सेक्टर-6 में सीवर के दूषित पानी से जीना हुआ मुहाल, दो महीने से समस्या बरकरार

पानीपत के सेक्टर-6 में दो महीने से सीवर का दूषित पानी खुले मैदान में जमा है। मच्छरों की भरमार और बीमारी के खतरे से स्थानीय लोग परेशान हैं।

सेक्टर-6 में सीवर के दूषित पानी से जीना हुआ मुहाल, दो महीने से समस्या बरकरार

सीवर ओवरफ्लो से खुले मैदान में जमा गंदा पानी
मच्छरों की भरमार, बीमारी फैलने का बढ़ा खतरा
बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं


पानीपत, 19 फरवरी। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी/हूडा) के सेक्टर-6 में सीवर की समस्या ने आसपास रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) कार्यालय और मकान नंबर 731 के सामने बने सीवर के मेनहोल से दूषित पानी का रिसाव और ओवरफ्लो होने के कारण गंदा पानी खुले मैदान में जमा हो रहा है। जिस स्थान को प्राइमरी स्कूल के लिए छोड़ा गया है, वहां लंबे समय से सीवर का पानी जमा होने के कारण आसपास के लोगों को दुर्गंध, मच्छरों और गंदगी के बीच रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या करीब दो महीने से अधिक समय से बनी हुई है, लेकिन संबंधित विभाग की इंजीनियरिंग शाखा की ओर से स्थायी समाधान नहीं किया गया है।

मकान नंबर 731 के सामने बने सीवर के मेनहोल की मुख्य दीवार से रिसाव होने के बाद गंदा पानी आसपास की खाली जगह में जमा हो गया। लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण वहां गंदगी और बदबू की स्थिति बनी हुई है। इसी तरह ईपीएफओ कार्यालय के सामने बने मेनहोल से सीवर का पानी ओवरफ्लो होकर खुले मैदान में फैल रहा है। इससे आसपास रहने वाले लोगों और वहां से गुजरने वाले नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार दूषित पानी के कारण क्षेत्र में मच्छरों की संख्या लगातार बढ़ गई है। पानी जमा होने से मच्छरों के पनपने की आशंका बनी हुई है और नागरिकों को मलेरिया व डेंगू जैसी बीमारियों का डर सता रहा है। लोगों का कहना है कि बरसात और गर्मी के मौसम में ऐसी स्थिति और गंभीर हो सकती है, इसलिए विभाग को समस्या का स्थायी समाधान जल्द करना चाहिए।

दस बार शिकायत, फिर भी नहीं बदले हालात

सेक्टर-6 निवासी सुरेंद्र सिंह सांगवान ने बताया कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कम से कम दस बार संबंधित अधिकारियों को शिकायत की है। उनके अनुसार उन्होंने कनिष्ठ अभियंता से लेकर कार्यकारी अभियंता तक अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया। इसके अलावा एक बार अधीक्षक अभियंता और एचएसवीपी के संपदा अधिकारी को भी शिकायत की गई, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई ठोस बदलाव नहीं आया।

सांगवान ने बताया कि उन्होंने 25 अगस्त को हूडा पंचकूला के मुख्य प्रशासक को भी ई-मेल के माध्यम से इस समस्या की जानकारी दी थी। इसके बाद गत दिवस विभाग की ओर से ठेकेदार को मौके पर भेजा गया। ठेकेदार ने मिट्टी हटाकर कुछ काम किया, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार यह कार्रवाई समस्या का स्थायी समाधान नहीं कर सकी। उनका कहना है कि कार्य के बाद तो पानी का रिसाव पहले से अधिक बढ़ गया है

खानापूर्ति से बढ़ी परेशानी

स्थानीय निवासी का आरोप है कि मौके पर किया गया काम केवल खानापूर्ति तक सीमित रह गया। सीवर लाइन और मेनहोल से हो रहे रिसाव की वास्तविक समस्या को दूर करने के बजाय मिट्टी हटाकर कुछ काम कर दिया गया। इससे गंदा पानी खुले क्षेत्र में और अधिक फैलने लगा है।

सांगवान के अनुसार जब उन्होंने अधिकारियों से समस्या के समाधान को लेकर बात की तो उन्हें एक अधिकारी की ओर से एसडीओ से संपर्क करने के लिए कहा गया। उनका कहना है कि नागरिक लगातार अलग-अलग स्तर के अधिकारियों को शिकायत कर रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि एक ओर सत्ताधारी नेता और प्रशासन लोगों से घरों और आसपास सफाई रखने तथा दूषित पानी जमा नहीं होने देने की अपील करते हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी एजेंसी के क्षेत्र में ही लंबे समय से सीवर का गंदा पानी खुले में जमा है। लोगों का सवाल है कि यदि खुले में दूषित पानी जमा होने से बीमारी का खतरा है तो संबंधित विभाग को अपने अधीन क्षेत्र में ऐसी स्थिति को खत्म करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

नागरिकों ने मांग की है कि एचएसवीपी की इंजीनियरिंग शाखा मौके का निरीक्षण कर सीवर रिसाव और ओवरफ्लो की वास्तविक वजह का पता लगाए तथा केवल अस्थायी मिट्टी भराई के बजाय स्थायी समाधान किया जाए। साथ ही खुले मैदान में जमा दूषित पानी की निकासी और क्षेत्र की सफाई कराकर मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो जमा गंदे पानी के कारण आसपास का वातावरण और अधिक खराब हो सकता है। ऐसे में विभाग को शिकायतों का इंतजार करने के बजाय मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेते हुए कार्रवाई करनी चाहिए।