हरियाणा के सबसे युवा वाइस चेयरमैन,निखिल मांढैया ने 5 वोट से दर्ज की जीत
रेवाड़ी नगर परिषद के वाइस चेयरमैन चुनाव में निखिल मांढैया ने चेतराम सैनी को 5 वोट से हराया। 26 वर्षीय निखिल सबसे युवा उप प्रधान बने।
26 वर्षीय निखिल मांढैया बने रेवाड़ी नगर परिषद के सबसे युवा वाइस चेयरमैन, चेतराम सैनी को 5 वोट से हराया
➤ निखिल को मिले 19 वोट, जबकि विरोधी खेमे के चेतराम सैनी को 14 वोट मिले; चुनाव में राव इंद्रजीत सिंह का प्रभाव दिखा
➤ 21 पार्षदों के समर्थन की चर्चा के बावजूद निखिल को मिले 19 वोट, क्रॉस वोटिंग और भीतरघात को लेकर उठे सवाल
रेवाड़ी नगर परिषद के वाइस चेयरमैन चुनाव में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की पसंद निखिल मांढैया के नाम पर मुहर लग गई। वार्ड-12 के पार्षद और भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष निखिल मांढैया ने विरोधी खेमे के प्रत्याशी चेतराम सैनी को 5 वोट से हराकर उप प्रधान की कुर्सी हासिल कर ली। निखिल को कुल 19 वोट मिले, जबकि चेतराम सैनी के पक्ष में 14 पार्षदों ने मतदान किया। इस जीत के साथ 26 वर्षीय निखिल रेवाड़ी नगर परिषद के सबसे युवा वाइस चेयरमैन बन गए हैं।
चुनाव परिणाम ने एक बार फिर नगर परिषद की राजनीति में राव इंद्रजीत सिंह के प्रभाव को सामने ला दिया। हालांकि, चेतराम सैनी को 14 वोट मिलने से यह भी स्पष्ट हुआ कि परिषद में विरोधी खेमे की मौजूदगी मजबूत है। चुनाव से पहले निखिल के समर्थन में 21 पार्षद होने की चर्चा थी, लेकिन उन्हें 19 वोट ही मिले। ऐसे में दो वोट कम मिलने को लेकर राजनीतिक हलकों में क्रॉस वोटिंग और भीतरघात की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, मतदान के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि किस पार्षद ने किस प्रत्याशी के पक्ष में वोट दिया।
रायशुमारी से मतदान तक राव इंद्रजीत की पसंद पर टिकी रहीं निगाहें
रेवाड़ी नगर परिषद का वाइस चेयरमैन चुनाव राव इंद्रजीत सिंह और उनके विरोधी खेमे के बीच प्रतिष्ठा का सवाल बन गया था। चुनाव से पहले दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थन को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे थे। पार्षदों को एकजुट रखने के लिए बैठकों और रणनीतिक प्रयासों का दौर भी चला।
2 अक्टूबर को राव इंद्रजीत सिंह ने रामपुरा हाउस में पार्षदों से अलग-अलग मुलाकात कर रायशुमारी की थी। बताया जा रहा है कि इस दौरान कई पार्षदों ने उप प्रधान के पद पर किसी युवा चेहरे को मौका देने का सुझाव दिया था। इसके बाद निखिल मांढैया के नाम पर सहमति बनी।
हालांकि, चेतराम सैनी ने भी चुनाव मैदान में उतरकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया। उनके सामने आने से चुनाव सर्वसम्मति के बजाय सीधे मुकाबले में बदल गया। दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थकों को साथ रखने में जुटे रहे। राव समर्थक खेमे की ओर से पार्षदों को बाहर भ्रमण पर ले जाने की भी चर्चा रही।
मतदान के दिन दोनों प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ नगर परिषद पहुंचे। सर्वसम्मति नहीं बनने के कारण मतदान कराया गया। मतगणना में निखिल मांढैया को 19 और चेतराम सैनी को 14 वोट मिले। इस तरह निखिल ने 5 वोट के अंतर से जीत दर्ज कर उप प्रधान का पद हासिल कर लिया।
21 वोटों के समर्थन की चर्चा, फिर भी मिले 19 वोट
चुनाव परिणाम के बाद सबसे अधिक चर्चा निखिल मांढैया को मिले वोटों की संख्या को लेकर हो रही है। नगर परिषद में भाजपा की टिकट पर 12 पार्षद चुनाव जीते थे, जबकि बाद में 16 अन्य पार्षद भाजपा में शामिल हुए। इस तरह पार्टी से जुड़े पार्षदों की संख्या 28 बताई जाती रही है।
वाइस चेयरमैन चुनाव से पहले निखिल के समर्थन में 21 पार्षद होने की चर्चा थी। माना जा रहा था कि उन्हें इतने पार्षदों का समर्थन मिल सकता है, लेकिन परिणाम में उनके खाते में 19 वोट आए। समर्थन के दावे और वास्तविक मतदान के बीच दो वोट का अंतर सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं।
हालांकि, सिर्फ चुनाव परिणाम के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दो पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की या किसी स्तर पर भीतरघात हुआ। मतदान की गोपनीयता के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि किसने किस प्रत्याशी को वोट दिया। दूसरी ओर, चेतराम सैनी को मिले 14 वोट भी राजनीतिक रूप से अहम माने जा रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि निखिल की जीत के बावजूद नगर परिषद में विरोधी खेमे का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
जीत के बाद निखिल ने शहर की समस्याएं दूर करने का किया वादा
वाइस चेयरमैन चुने जाने के बाद निखिल मांढैया ने केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, नगर परिषद चेयरपर्सन विनीता पिप्पल और सभी पार्षदों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी उनके लिए शहर के लोगों की सेवा करने का अवसर है।
निखिल ने शहर की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि सफाई व्यवस्था, अवैध निर्माण, बेसहारा पशुओं और अतिक्रमण जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए प्रयास किए जाएंगे। नगर परिषद के सभी पार्षदों के साथ मिलकर शहर के विकास के लिए काम किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के बाद किसी से कोई गिला-शिकवा नहीं है। सभी पार्षदों को साथ लेकर काम किया जाएगा, ताकि शहर के विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके। अब निखिल के सामने चुनाव के दौरान मिले समर्थन को विकास कार्यों और आमजन की समस्याओं के समाधान में बदलने की चुनौती होगी।
1995 से अब तक कई नेता संभाल चुके हैं उप प्रधान की जिम्मेदारी
रेवाड़ी नगर परिषद के गठन के बाद से अब तक कई नेता वाइस चेयरमैन यानी उप प्रधान की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वर्ष 1995 में नगर परिषद के गठन के बाद पवन शर्मा, परसराम, हनुमान छावड़ी, संजय मलिक, पवन बटला और श्याम सुंदर चुघ सहित कई नेता इस पद पर रह चुके हैं।
अब 26 वर्षीय निखिल मांढैया के इस पद पर पहुंचने के साथ नगर परिषद को सबसे युवा वाइस चेयरमैन मिला है। उनकी जीत को राव इंद्रजीत सिंह के राजनीतिक प्रभाव के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। वहीं, चेतराम सैनी को मिले 14 वोटों ने परिषद के भीतर मौजूद राजनीतिक समीकरणों को भी चर्चा में ला दिया है।
निखिल के सामने अब शहर की सफाई, अतिक्रमण, अवैध निर्माण और बेसहारा पशुओं जैसी समस्याओं पर काम करने के साथ सभी पार्षदों को साथ लेकर चलने की जिम्मेदारी होगी। चुनाव में जीत के बाद उनकी कार्यशैली और विकास को लेकर किए गए वादों पर शहरवासियों की निगाहें रहेंगी।
Akhil Mahajan