सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान राहुल-प्रियंका गांधी को पुलिस ने रोका, चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ा INDIA गठबंधन

INDIA गठबंधन के मार्च में राहुल और प्रियंका गांधी को दिल्ली में पुलिस ने रोका। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई।

सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान राहुल-प्रियंका गांधी को पुलिस ने रोका, चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ा INDIA गठबंधन

➤ SIR में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

➤ 10 राजनीतिक दलों के 11 नेता याचिकाकर्ता, राहुल गांधी और अखिलेश यादव भी शामिल

➤ CJI से मुलाकात नहीं होने के बाद विपक्ष ने बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट तक निकाला मार्च


नई दिल्ली। चुनावी प्रक्रिया में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्षी दलों ने अपनी लड़ाई राजनीतिक विरोध से आगे बढ़ाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सोमवार को कांग्रेस और विपक्षी दलों से जुड़े नेताओं ने इस मामले में याचिका दाखिल की, जिसमें राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव समेत 10 राजनीतिक दलों के 11 नेता याचिकाकर्ता बताए गए हैं। याचिका में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पक्षकार बनाया गया है। इससे पहले विपक्षी नेताओं ने दिल्ली के बाराखंबा इलाके से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। इस दौरान नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए और अपनी मांगों को अदालत तक पहुंचाने की कोशिश की। विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब और अदालत की आगे की कार्रवाई इस मामले में अहम होगी।

विपक्ष का प्रदर्शन बाराखंभा रोड से निकाला गया था। जिसमें हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए।

बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष का मार्च

याचिका दाखिल करने से पहले विपक्षी नेताओं ने बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकाला। रिपोर्ट के अनुसार, करीब एक किलोमीटर लंबे इस मार्च में कुछ नेता बस में, कुछ पैदल और कुछ वाहनों में सवार होकर आगे बढ़े। मार्च में राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेता शामिल हुए।

मार्च के दौरान पुलिस ने भगवान दास रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर नेताओं को आगे बढ़ने से रोक दिया था। इस घटनाक्रम के बाद प्रदर्शन और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। विपक्षी नेताओं ने अपनी मांगों को सार्वजनिक रूप से उठाया और कानूनी रास्ता अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाया।

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा

मार्च से पहले राहुल गांधी ने करीब 40 मिनट तक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने विपक्ष के मार्च की तुलना शिवजी की बारात से करते हुए कहा कि इसमें कोई भी शामिल हो सकता है। उनके इस बयान को मार्च में विभिन्न विपक्षी दलों और समर्थकों की भागीदारी के संदर्भ में देखा गया।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। हालांकि, SIR में कथित गड़बड़ियों के आरोपों की वास्तविक स्थिति का निर्धारण संबंधित दस्तावेजों, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

CJI को पत्र लिखकर मांगा था मिलने का समय

रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को विपक्षी सांसदों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने अपनी मांगों और शिकायतों के संबंध में ज्ञापन सौंपने के लिए समय मांगा था। बताया गया है कि CJI ने मुलाकात से इनकार करते हुए उन्हें याचिका दाखिल करने का रास्ता अपनाने को कहा।

इसके बाद विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि विपक्ष अब SIR से जुड़े अपने आरोपों को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उठाना चाहता है।

चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार को बनाया पक्षकार

दाखिल याचिका में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पक्षकार बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। विपक्ष की ओर से SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, याचिका में लगाए गए प्रत्येक आरोप, मांगी गई राहत और अदालत की ओर से होने वाली आगे की कार्रवाई का विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।

इस मामले में आगे की स्थिति सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई और अदालत के निर्देशों पर निर्भर करेगी। फिलहाल, विपक्ष के मार्च और याचिका दाखिल करने से SIR को लेकर राजनीतिक तथा कानूनी बहस और तेज हो गई है। 

प्रियंका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट की ओर पैदल मार्च में हिस्सा लिया। उनके साथ AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा भी रहीं।

➤ चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA गठबंधन का मार्च, भगवान दास रोड पर राहुल-प्रियंका को रोका

➤ ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, देवेंद्र यादव ने आंदोलन जारी रखने की बात कही

➤ अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, अखिलेश यादव ने चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल


नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित चुनावी अनियमितताओं और वोट चोरी के आरोपों को लेकर INDIA गठबंधन के नेताओं ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। इस प्रदर्शन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और अन्य विपक्षी नेता शामिल हुए। मार्च के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को दिल्ली के भगवान दास रोड पर पुलिस ने रोक दिया। वहां बैरिकेडिंग की गई थी और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही तय करने और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वहीं, भाजपा ने विपक्ष के प्रदर्शन और राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

भगवान दास रोड पर रोका गया मार्च

रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्षी नेताओं का मार्च बाराखंभा इलाके से सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ रहा था। राहुल गांधी बस से उतरकर पैदल आगे बढ़े। उनके साथ प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य नेता भी मौजूद थे। मार्च में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा समेत कई विपक्षी नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।

जब नेता भगवान दास रोड पहुंचे, तो दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। रिपोर्ट में अर्धसैनिक बलों और उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया गया है। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे और नेताओं के समर्थन में नारेबाजी की गई।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले पांच दिनों में विपक्षी नेताओं को जंतर-मंतर, चुनाव आयोग और राजघाट जाने से रोका गया। उन्होंने विपक्षी नेताओं के साथ कथित अनुचित व्यवहार और गिरफ्तारियों का भी जिक्र किया।

देवेंद्र यादव के अनुसार, प्रदर्शन का उद्देश्य चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही की मांग उठाना है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि और संबंधित पक्षों के विस्तृत जवाब के संबंध में उपलब्ध रिपोर्ट में पूरी जानकारी नहीं दी गई है।

अखिलेश यादव ने भाजपा और चुनाव आयोग पर लगाए आरोप

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रदर्शन के दौरान भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के माध्यम से वोट चोरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष होगी, तो लोकतंत्र मजबूत होगा। अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में धरना-प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है और किसी स्थान पर प्रदर्शन करने से रोकना इस अधिकार को खत्म करने जैसा नहीं होना चाहिए।

जंतर-मंतर को लेकर उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों को वहां धरना देने की अनुमति नहीं मिलती, तो वे किसी अन्य स्थान पर भी अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं। उनके बयान के बाद प्रदर्शन के राजनीतिक और लोकतांत्रिक पहलुओं पर चर्चा तेज हो गई।

अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर किया पलटवार

भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने विपक्ष के मार्च की आलोचना की। उन्होंने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे संवैधानिक संस्थाओं की छवि कमजोर करने और देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। ठाकुर ने कहा कि अदालतों को राजनीति का रणक्षेत्र नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक शैली पर भी सवाल उठाए।

अनुराग ठाकुर के बयान से स्पष्ट हुआ कि इस मुद्दे पर भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज है। जहां विपक्ष चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहा है, वहीं भाजपा ने विपक्ष के आरोपों और प्रदर्शन की रणनीति की आलोचना की है। दोनों पक्षों के बयान राजनीतिक विवाद के अलग-अलग दृष्टिकोण सामने रखते हैं।

राहुल गांधी की कानूनी टीम सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री पहुंची

प्रदर्शन के बीच राहुल गांधी की कानूनी टीम सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री पहुंची। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, टीम चुनाव आयोग से जुड़ी कथित अनियमितताओं और दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के मुद्दों पर व्यक्तिगत रूप से रिट याचिका दायर करने के लिए समय बढ़ाने की मांग कर रही थी।

इस घटनाक्रम ने प्रदर्शन को राजनीतिक विरोध के साथ कानूनी प्रक्रिया से भी जोड़ दिया। हालांकि, याचिका की स्थिति, उसके दायर होने या अदालत की ओर से किसी आदेश की जानकारी उपलब्ध सामग्री में नहीं दी गई है।

विपक्ष और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज

12 अक्टूबर के मार्च के दौरान विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग दोहराई। कांग्रेस नेता देवेंद्र यादव ने आंदोलन जारी रखने की बात कही, जबकि अखिलेश यादव ने विरोध-प्रदर्शन के अधिकार पर जोर दिया। दूसरी ओर, अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी और विपक्ष की रणनीति की आलोचना की।

इस मामले में आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि विपक्ष अपनी कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई को किस दिशा में ले जाता है तथा संबंधित संस्थाओं की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल, चुनाव आयोग से जुड़े आरोप और उन पर राजनीतिक दलों के बयान विवाद के केंद्र में हैं।