दामाद और पांचों बेटियों ने किया आने से इंकार, वीडियो कॉल पर देखा अंतिम संस्कार, पानीपत में पिता की मौत
पानीपत में 65 वर्षीय सुशील कुमार सिंह के निधन पर परिवार अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचा। जनसेवा दल ने विधि-विधान से अंतिम संस्कार कराया, बेटियों ने वीडियो कॉल पर अंतिम दर्शन किए।
➤ 65 वर्षीय सुशील कुमार सिंह का निधन, परिवार ने दूरी और असमर्थता का हवाला देकर पानीपत आने से किया इनकार
➤ जनसेवा दल ने निभाई अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी, बेटियों ने वीडियो कॉल पर किए पिता के अंतिम दर्शन
➤ अस्थियां लेने भी नहीं पहुंचे परिजन, हरिद्वार में विसर्जन कराने का किया आग्रह
जिस पिता ने पूरी जिंदगी अपने बच्चों का भविष्य संवारने में लगा दी, उनकी अंतिम विदाई के समय परिवार का साथ नहीं मिला। हरियाणा के पानीपत में 65 वर्षीय सुशील कुमार सिंह के निधन के बाद एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पारिवारिक रिश्तों, संवेदनाओं और जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा छेड़ दी है। मूल रूप से मध्य प्रदेश के सिंगरौली के रहने वाले सुशील कुमार सिंह पानीपत में रह रहे थे। सीने में दर्द होने के कारण उनका निधन हो गया। पुलिस ने शव को सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवाकर परिजनों को सूचना दी, लेकिन परिवार के सदस्यों और दामादों ने दूरी और आने में असमर्थता जताई। यहां तक कि बेटियों को पानीपत आने के लिए टिकट खर्च देने की पेशकश भी की गई, लेकिन कोई अंतिम संस्कार में शामिल होने नहीं पहुंचा। आखिरकार जनसेवा दल ने आगे आकर पूरे विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार कराया। उनकी बेटियों ने मोबाइल पर वीडियो कॉल के माध्यम से पिता के अंतिम दर्शन किए और दूर रहकर अंतिम विदाई देखी।
पानीपत की कॉलोनी में रहते थे सुशील कुमार सिंह
जानकारी के अनुसार, सुशील कुमार सिंह मूल रूप से मध्य प्रदेश के सिंगरौली के रहने वाले थे। वह पानीपत के ददलाना गांव की राधा स्वामी कॉलोनी में टाउनशिप के सामने रहते थे। पहले वह रिफाइनरी में नौकरी करते थे।
बताया गया कि सीने में दर्द होने के बाद उनका निधन हो गया। इसके बाद पुलिस ने शव को सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया और परिजनों को इसकी सूचना दी। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव जनसेवा दल को सौंप दिया गया।
पांच बेटियां हैं, पत्नी भी रहती हैं बीमार
जनसेवा दल के सचिव चमन गुलाटी ने परिवार से संपर्क किया तो पता चला कि सुशील कुमार सिंह की पांच बेटियां हैं। उनकी पत्नी की तबीयत भी खराब रहती है। पांच बेटियों में से तीन की शादी हो चुकी है, जबकि दो अविवाहित हैं।
परिवार के सदस्यों को पिता के निधन की सूचना दी गई। उन्हें पानीपत पहुंचने के लिए टिकट खर्च देने की पेशकश भी की गई, लेकिन किसी ने आने की सहमति नहीं जताई। रिश्तेदारों और दामादों ने भी दूरी और अन्य असमर्थताओं का हवाला देते हुए अंतिम संस्कार में शामिल होने से इनकार कर दिया।
वीडियो कॉल पर बेटियों ने देखी पिता की अंतिम विदाई
परिजनों के पानीपत नहीं पहुंचने पर बेटियों ने वीडियो कॉल के माध्यम से पिता का अंतिम संस्कार दिखाने का आग्रह किया। इसके बाद जनसेवा दल के सदस्यों ने अंतिम संस्कार की व्यवस्था की और बेटियों को मोबाइल पर पूरी प्रक्रिया दिखाई।
इस तरह जिन बेटियों को पिता की अंतिम विदाई में शामिल होना था, उन्हें मोबाइल स्क्रीन के माध्यम से ही अंतिम दर्शन करने पड़े। परिवार की अनुपस्थिति में जनसेवा दल के सदस्यों ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई।
अस्थियां लेने भी नहीं पहुंचे परिजन
सुशील कुमार सिंह के अंतिम संस्कार के बाद जनसेवा दल ने परिवार से संपर्क कर अस्थियां लेने के लिए पानीपत आने के बारे में पूछा। इस पर परिजनों ने आने में असमर्थता जताई और अस्थियों का हरिद्वार में विसर्जन कराने का आग्रह किया।
जनसेवा दल के सचिव चमन गुलाटी ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि माता-पिता अपना पूरा जीवन बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में लगा देते हैं। ऐसे में जीवन के अंतिम पड़ाव पर उनका साथ नहीं मिलना बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि माता-पिता के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी केवल उनके जीवित रहने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
जनसेवा दल के सदस्यों ने निभाई अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी
सुशील कुमार सिंह को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देने में जनसेवा दल के कई सदस्यों और समाजसेवियों ने सहयोग किया। इनमें किशन मनचंदा, चमन गुलाटी, कमल गुलाटी, समाजसेवी सतीश चुघ, बंटी गांधी, वासुदेव और मदन साइकिल वाले शामिल रहे।
परिजनों की गैरमौजूदगी में इन लोगों ने अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था की। घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि परिवार से दूर रहने की परिस्थितियों के बीच बुजुर्गों की देखभाल और उनके प्रति सामाजिक जिम्मेदारी किस तरह सुनिश्चित की जाए।
Akhil Mahajan