दंपती को 53 दिन डिजिटल कैद में रखा, 1.89 करोड़ रुपये ठगे,बैंक खाते देने वाला आरोपी गिरफ्तार
रेवाड़ी में रिटायर्ड कर्मचारी और पत्नी को 53 दिन डिजिटल अरेस्ट रखकर 1.89 करोड़ रुपये ठगे गए। पुलिस ने बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया।
➤ रेवाड़ी में दंपती को 53 दिन डिजिटल अरेस्ट रखकर 1.89 करोड़ रुपये ठगे
➤ साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाला आरोपी पवन सिंह उपरारी गिरफ्तार
➤ छह राज्यों से पहले पकड़े जा चुके हैं 14 आरोपी, अब तक 4.73 लाख रुपये बरामद
रेवाड़ी। साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर उनकी जिंदगी भर की कमाई लूटने का नया तरीका अपना लिया है। रेवाड़ी जिले के धारूहेड़ा सेक्टर-6 में रहने वाले एक रिटायर्ड कर्मचारी और उनकी पत्नी को साइबर ठगों ने 53 दिन तक डिजिटल कैद में रखकर 1 करोड़ 89 लाख 28 हजार रुपये ठग लिए। आरोपियों ने दंपती को मुंबई में एफआईआर दर्ज होने और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने का डर दिखाया। इतना ही नहीं, उन पर लगातार निगरानी रखने के लिए मोबाइल में एक एप भी डाउनलोड कराया गया। इसके जरिए उन्हें घर के एक कमरे तक सीमित कर दिया गया और किसी से संपर्क नहीं करने की हिदायत दी गई।
इस मामले में साइबर क्राइम थाना रेवाड़ी पुलिस ने अब एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के गांव खाती निवासी पवन सिंह उपरारी उर्फ रुद्रा के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। कोर्ट में पेश करने के बाद उसे चार दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है कि उसने किन लोगों के माध्यम से बैंक खातों की व्यवस्था कराई और इस पूरे साइबर ठगी नेटवर्क में उसकी क्या भूमिका थी।
ट्राई और सीबीआई अधिकारी बनकर किया फोन, मुंबई में केस दर्ज होने का डर दिखाया
धारूहेड़ा सेक्टर-6 निवासी रिटायर्ड कर्मचारी राजपाल सिंह ने 22 अप्रैल को पुलिस को शिकायत दी थी। उन्होंने बताया कि 27 और 28 फरवरी को उनके मोबाइल पर अनजान नंबरों से फोन आए थे। फोन करने वालों ने खुद को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) से जुड़ा बताया। उन्होंने राजपाल सिंह को कहा कि उनकी सिम बंद होने वाली है। साथ ही यह भी बताया कि उनकी आईडी पर गलत तरीके से सिम कार्ड खरीदे गए हैं।
शुरुआत में आरोपियों ने इसी बात को लेकर उन्हें डराया। इसके बाद ठगों ने कहानी को आगे बढ़ाते हुए कहा कि उनके खिलाफ मुंबई में एफआईआर दर्ज है और उनके मोबाइल नंबर से अश्लील फोटो और वीडियो भेजे गए हैं। इसी दौरान दूसरे नंबर से फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को सीबीआई इंस्पेक्टर बताया।
उसने राजपाल सिंह को कहा कि उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया है। आरोपियों ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद बताए गए बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराने का सिलसिला शुरू हो गया।
53 दिन तक घर के एक कमरे में कैद रहे पति-पत्नी, मोबाइल एप से होती रही निगरानी
आरोपियों ने राजपाल सिंह और उनकी पत्नी को निर्देश दिया कि वे घर से बाहर न निकलें और किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क न करें। ठगों ने इस तरह दंपती को मानसिक दबाव में रखा कि वे किसी से मदद मांगने की स्थिति में भी नहीं रहे।
आरोपियों के निर्देश पर राजपाल सिंह ने 3 मार्च से 20 अप्रैल तक अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1 करोड़ 89 लाख 28 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। इस दौरान ठगों ने उनके मोबाइल में एक एप भी डाउनलोड कराया था। इसी एप के माध्यम से उन पर निगरानी रखी जाती थी।
दंपती को लगातार यह एहसास कराया जाता रहा कि वे पुलिस और जांच एजेंसियों की निगरानी में हैं। आरोपियों के डर के कारण राजपाल सिंह और उनकी पत्नी घर के एक कमरे में ही रहने को मजबूर रहे। करीब 53 दिनों तक चले इस पूरे घटनाक्रम में उनकी जिंदगी ठगों के निर्देशों के अनुसार चलती रही।
ऑनलाइन पुलिसकर्मी, हथियार और जज दिखाकर संपत्ति बेचने का भी बनाया दबाव
ठगी के दौरान आरोपियों ने तकनीक का इस्तेमाल कर दंपती के सामने ऐसा माहौल तैयार किया, जिससे उन्हें लगे कि वास्तव में उनके खिलाफ जांच चल रही है। शिकायत के अनुसार, मोबाइल एप पर ऑनलाइन पुलिसकर्मी, हथियार, कोर्ट और जज दिखाए जाते थे। इस तरह आरोपियों ने डिजिटल माध्यम से फर्जी पुलिस और न्यायिक कार्रवाई का दृश्य तैयार कर रखा था।
इतना ही नहीं, फर्जी जज के माध्यम से राजपाल सिंह पर प्रॉपर्टी बेचने का दबाव भी बनाया गया। उन्हें संपत्ति की वेरिफिकेशन के नाम पर प्रॉपर्टी बेचने और उससे मिलने वाली राशि का 70 प्रतिशत सरकारी खजाने में जमा कराने के लिए कहा गया था।
आरोपियों की लगातार धमकियों और निगरानी के कारण राजपाल सिंह और उनकी पत्नी घर के एक कमरे में रहने को मजबूर रहे। ठगों ने जांच और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली।
अब तक 14 आरोपी गिरफ्तार, छह राज्यों तक फैले साइबर ठगी के तार
राजपाल सिंह की शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम थाना रेवाड़ी पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पुलिस ने इस मामले में अलग-अलग राज्यों से आरोपियों की गिरफ्तारी की। अब तक राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा से 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इनमें रौनक जाटव, पंकज सैनी, सुषमा, दिवान्शु, मानवेंद्र कौरव, मनविंद्र, रोहित और मनोज श्योकंद शामिल हैं। इनके अलावा पंकज, हरप्रीत, देवेंद्र सिंह बिष्ठ उर्फ दीपक, खुशीराम धाकड़ उर्फ राहुल, अमर शर्मा और आकाश गंगवार को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
अब पुलिस ने उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के गांव खाती निवासी पवन सिंह उपरारी उर्फ रुद्रा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, उसने साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। कोर्ट से चार दिन का पुलिस रिमांड मिलने के बाद उससे पूछताछ की जा रही है।
1.89 करोड़ की ठगी में अभी तक 4.73 लाख रुपये बरामद
इस पूरे मामले में आरोपियों ने दंपती से कुल 1 करोड़ 89 लाख 28 हजार रुपये की ठगी की थी। पुलिस अब तक ठगी की रकम में से 4.73 लाख रुपये बरामद कर चुकी है। मामले में अलग-अलग राज्यों से आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब बैंक खातों की व्यवस्था करने वाले लोगों और ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है।
पवन सिंह उपरारी की गिरफ्तारी को इसी जांच की एक और कड़ी माना जा रहा है। पुलिस उससे यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने में उसके साथ कौन-कौन लोग जुड़े थे और ठगी की रकम किन खातों में ट्रांसफर कराई गई थी।
Akhil Mahajan