‘वोट चोरी’ के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं के समर्थन में उतरे राकेश टिकैत, किसान मोर्चा भी होगा शामिल, जानें किस दिन भरेंगे हुंकार
राकेश टिकैत ने ‘वोट चोरी’ के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं को किसान मोर्चे का समर्थन देने की बात कही। 23 अक्टूबर और 26 नवंबर के कार्यक्रमों की जानकारी दी।
➤ राकेश टिकैत ने प्रदर्शन कर रहे युवाओं को किसान मोर्चे का समर्थन देने का ऐलान किया
➤ 23 अक्टूबर को जिला और तहसील स्तर पर ज्ञापन, 26 नवंबर को दिल्ली-NCR में प्रदर्शन की तैयारी
➤ धान खरीद, MSP गारंटी कानून और जमीन अधिग्रहण के मुद्दों पर भी सरकार को घेरा
हरियाणा पहुंचे किसान नेता राकेश टिकैत ने ‘वोट चोरी’ के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं के समर्थन में उतरने का ऐलान किया है। टिकैत ने कहा कि प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शनकारियों, लड़कियों और पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान मोर्चा प्रदर्शन कर रहे युवाओं को पूरा समर्थन देगा और संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ युवा कार्यकर्ता भी उनके समर्थन में शामिल होंगे। टिकैत ने अपने बयान में प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर नाराजगी जताई और कहा कि बच्चों पर अत्याचार नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा ने 23 अक्टूबर को जिला और तहसील स्तर पर ज्ञापन देने तथा बैठकें करने का कार्यक्रम तय किया है। इसके अलावा 26 नवंबर को दिल्ली-NCR में प्रदर्शन की योजना है। टिकैत ने किसानों की समस्याओं पर भी बात की और धान खरीद, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी तथा जमीन अधिग्रहण जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा और मौजूदा नीतियों से खेती पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, युवाओं के प्रदर्शन के आयोजन, उसकी मांगों और संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
प्रदर्शन कर रहे युवाओं को किसान मोर्चे का समर्थन
राकेश टिकैत ने कहा कि लोकतंत्र में प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग प्रदर्शन कर रहे युवाओं, लड़कियों और पत्रकारों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार कर रहे हैं। टिकैत ने कहा कि किसान मोर्चा ऐसे प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा रहेगा।
उन्होंने बताया कि संगठन के वरिष्ठ नेताओं को प्रदर्शन स्थल पर जाने के लिए कहा गया है और युवा कार्यकर्ता भी समर्थन देने पहुंचेंगे। टिकैत ने चेतावनी दी कि प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसा या दबाव बनाने की कोशिशों का विरोध किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन कर रहे बच्चों को किसान मोर्चे का पूरा समर्थन है। हालांकि, कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच या स्वतंत्र जानकारी से होनी बाकी है।
23 अक्टूबर और 26 नवंबर को प्रस्तावित कार्यक्रम
टिकैत के मुताबिक, संयुक्त किसान मोर्चा ने विभिन्न मुद्दों को लेकर दो महत्वपूर्ण तारीखों पर कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है। 23 अक्टूबर को जिला और तहसील स्तर पर ज्ञापन सौंपे जाएंगे तथा बैठकें की जाएंगी। इसके बाद 26 नवंबर को दिल्ली-NCR में प्रदर्शन की योजना है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के NCR क्षेत्र में आंदोलन से जुड़े कार्यक्रम किए जाएंगे। अन्य क्षेत्रों में भी स्थानीय समस्याओं के अनुसार कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही गई।
टिकैत ने कहा कि किसानों की समस्याओं और प्रदर्शनकारियों के मुद्दों को लेकर संगठन अलग-अलग स्तरों पर अपनी आवाज उठाएगा। इन कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा और भागीदारी से संबंधित अतिरिक्त जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
धान खरीद और MSP गारंटी कानून पर सरकार को घेरा
राकेश टिकैत ने हरियाणा में धान खरीद की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को फसल बेचने में परेशानी हो रही है और सरकारी दावों के बावजूद खरीद की जमीनी स्थिति संतोषजनक नहीं है।
टिकैत ने दावा किया कि दूसरे राज्यों से धान हरियाणा की मंडियों में लाया जा रहा है और कुछ मामलों में नियमों को दरकिनार कर खरीद की जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय किसानों को नुकसान हो सकता है। ये आरोप टिकैत के बयान पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
उन्होंने MSP की कानूनी गारंटी की मांग दोहराते हुए कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए। टिकैत ने चेतावनी दी कि यदि खरीद व्यवस्था और फसल के दाम से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो बड़े किसान आंदोलन की जरूरत पड़ सकती है।
जमीन अधिग्रहण और मुआवजे का मुद्दा भी उठाया
टिकैत ने सड़क निर्माण और उद्योगों के लिए जमीन अधिग्रहण के मामलों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई जगह किसान अपनी जमीन जाने और मुआवजे की प्रक्रिया को लेकर परेशान हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में जमीन से प्रभावित किसान को उचित मुआवजा नहीं मिल पाता और मुआवजे के वितरण की प्रक्रिया में असमानता रहती है। टिकैत के मुताबिक, ऐसी परिस्थितियां किसानों के बीच मतभेद बढ़ा सकती हैं।
उन्होंने बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों में भूमि अधिग्रहण और औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़े आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि किसान संगठनों को इन मुद्दों पर एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।
हरियाणा में खेती और फसल के दाम पर चिंता
किसान नेता ने कहा कि हरियाणा में धान और बाजरे की खरीद को लेकर किसानों में असंतोष है। उन्होंने खेती की बढ़ती लागत, फसलों के उचित दाम और खरीद की शर्तों को किसानों की प्रमुख समस्याओं में शामिल बताया।
टिकैत ने कहा कि हरियाणा में खेती का दायरा धीरे-धीरे धान और गेहूं जैसी सीमित फसलों तक सिमटता जा रहा है। उन्होंने गन्ना उद्योग की क्षमता बढ़ाने और किसानों को फसल विविधीकरण के अवसर देने की जरूरत भी बताई।
उनका कहना था कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए ऐसी नीतियां जरूरी हैं, जिनसे किसानों को उचित दाम मिलें और युवाओं को खेती छोड़कर शहरों की ओर जाने के लिए मजबूर न होना पड़े।
बड़े किसान आंदोलन की जरूरत बताई
राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों की समस्याओं, MSP, धान खरीद और जमीन अधिग्रहण जैसे मुद्दों पर व्यापक आंदोलन की जरूरत है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में किसानों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
टिकैत ने कहा कि किसान संगठनों को अलग-अलग राज्यों में चल रहे आंदोलनों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। फिलहाल, 23 अक्टूबर और 26 नवंबर के प्रस्तावित कार्यक्रमों के जरिए युवाओं और किसानों से जुड़े मुद्दे उठाने की योजना बताई गई है।
Akhil Mahajan