हरियाणा में दो तत्कालीन BDPO पर ₹50 हजार जुर्माना, RTI की जानकारी देने में 6 साल की देरी
रेवाड़ी में RTI की जानकारी देने में छह साल की देरी पर दो तत्कालीन BDPO पर 25-25 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। आयोग ने तीन महीने में वसूली के निर्देश दिए।
रेवाड़ी में दो तत्कालीन BDPO पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना, RTI की जानकारी देने में हुई छह साल की देरी
➤ हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने वीरेंद्र और विशाल भारद्वाज के खिलाफ दिए आदेश, पेंशन से भी हो सकती है वसूली
➤ तीन महीने में जुर्माना जमा कराने के निर्देश, RTI मामलों में देरी के कारणों की जांच कर कार्रवाई करने को कहा
रेवाड़ी। हरियाणा के रेवाड़ी जिले में सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी निर्धारित समय में उपलब्ध नहीं कराने पर हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने धारूहेड़ा के दो तत्कालीन एसपीआईओ-सह-ब्लॉक विकास एवं पंचायत अधिकारियों (BDPO) के खिलाफ जुर्माना लगाने के आदेश दिए हैं। राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने तत्कालीन अधिकारियों वीरेंद्र और विशाल भारद्वाज पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। दोनों पर कुल 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
यह मामला गांव डुंगरवास निवासी चंद्र प्रकाश की ओर से 11 फरवरी 2020 को दायर RTI आवेदन से जुड़ा है। निर्धारित समय में जानकारी नहीं मिलने पर मामला दूसरी अपील तक पहुंचा। आयोग ने 8 अप्रैल 2021 को संबंधित एसपीआईओ को पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन आदेश का पालन नहीं होने पर 2 जनवरी 2024 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। आयोग के अनुसार, संबंधित अधिकारी की ओर से नोटिस का जवाब भी दाखिल नहीं किया गया।
मामले में आयोग ने रिकॉर्ड की जांच के बाद पाया कि दोनों अधिकारी अपने-अपने कार्यकाल के दौरान निर्धारित 30 दिन की वैधानिक समयसीमा में जानकारी उपलब्ध कराने में विफल रहे। जानकारी करीब छह साल बाद आयोग के हस्तक्षेप के पश्चात उपलब्ध कराई गई। अधिकारियों की ओर से देरी के लिए कोई ठोस और कानूनी रूप से मान्य कारण भी प्रस्तुत नहीं किया गया। आयोग ने जुर्माने की राशि तीन महीने के भीतर जमा कराने के साथ ही वसूली और विभागीय कार्रवाई को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं।
छह साल तक नहीं मिली पूरी जानकारी, आयोग के आदेश के बाद हुआ रिकॉर्ड का निरीक्षण
गांव डुंगरवास निवासी चंद्र प्रकाश ने 11 फरवरी 2020 को RTI आवेदन दायर कर जानकारी मांगी थी। निर्धारित समय में सूचना उपलब्ध नहीं कराए जाने पर मामला दूसरी अपील तक पहुंच गया। इसके बाद हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने 8 अप्रैल 2021 को संबंधित एसपीआईओ को पूरी जानकारी देने के निर्देश दिए।
आयोग के आदेश का पालन नहीं होने पर 2 जनवरी 2024 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। आयोग के अनुसार, संबंधित अधिकारी ने इस नोटिस का जवाब दाखिल नहीं किया। सुनवाई के दौरान चंद्र प्रकाश ने ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपना पक्ष रखा। उन्होंने जानकारी मिलने की पुष्टि तो की, लेकिन उसे अधूरा बताया। साथ ही संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
वहीं, सरपंच विपिन कुमार और ग्राम सचिव दिनेश कुमार ने आयोग को बताया कि 21 अगस्त 2026 के अंतरिम आदेश के अनुपालन में आवेदक ने 2 सितंबर 2026 को संबंधित रिकॉर्ड का निरीक्षण किया और जानकारी प्राप्त की। उन्होंने आयोग से मामले को बंद करने का अनुरोध किया।
हालांकि, आयोग ने रिकॉर्ड और अधिकारियों के कार्यकाल की जांच के बाद सूचना उपलब्ध कराने में हुई देरी को गंभीरता से लिया। आयोग के अनुसार, जानकारी करीब छह साल बाद उसके हस्तक्षेप के पश्चात उपलब्ध कराई गई।
वीरेंद्र और विशाल भारद्वाज के कार्यकाल की जांच में सामने आई देरी
आयोग ने रिकॉर्ड की जांच में पाया कि वीरेंद्र का कार्यकाल 15 नवंबर 2019 से 16 अप्रैल 2020 तक रहा, जबकि विशाल भारद्वाज 17 अप्रैल 2020 से 9 नवंबर 2020 तक पद पर रहे।
दोनों अधिकारी अपने-अपने कार्यकाल के दौरान RTI के तहत मांगी गई जानकारी निर्धारित 30 दिन की वैधानिक समयसीमा में उपलब्ध कराने में विफल रहे। आयोग ने कहा कि सूचना उपलब्ध कराने में करीब छह साल की देरी हुई और अधिकारियों की ओर से इस देरी के लिए कोई ठोस तथा कानूनी रूप से मान्य कारण भी नहीं दिया गया।
इसी आधार पर राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने दोनों तत्कालीन अधिकारियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के आदेश दिए। इस तरह कुल जुर्माने की राशि 50 हजार रुपये निर्धारित की गई है।
RTI अधिनियम की धारा 20(1) का हवाला, हाईकोर्ट के मामले का भी उल्लेख
आयोग ने अपने आदेश में RTI अधिनियम की धारा 20(1) का हवाला देते हुए कहा कि निर्धारित अवधि में सूचना उपलब्ध नहीं कराने और देरी के लिए उचित कारण प्रस्तुत नहीं करने पर जन सूचना अधिकारी के खिलाफ जुर्माना लगाया जा सकता है।
आदेश में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रमेश शर्मा एवं अन्य बनाम राज्य सूचना आयोग, हरियाणा एवं अन्य मामले का भी उल्लेख किया गया।
आयोग के आदेश का उद्देश्य निर्धारित समयसीमा में सूचना उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सुनिश्चित करना और बिना उचित कारण के होने वाली देरी पर जवाबदेही तय करना है। इस मामले में अधिकारियों की ओर से देरी का कोई ठोस और कानूनी रूप से मान्य कारण प्रस्तुत नहीं किए जाने को भी ध्यान में रखा गया।
तीन महीने में जमा करानी होगी जुर्माने की राशि, पेंशन से भी वसूली के निर्देश
हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने निर्देश दिया है कि जुर्माने की राशि आदेश प्राप्त होने की तारीख से तीन महीने के भीतर निर्धारित सरकारी मद में जमा कराई जाए। आयोग के सचिवालय को आदेश की प्रति विकास एवं पंचायत विभाग, चंडीगढ़ के निदेशक को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। निदेशक संबंधित अधिकारियों से जुर्माने की राशि की वसूली सुनिश्चित करेंगे।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संबंधित अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुका है, तो कानून के अनुसार जुर्माने की राशि उसकी पेंशन से वसूल की जाएगी। इस निर्देश के तहत सेवानिवृत्त अधिकारियों से भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार राशि की वसूली की जा सकेगी।
देरी के कारणों की जांच होगी, लापरवाही मिलने पर विभागीय कार्रवाई
आयोग ने विकास एवं पंचायत विभाग को भविष्य में RTI आवेदनों का निर्धारित समयसीमा में निपटारा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही इस मामले में सूचना उपलब्ध कराने में हुई देरी के कारणों की जांच करने को भी कहा गया है।
आयोग के निर्देशों के अनुसार, यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ विभागीय सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करनी होगी। इस कार्रवाई से संबंधित जानकारी प्राथमिकता के आधार पर तीन महीने के भीतर आयोग को देनी होगी।
इस प्रकार आयोग ने जुर्माना लगाने के साथ सूचना देने में हुई देरी की जवाबदेही तय करने, राशि की वसूली सुनिश्चित करने और भविष्य में RTI आवेदनों का समय पर निपटारा कराने के लिए विभाग को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
Akhil Mahajan