आईएएस अमित खत्री के खिलाफ बदसलूकी के आरोपों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, मुख्य सचिव को जांच के निर्देश

हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने आईएएस अमित खत्री के खिलाफ बदसलूकी, धमकी और जबरन कार्यालय से निकालने के आरोपों पर मुख्य सचिव को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए।

आईएएस अमित खत्री के खिलाफ बदसलूकी के आरोपों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, मुख्य सचिव को जांच के निर्देश

➤ हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने आईएएस अमित खत्री के खिलाफ लगे बदसलूकी के आरोपों पर सख्त रुख अपनाया
➤ पिछली विभागीय जांच से असंतुष्ट आयोग ने मुख्य सचिव को निष्पक्ष जांच और रिकॉर्ड की समीक्षा के निर्देश दिए
➤ 29 जनवरी 2025 की घटना में धमकी, दुर्व्यवहार और जबरन कार्यालय से बाहर निकालने के आरोपों की जांच होगी


चंडीगढ़: हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग (DGTCP) के तत्कालीन निदेशक अमित खत्री के खिलाफ दुर्व्यवहार, धमकी और जबरन कार्यालय से बाहर निकलवाने के आरोपों के मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग (HHRC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने पहले कराई गई विभागीय जांच पर असंतोष जताते हुए हरियाणा के मुख्य सचिव को पूरे मामले की अपने स्तर पर जांच करने और नियमों के तहत आवश्यक प्रशासनिक या अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

यह आदेश मानवाधिकार आयोग की दो सदस्यीय पीठ ने पारित किया है। पीठ में न्यायिक सदस्य कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया शामिल हैं। आयोग के इस आदेश के बाद मामले में पहले दी गई क्लीन चिट पर भी सवाल खड़े हुए हैं और अब शिकायत में लगाए गए मूल आरोपों की दोबारा पड़ताल का रास्ता खुल गया है।

29 जनवरी 2025 को निदेशक कार्यालय में क्या हुआ था

मामला सेवानिवृत्त वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (SMO/ESI) डॉ. अखिल महाजन की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने मानवाधिकार आयोग में केस संख्या 280/3/2025 के तहत शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत के अनुसार, 29 जनवरी 2025 को डॉ. महाजन हाउसिंग मामले से संबंधित आधिकारिक कार्य के सिलसिले में चंडीगढ़ स्थित नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के तत्कालीन निदेशक अमित खत्री (IAS) के कार्यालय गए थे। आरोप है कि कार्यालय में उनके साथ कथित तौर पर घोर अशोभनीय व्यवहार और अपमान किया गया।

डॉ. महाजन का आरोप है कि आईएएस अधिकारी के इशारे पर कर्मचारियों ने उन्हें डराया-धमकाया और जबरन धक्के देकर दफ्तर से बाहर निकाल दिया। शिकायतकर्ता ने घटना के तुरंत बाद सेक्टर-19 चंडीगढ़ थाने में रोजनामचे में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके साथ ही उन्होंने कार्यालय में लगे सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग भी की थी।

हाईकोर्ट पहुंचा मामला, आयोग को दो महीने में निपटारे का आदेश

मानवाधिकार आयोग में कार्यवाही लंबित रहने के दौरान शिकायतकर्ता ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले में उच्च न्यायालय ने 13 मई 2026 को आदेश जारी किया।

उच्च न्यायालय ने मानवाधिकार आयोग को मामले का दो महीने के भीतर निपटारा करने का निर्देश दिया था। इसके बाद आयोग ने शिकायत और उससे जुड़े पहलुओं पर विचार करते हुए अपना आदेश पारित किया।

पिछली विभागीय जांच में मिली थी क्लीन चिट

मामले में इससे पहले अतिरिक्त मुख्य सचिव (नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग) की ओर से जांच कराई गई थी। इस जांच में आईएएस अमित खत्री को क्लीन चिट दे दी गई थी।

हालांकि, डॉ. अखिल महाजन ने इस जांच पर गंभीर आपत्ति जताई थी। उन्होंने जांच को पक्षपातपूर्ण बताते हुए कहा था कि जिस विभाग के अधिकारी पर आरोप लगाए गए हैं, उसी विभाग के उच्चाधिकारी द्वारा जांच कराया जाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

शिकायतकर्ता ने इसे संस्थागत पूर्वाग्रह (Institutional Bias) से प्रभावित जांच भी बताया था। उनका कहना था कि जांच में घटना से जुड़े मूल आरोपों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया और सीसीटीवी फुटेज जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य की भी अनदेखी हुई।

उनकी आपत्ति के अनुसार, जांच का मुख्य फोकस हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़े विवाद पर रहा, जबकि शिकायत में लगाए गए दुर्व्यवहार, धमकी और जबरन कार्यालय से बाहर निकालने के आरोपों की सही परिप्रेक्ष्य में पड़ताल नहीं की गई।

मानवाधिकार आयोग ने जांच के तरीके और दायरे पर जताई असहमति

मानवाधिकार आयोग ने अपने आदेश में लोक सेवकों के आचरण को नागरिकों की गरिमा और सुरक्षा से सीधे जुड़ा महत्वपूर्ण विषय माना है। आयोग ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक पद पर बैठे अधिकारियों का नागरिकों के साथ व्यवहार केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का विषय नहीं है, बल्कि इससे नागरिक के सम्मान और सुरक्षा का भी संबंध होता है।

आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए।

आयोग ने अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा कराई गई पिछली जांच के तरीके और उसके दायरे पर असंतोष जताया। आयोग के अनुसार, जांच में शिकायत के उन मूल आरोपों की पर्याप्त पड़ताल नहीं की गई, जिनमें जबरन बाहर निकालने, धमकी देने और सीसीटीवी फुटेज से जुड़े पहलू शामिल थे।

अब मुख्य सचिव करेंगे मामले की जांच

मानवाधिकार आयोग ने मामले का निपटारा करते हुए हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव को अपने स्तर पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि शिकायतकर्ता की ओर से उठाए गए सभी ऐतराज और अधिकारियों के आचरण की निष्पक्ष तरीके से जांच की जाए।

मुख्य सचिव को मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा करने के लिए भी कहा गया है। इसके अलावा, जांच में सामने आने वाले तथ्यों और नियमों-कानून के आधार पर जो भी उचित प्रशासनिक या अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) बनती है, उसे अमल में लाने के निर्देश दिए गए हैं।

इस तरह मानवाधिकार आयोग ने पिछली विभागीय जांच से असंतोष जताते हुए मामले की जिम्मेदारी राज्य के प्रशासनिक प्रमुख यानी मुख्य सचिव को सौंप दी है। अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा के आधार पर आगे की कार्रवाई का फैसला किया जाएगा।