CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 27 अक्टूबर को सुनवाई, राहुल गांधी समेत 11 नेता याचिकाकर्ता
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। SIR प्रक्रिया, चुनावी अनियमितताओं और फॉर्म-6 पर अदालत के स्पष्टीकरण पर नजर रहेगी।
➤ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दाखिल याचिकाओं को मंजूरी, एक साथ होगी सुनवाई
➤ SIR प्रक्रिया और चुनावी अनियमितताओं को लेकर उठाए गए सवाल, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी प्रतिवादी
➤ राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, फॉर्म-6 पर अदालत ने कोई फैसला नहीं दिया
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक, इन याचिकाओं को एक साथ सुनने का फैसला किया गया है और सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर 2026 की तारीख तय बताई गई है। याचिकाओं में चुनावी प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग के फैसले लेने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। इस मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को भी प्रतिवादी बनाया गया है। विपक्षी नेताओं की ओर से भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े मुद्दों को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया है।
11 याचिकाकर्ताओं में कई प्रमुख विपक्षी नेता शामिल
इस मामले से जुड़ी याचिकाओं में कुल 11 याचिकाकर्ताओं के शामिल होने की जानकारी दी गई है। इनमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत, एनसीपी की नेता सुप्रिया सुले, डी. राजा, एम. ए. बेबी, महुआ माझी और ई. टी. मोहम्मद बशीर के नाम शामिल हैं।
याचिकाओं में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों की न्यायिक समीक्षा की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाए गए सवालों पर अदालत में सुनवाई के दौरान पक्षों की दलीलें सामने आएंगी। हालांकि, याचिका दाखिल होने या सुनवाई के लिए स्वीकार किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने उसमें लगाए गए आरोपों को सही ठहरा दिया है।
फॉर्म-6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या स्पष्ट किया
खबर में दी गई जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 से संबंधित किसी तरह का फैसला दिए जाने की बात से इनकार किया है। फॉर्म-6 का संबंध मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के आवेदन से है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बिहार में फॉर्म-6 से जुड़ा ऐसा कोई मुद्दा नहीं था, जिस पर इस मामले में मंजूरी दिए जाने की बात कही जा सके।
इस स्पष्टीकरण के बाद फॉर्म-6 को लेकर किसी निर्णय या राहत का दावा करना उचित नहीं होगा। संबंधित याचिकाओं में उठाए गए अन्य मुद्दों पर अदालत का रुख सुनवाई और उसके बाद आने वाले आदेशों से स्पष्ट होगा।
राहुल गांधी की ओर से भी दाखिल की गई याचिका
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। याचिका को डायरी नंबर दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है। इससे पहले राहुल गांधी की कानूनी टीम सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री पहुंची थी।
राहुल गांधी और विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्ष की मांग है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों से जुड़े मुद्दों की न्यायिक जांच हो। इन आरोपों और मांगों पर अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई तथा उसके आदेशों के आधार पर ही तय होगा।
CJI से मुलाकात की जगह याचिका दाखिल करने की सलाह
इससे पहले राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत से मुलाकात के लिए समय मांगा था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश ने संबंधित मुद्दों पर मुलाकात करने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल करने का रास्ता अपनाने की बात कही थी।
इस दौरान शक्तियों के संवैधानिक बंटवारे का भी उल्लेख किया गया। अदालत की ओर से मामले को न्यायिक प्रक्रिया के तहत उठाने का विकल्प सामने रखा गया, जिसके बाद विपक्षी नेताओं ने याचिका दाखिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया।
इंडिया गठबंधन के नेताओं ने निकाला मार्च
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर इंडिया गठबंधन के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। इस दौरान राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्ष के कई नेताओं ने अपनी मांगें रखीं। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है।
विपक्ष की ओर से उठाए गए इन मुद्दों पर अब न्यायिक प्रक्रिया के जरिए आगे की कार्रवाई होने की उम्मीद है। याचिकाओं में लगाए गए आरोपों पर अदालत का अंतिम रुख सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
Akhil Mahajan