बेटी के जन्म के कुछ घंटे बाद महिला की मौ*त, पति ने मांगा इंसाफ
रेवाड़ी में बेटी के जन्म के कुछ घंटे बाद पूनम की मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि अस्पताल ने साइलेंट अटैक की बात कही।
बेटी को जन्म देने के कुछ घंटे बाद पूनम की मौत, परिवार ने अस्पताल पर लगाए लापरवाही के आरोप
➤ डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग नहीं रुकने पर दोबारा ऑपरेशन, डॉक्टर ने साइलेंट अटैक को बताया मौत की वजह
➤ पति नरेंद्र यादव ने मुआवजे के बजाय इंसाफ मांगा, मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
रेवाड़ी: हरियाणा के रेवाड़ी में सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक महिला की मौत का मामला सामने आया है। मोहल्ला संघी का बास निवासी पूनम ने रविवार सुबह करीब 9 बजे महाराजा अस्पताल में बेटी को जन्म दिया था। परिजनों के अनुसार, डिलीवरी के कुछ घंटे बाद उसे ब्लीडिंग होने लगी। दवाइयों से रक्तस्राव नहीं रुकने पर दोबारा ऑपरेशन किया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। महिला की मौत के बाद परिवार ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही बरतने और उसकी गंभीर हालत की जानकारी समय पर नहीं देने के आरोप लगाए हैं। वहीं, अस्पताल की डॉक्टर दीप्ति तनेजा ने लापरवाही से इनकार करते हुए बताया कि पूनम का लगातार उपचार किया गया था। अस्पताल प्रबंधन ने मौत का कारण साइलेंट अटैक बताया है। पति नरेंद्र यादव ने कहा कि उन्हें मुआवजा नहीं, बल्कि इंसाफ चाहिए। परिजनों ने ऑपरेशन की प्रक्रिया, ब्लीडिंग नहीं रुकने और मौत के कारणों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
सुबह 9 बजे बेटी को दिया जन्म, कुछ घंटे बाद बिगड़ने लगी हालत
पूनम की छोटी बहन काजल ने बताया कि पूनम की डिलीवरी रविवार सुबह करीब 9 बजे हुई थी। शुरुआत में परिवार को बताया गया कि मां और बच्ची दोनों स्वस्थ हैं। काजल के अनुसार, दोपहर करीब 3 बजे तक भी परिवार को पूनम की हालत ठीक होने की जानकारी दी जा रही थी।
इसके बाद अस्पताल की ओर से बताया गया कि पूनम की ब्लीडिंग नहीं रुक रही है और उसे दोबारा ऑपरेशन की जरूरत है। परिजनों का आरोप है कि वे लगातार अस्पताल के स्टाफ से पूनम की तबीयत के बारे में पूछते रहे, लेकिन उन्हें स्पष्ट रूप से उसकी गंभीर हालत की जानकारी नहीं दी गई।
काजल के मुताबिक, ऑपरेशन के बाद पूनम को ऑक्सीजन लगाकर नीचे लाया गया। परिवार को उम्मीद थी कि उसका उपचार चल रहा है और हालत सुधर जाएगी। हालांकि, शाम करीब 6 बजे उसे नीचे लाया गया और करीब 8 बजे परिजनों को उसकी मौत की सूचना दी गई।
महिला की मौत के बाद अस्पताल के बाहर परिजनों की भीड़ जमा हो गई। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। इस घटना ने अस्पताल में इलाज के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया और मरीज की स्थिति के बारे में परिजनों को दी गई जानकारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पति नरेंद्र यादव बोले- मुआवजा नहीं, मुझे इंसाफ चाहिए
पूनम के पति नरेंद्र यादव ने पत्नी की मौत पर दुख जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने समय रहते पूनम की गंभीर हालत के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी। अगर उन्हें स्थिति की गंभीरता का पता चल जाता तो वे उसे किसी दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कराने का प्रयास कर सकते थे।
नरेंद्र यादव ने कहा कि उन्हें किसी तरह का मुआवजा नहीं चाहिए, बल्कि अपनी पत्नी की मौत के मामले में इंसाफ चाहिए। उन्होंने डॉक्टर दीप्ति तनेजा के खिलाफ कार्रवाई करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।
परिजनों ने यह भी मांग की है कि डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग शुरू होने से लेकर दोबारा ऑपरेशन करने तक की पूरी प्रक्रिया की जांच हो। परिवार जानना चाहता है कि रक्तस्राव क्यों नहीं रुका और पूनम की हालत गंभीर होने के बाद इलाज के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए।
परिवार का आरोप- बार-बार पूछने पर भी हालत गंभीर होने की जानकारी नहीं दी
पूनम के परिजनों का कहना है कि वे अस्पताल में लगातार उसकी तबीयत के बारे में जानकारी लेते रहे। उन्हें बार-बार सब ठीक होने की बात बताई गई, लेकिन बाद में ब्लीडिंग नहीं रुकने और दोबारा ऑपरेशन की जरूरत की जानकारी दी गई।
परिवार के मुताबिक, पूनम की हालत बिगड़ने के बाद उसे ऑक्सीजन लगाकर नीचे लाया गया। इसके बावजूद उन्हें समय रहते स्थिति की गंभीरता स्पष्ट नहीं बताई गई। परिजनों का दावा है कि अगर उन्हें पहले जानकारी मिल जाती तो वे दूसरे अस्पताल में इलाज कराने की कोशिश कर सकते थे।
परिवार ने अस्पताल में उपचार के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया, रक्तस्राव को रोकने के लिए किए गए प्रयासों और महिला की मौत के वास्तविक कारणों की जांच कराने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि इलाज के दौरान क्या हुआ और किन परिस्थितियों में पूनम की जान गई।
डॉक्टर दीप्ति तनेजा बोलीं- पहले ऑपरेशन के दौरान नहीं हुई कोई परेशानी
महाराजा अस्पताल की डॉक्टर दीप्ति तनेजा ने इलाज में लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि पूनम पिछले 9 महीने से उनके यहां इलाज करा रही थी। उसका पहला बच्चा भी ऑपरेशन से हुआ था, इसलिए इस बार भी सिजेरियन डिलीवरी की गई।
डॉक्टर के अनुसार, पूनम सुबह करीब 8:30 बजे अस्पताल पहुंची थी और करीब 9 बजे उसका ऑपरेशन किया गया। उन्होंने दावा किया कि ऑपरेशन के दौरान कोई परेशानी नहीं हुई और मां-बच्ची दोनों स्वस्थ थीं। नवजात बच्ची का वजन करीब 3 किलो 700 ग्राम था।
डॉक्टर ने बताया कि डिलीवरी के बाद पूनम को प्राइवेट कमरे में शिफ्ट किया गया था, जहां उसकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही थी। सुबह करीब 11:30 बजे उसने घबराहट होने की शिकायत की। जांच करने पर ब्लीडिंग दिखाई दी, जिसके बाद उसे रोकने के लिए दवाइयां दी गईं।
डॉक्टर के मुताबिक, दवाइयां देने के बाद कुछ समय तक पूनम की हालत ठीक रही। हालांकि, दोपहर करीब 2:30 बजे उसने फिर से घबराहट होने की शिकायत की। इसके बाद डॉक्टर ने उसकी दोबारा जांच की और करीब 3:30 बजे उसे ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया।
दवाइयों से नहीं रुकी ब्लीडिंग, सर्जन को बुलाकर दोबारा की गई प्रक्रिया
डॉक्टर दीप्ति तनेजा ने बताया कि दोबारा जांच के दौरान भी पूनम की ब्लीडिंग जारी थी। दवाइयों से रक्तस्राव नहीं रुकने पर परिजनों की सहमति से सर्जन को बुलाया गया। इसके बाद बच्चेदानी के अंदर पैकिंग करने और उसे खून पहुंचाने वाली नसों को बांधने की प्रक्रिया की गई।
डॉक्टर के अनुसार, दोबारा ऑपरेशन से पहले पूनम को दो यूनिट रक्त और एफएफपी दिए गए थे। ऑपरेशन के दौरान उसका हीमोग्लोबिन करीब 6.5 से 7 ग्राम बताया गया।
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद पूनम की पल्स और ब्लड प्रेशर सामान्य हो गए थे। हालांकि, अगले 24 घंटे को महत्वपूर्ण बताया गया था। शाम करीब 6 बजे उसे आईसीयू में शिफ्ट किया गया।
अस्पताल प्रबंधन ने इलाज में लापरवाही के आरोपों को खारिज करते हुए मौत का कारण साइलेंट अटैक बताया है। वहीं, परिजन इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
मौत के कारणों पर अलग-अलग दावे, निष्पक्ष जांच से सामने आएगी सच्चाई
पूनम की मौत के मामले में परिवार और अस्पताल प्रबंधन के दावे अलग-अलग हैं। परिजनों का आरोप है कि गंभीर हालत की जानकारी समय पर नहीं दी गई और इलाज में लापरवाही हुई। दूसरी ओर, डॉक्टर ने बताया कि ब्लीडिंग रोकने के लिए दवाइयां दी गईं, दोबारा ऑपरेशन किया गया और जरूरत के अनुसार उपचार किया गया।
अस्पताल प्रबंधन ने मौत का कारण साइलेंट अटैक बताया है, जबकि परिवार डिलीवरी के बाद शुरू हुई ब्लीडिंग और उसके बाद किए गए उपचार की पूरी जांच चाहता है।
ऐसे में पूनम की मौत की परिस्थितियों, इलाज के दौरान उठाए गए कदमों और मौत के कारणों को लेकर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है। फिलहाल, परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।
Akhil Mahajan