ उमड़ती है। आस्था के इस पर्व में शामिल होने के लिए अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालुओं के साथ श्रद्धालु-पर्यटक भी मणिमहेश पहुंचते हैं।
आस्था के साथ कठिन परिस्थितियों का सामना
करीब 13,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित मणिमहेश डल झील तक पहुंचने का मार्ग आसान नहीं है। कड़ाके की ठंड और कठिन पर्वतीय परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था के चलते हजारों लोग दुर्गम पर्वतीय मार्ग तय कर पवित्र धाम तक पहुंचे हैं।
धार्मिक मान्यता है कि मणिमहेश डल में श्रद्धापूर्वक स्नान करने से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु कठिन यात्रा पूरी कर मणिमहेश पहुंचते हैं। राधा अष्टमी के दिन होने वाला शाही स्नान इस धार्मिक यात्रा का विशेष अवसर माना जाता है।
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रबंध
शाही स्नान को देखते हुए प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। स्वास्थ्य, पेयजल, ठहराव और आपदा प्रबंधन से जुड़े दल भी तैनात किए गए हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता पहुंचाना है।
मणिमहेश डल झील में शाही स्नान शुरू होने के साथ ही पूरा क्षेत्र धार्मिक आस्था और श्रद्धालुओं की गतिविधियों से सराबोर हो गया है। श्रद्धालु पवित्र झील में स्नान कर भगवान शिव का आशीर्वाद लेने की कामना कर रहे हैं। राधा अष्टमी के इस विशेष अवसर पर मणिमहेश में आस्था, परंपरा और धार्मिक अनुष्ठानों का संगम देखने को मिल रहा है।
Akhil Mahajan