सेब की MIS खरीद दर ₹12 से बढ़ाकर ₹20 करने की मांग, राठौर बोले—बढ़ती लागत ने बागवानों की बढ़ाई मुश्किलें
हिमाचल में कुलदीप राठौर ने सेब की MIS खरीद दर ₹12 से बढ़ाकर ₹20 प्रति किलो करने की मांग की और बढ़ती लागत, फसल नुकसान व बागवानों की समस्याएं उठाईं।
➤ MIS के तहत सेब की खरीद दर ₹12 से बढ़ाकर ₹20 करने की मांग
➤ 13-14 विधायकों ने CM सुक्खू को ज्ञापन सौंपकर दर बढ़ाने की मांग की
➤ किशाऊ परियोजना में पर्यावरण और विस्थापन पर वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत बताई
शिमला। हिमाचल प्रदेश में सेब की MIS खरीद दर बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। ठियोग से कांग्रेस विधायक और AICC प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने सरकार से मांग की है कि बागवानों को राहत देने के लिए सेब की न्यूनतम समर्थन योजना यानी MIS के तहत खरीद दर को मौजूदा 12 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 20 रुपये प्रति किलो किया जाए। राठौर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मजदूरी, खाद, उर्वरक, फंगीसाइड और पेस्टिसाइड समेत उत्पादन से जुड़ी लागत लगातार बढ़ी है। इसके अलावा इस साल कई क्षेत्रों में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का असर सेब की फसल पर भी पड़ा है। ऐसे में बागवानों की आय पर दबाव बढ़ा है और मौजूदा MIS दर उनके लिए पर्याप्त नहीं है।
राठौर ने कहा कि उन्होंने विधानसभा सत्र के दौरान भी इस मुद्दे को उठाया है। उनके मुताबिक करीब 13-14 विधायकों ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से व्यक्तिगत मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है, जिसमें MIS की खरीद दर बढ़ाने की मांग रखी गई है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से इस मांग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और बागवानी विभाग को इस संबंध में दस्तावेज तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
वर्ष 2015 में करीब ₹6.20 थी MIS दर
AICC प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में 12 रुपये प्रति किलो की MIS दर बागवानों के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में सेब की MIS खरीद दर करीब 6.20 रुपये प्रति किलो थी। इसके बाद उत्पादन लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने कहा कि सेब उत्पादन में सबसे महत्वपूर्ण खर्चों में शामिल मजदूरी की लागत बढ़ी है। इसके साथ ही खाद, उर्वरक, कीटनाशक और फफूंदनाशक दवाओं की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। दूसरी ओर, इस साल कई क्षेत्रों में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण सेब की फसल प्रभावित हुई है। इन परिस्थितियों ने बागवानों के सामने आर्थिक दबाव बढ़ाया है।
राठौर ने कहा कि ऐसे समय में MIS खरीद दर में उचित बढ़ोतरी की जरूरत है। उन्होंने सरकार से इसे 12 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपये प्रति किलो करने की मांग दोहराई। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अंतिम निर्णय सरकार को लेना है, लेकिन बागवानों की मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उचित बढ़ोतरी होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
राठौर ने बताया कि करीब 13-14 विधायकों ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से व्यक्तिगत मुलाकात कर MIS की दर बढ़ाने को लेकर ज्ञापन सौंपा है। उनके मुताबिक मुख्यमंत्री की ओर से इस मांग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने संबंधित बागवानी विभाग को दस्तावेज तैयार करने के निर्देश दिए हैं। राठौर ने उम्मीद जताई कि MIS के तहत लंबित भुगतान भी जल्द जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बागवानों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
राठौर ने दूध की खरीद दर और अन्य कृषि उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कृषि और बागवानी से जुड़े लोगों की लागत तथा आय के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
किशाऊ परियोजना पर भी राठौर ने रखी बात
कुलदीप सिंह राठौर ने किशाऊ परियोजना को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के वित्तीय हितों को देखते हुए परियोजना के पावर कंपोनेंट से जुड़ी करीब 2 हजार करोड़ रुपये की देनदारी अन्य लाभार्थी राज्यों द्वारा वहन किया जाना स्वागत योग्य है।
हालांकि, राठौर ने परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव और विस्थापन को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बड़े बांधों और टनलिंग के प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाना जरूरी है, ताकि परियोजना के कारण होने वाले संभावित प्रभावों का आकलन किया जा सके।
उन्होंने प्रभावित लोगों के पुनर्वास को प्राथमिकता देने की बात कही। राठौर के अनुसार परियोजना से जुड़े विकास कार्यों के साथ प्रभावित लोगों के हितों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
Revenue Deficit Grant को लेकर केंद्र से सहयोग की मांग
राठौर ने Revenue Deficit Grant (RDG) को लेकर भी केंद्र सरकार से हिमाचल प्रदेश को पर्याप्त वित्तीय सहयोग देने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के वित्तीय हितों और विकास से जुड़े दायित्वों को देखते हुए केंद्र से पर्याप्त सहयोग मिलना जरूरी है।
सेब की MIS दर बढ़ाने की मांग के साथ राठौर ने बागवानों की बढ़ती लागत, फसल पर मौसम के प्रभाव और लंबित भुगतान का मुद्दा उठाया है। वहीं किशाऊ परियोजना को लेकर उन्होंने वित्तीय पहलू के साथ पर्यावरण और विस्थापन से जुड़े विषयों पर भी वैज्ञानिक अध्ययन और प्रभावित लोगों के पुनर्वास को प्राथमिकता देने की बात कही है।
Akhil Mahajan