सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में अवैध इमारतों पर चलेगा बुलडोजर, CM ने दिए सख्त निर्देश

सत्य निकेतन PG हादसे के बाद दिल्ली में अवैध इमारतों पर बुलडोजर चलेगा। CM रेखा गुप्ता ने सभी PG-हॉस्टलों की जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में अवैध इमारतों पर चलेगा बुलडोजर, CM ने दिए सख्त निर्देश

➤ सत्य निकेतन PG हादसे के बाद दिल्ली में अवैध इमारतों पर बुलडोजर चलाने के निर्देश

➤ CM रेखा गुप्ता ने सभी PG-हॉस्टलों की गहन जांच और अधिकारियों की मौके पर मौजूदगी के दिए आदेश

➤ पांच गिरफ्तार, MCD ने 24 संपत्तियों पर तोड़फोड़ और 7 अवैध ढांचे सील किए


नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत के बाद राजधानी में अवैध और असुरक्षित निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली के कई इलाकों में अवैध निर्माण वाली इमारतों पर बुलडोजर चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने MCD के अधिकारियों को कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद रहने को कहा है, ताकि अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान प्रभावी तरीके से चलाया जा सके।

मुख्यमंत्री ने दिल्ली के सभी PG और हॉस्टलों की गहन जांच के भी निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को बिल्डिंग रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाने को कहा गया है कि अवैध निर्माण कब किया गया और इसके लिए संबंधित विभाग या अधिकारियों की जिम्मेदारी क्या थी।

सत्य निकेतन में 6 सितंबर को पांच मंजिला PG बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत हुई थी और 6 लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद MCD ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। मंगलवार तक 24 संपत्तियों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की जा चुकी थी, जबकि 7 अवैध ढांचों को सील किया गया था।

PG हादसे में अब तक पांच गिरफ्तार, मालिक से लेकर संचालक और लेबर कॉन्ट्रैक्टर तक आरोपी

सत्य निकेतन PG हादसे की जांच में पुलिस ने बुधवार तक 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें PG मालिक हरिराम बंसल, उनकी पत्नी उर्मिला, बेटे महेश, लेबर कॉन्ट्रैक्टर सनोज और PG संचालक सुधांशु शामिल हैं।

बुधवार को पुलिस ने सुधांशु को गिरफ्तार किया। वह गिरने वाली बिल्डिंग में हॉस्टल डेज नाम से PG चला रहा था। उसका पार्टनर शुभम त्यागी अभी फरार है। सुधांशु और शुभम ने अगस्त 2025 में यह बिल्डिंग लीज पर ली थी।

इससे पहले बिल्डिंग मालिक हरिराम बंसल, उनकी पत्नी उर्मिला, बेटे महेश और लेबर कॉन्ट्रैक्टर सनोज को गिरफ्तार किया जा चुका है। सोमवार रात हरिराम बंसल, उर्मिला और महेश को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया था।

हरिराम और उर्मिला न्यायिक हिरासत में, महेश को दो दिन की पुलिस रिमांड

कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस भव्य खराल ने हरिराम बंसल और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि महेश को 2 दिन की पुलिस हिरासत मिली।

पुलिस रिमांड के दौरान महेश ने बताया कि PG चलाने वाली कंपनी की शिकायत पर बेसमेंट में जमा पानी और सीलन की समस्या दूर करने के लिए मरम्मत का काम कराया जा रहा था।

बेसमेंट से पानी निकालने के बाद निर्माण कार्य के दौरान पावर ट्रोवेल मशीन भी चलाई जा रही थी। पुलिस को आशंका है कि मशीन से पैदा हुई कंपन और पहले से कमजोर संरचना के कारण बिल्डिंग भरभराकर गिर गई।

हालांकि हादसे की पूरी वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस निर्माण कार्य, बिल्डिंग की स्थिति और हादसे से पहले किए गए कामों से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।

पड़ोसी गर्ल्स PG में भी आईं दरारें, छात्राओं ने हादसे से कुछ मिनट पहले बनाया वीडियो

सत्य निकेतन हादसे के बाद पड़ोसी इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हॉस्टल डेज के पड़ोस में बने एक गर्ल्स PG की छात्राओं ने अपने कमरों में आई दरारों का वीडियो बनाया था।

दावा किया जा रहा है कि यह वही गर्ल्स हॉस्टल है, जो हॉस्टल डेज के ठीक पहले बना था। यहां रहने वाली अर्निका और मानसी, जो दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेकेंड ईयर की छात्राएं हैं, ने हादसे से कुछ मिनट पहले अपने कमरे की दीवारों और छत में आई दरारों का वीडियो बनाया था।

वीडियो में 20 साल की अर्निका को यह कहते सुना जा सकता है कि “लगता है गिरने वाली है।” इस वीडियो के सामने आने के बाद इलाके में मौजूद अन्य इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सत्य निकेतन हादसा, 10 सितंबर को फिर सुनवाई

सत्य निकेतन PG हादले का मामला मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया। सुनवाई के दौरान जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने संकेत दिया कि अदालत इस मुद्दे को केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रखेगी। देशभर में जर्जर और अवैध इमारतों की स्थिति की भी समीक्षा की जा सकती है।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरे सीनियर एडवोकेट अजीत सिन्हा की ओर से उठाया गया। उन्होंने 6 सितंबर को सत्य निकेतन में हुई दुर्घटना का उल्लेख किया। अजीत सिन्हा अवैध और असुरक्षित भवनों से जुड़े एक पुराने मामले में अदालत की सहायता कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट पहले भी देशभर में अवैध इमारतों को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। अब अदालत उनके पालन की स्थिति की समीक्षा करना चाहती है। मामले में अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।

पूरी दिल्ली में खतरनाक भवनों की जांच, 10 सितंबर तक मांगी गई रिपोर्ट

सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने दिल्ली के सभी जोन में खतरनाक और असुरक्षित भवनों की जांच शुरू कर दी है। MCD ने सभी जोन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों (बिल्डिंग) को अपने-अपने क्षेत्र की इमारतों का निरीक्षण कर 10 सितंबर तक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।

जांच के दौरान जुटाई गई जानकारी को दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल किए जाने वाले 10 दिन के भीतर के हलफनामे में शामिल किया जाएगा। इस मामले की सुनवाई 25 सितंबर को होगी।

इस बीच मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे में घायल लोगों से मुलाकात की और उनके लिए सहायता का ऐलान किया।

MCD के साउथ जोन के पांच अधिकारी सस्पेंड

हादसे के बाद MCD ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार को सोमवार को सस्पेंड कर दिया। उनके साथ चार इंजीनियरिंग अधिकारियों को भी विभागीय कार्रवाई पूरी होने तक निलंबित किया गया है।

इसके बाद IAS अधिकारी शाश्वत सौरभ को MCD के साउथ जोन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। 2016 बैच के AGMUT कैडर के IAS अधिकारी शाश्वत सौरभ फिलहाल साउथ वेस्ट जोन के डिप्टी कमिश्नर हैं।

सत्य निकेतन में करीब 300 मकान, 170 में चलते हैं PG

सत्य निकेतन का मौजूदा स्वरूप भी इस पूरे मामले को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। यह इलाका 1965 से 1970 के बीच झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए बसाया गया था। इसके बाद 1970 के दशक में साउथ कैंपस शुरू हुआ और कॉलेजों की संख्या बढ़ने के साथ यहां छात्रों का रहना भी बढ़ गया।

समय के साथ कई मूल आवंटियों ने अपने मकान बेच दिए। वर्तमान में इलाके में करीब 300 मकान हैं, जिनमें लगभग 170 मकानों में PG चल रहे हैं।

PG की बड़ी संख्या के कारण इलाके में बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं। ऐसे में इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा और उनमें किए जा रहे निर्माण की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

दिल्ली की पुरानी इमारतों पर अतिरिक्त मंजिलों का भार भी चिंता का विषय

अर्बन प्लानिंग एक्सपर्ट जगदीश ममगैन के मुताबिक दिल्ली की कई पुरानी इमारतें अतिरिक्त मंजिलों का भार सहने के हिसाब से नहीं बनाई गई हैं। ऐसे में बिना संरचनात्मक क्षमता की जांच के अतिरिक्त मंजिलें बनाए जाने से जोखिम बढ़ सकता है।

आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली के करीब 75 लाख घरों में से केवल 1.75 लाख इमारतों के पास स्वीकृत बिल्डिंग लेआउट प्लान हैं। यह स्थिति राजधानी में निर्माण नियमों के पालन और पुरानी इमारतों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े करती है।

सत्य निकेतन हादसे के बाद अब MCD और प्रशासन की जांच का दायरा बढ़ गया है। अवैध निर्माण की पहचान, पुराने भवनों की स्थिति और PG-हॉस्टलों में सुरक्षा मानकों की जांच पर जोर दिया जा रहा है।

छात्रों के PG खाली करने का सिलसिला शुरू

सत्य निकेतन हादसे के बाद इलाके में रहने वाले छात्रों के बीच भी चिंता बढ़ गई है। कई छात्र PG खाली करके दूसरी जगह जाने लगे हैं। हादसे ने न केवल अवैध निर्माण बल्कि उन इमारतों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र रह रहे हैं।

अब प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि जांच के दौरान खतरनाक इमारतों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी अन्य इमारत में सत्य निकेतन जैसी घटना दोबारा न हो।