10 साल से अटका 50 बेड का अस्पताल, पंचायत ने एक रुपए सालाना पट्टे पर जमीन देने का रखा था प्रस्ताव
रेवाड़ी के खरखड़ा में 50 बेड का अस्पताल 10 साल बाद भी नहीं बना। पंचायत के जमीन प्रस्ताव के बावजूद निर्माण अटका, प्रकाश यादव ने सीएम और स्वास्थ्य मंत्री से जवाब मांगा।
रेवाड़ी के खरखड़ा में 10 साल बाद भी 50 बेड के अस्पताल का निर्माण शुरू नहीं ➤ पंचायत ने 4 से 5 एकड़ जमीन 33 साल के लिए एक रुपए वार्षिक पट्टे पर देने का रखा था प्रस्ताव ➤ सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश यादव ने सीएम और स्वास्थ्य मंत्री को स्मरण पत्र भेजकर मांगा जवाब
रेवाड़ी जिले के गांव खरखड़ा में प्रस्तावित 50 बेड के अस्पताल का निर्माण करीब एक दशक बीत जाने के बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। ग्राम पंचायत की ओर से अस्पताल के लिए जमीन देने का प्रस्ताव पारित किए जाने और स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर कई बार पत्राचार होने के बावजूद परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब इस मामले को लेकर खरखड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश यादव ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और संबंधित जनप्रतिनिधियों को स्मरण पत्र भेजा है। उन्होंने अस्पताल की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने और निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग उठाई है।
गांव खरखड़ा में अस्पताल निर्माण की पहल वर्ष 2016 में की गई थी। उस समय ग्राम पंचायत ने अस्पताल के लिए करीब 4 से 5 एकड़ पंचायत भूमि स्वास्थ्य विभाग को देने का प्रस्ताव रखा था। जमीन 33 साल के लिए एक रुपए वार्षिक पट्टे पर दी जानी थी। इसके बावजूद आज तक अस्पताल का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। इससे क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद लगाए बैठे लोगों के सामने परियोजना की स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पंचायत ने 2016 में पारित किया था प्रस्ताव
ग्राम पंचायत खरखड़ा ने 22 जुलाई 2016 को प्रस्ताव संख्या 5 पारित किया था। इसमें प्रस्तावित 50 बेड के अस्पताल के निर्माण के लिए करीब 4 से 5 एकड़ पंचायत भूमि स्वास्थ्य विभाग को 33 साल के लिए एक रुपए वार्षिक पट्टे पर देने की बात कही गई थी। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए अस्पताल निर्माण का रास्ता तैयार करना था।
इसके बाद भी परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से पत्राचार किया गया। सिविल सर्जन कार्यालय, रेवाड़ी ने 24 अप्रैल 2018, 25 मई 2018 और 11 फरवरी 2021 को इस संबंध में पत्र जारी किए। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद अस्पताल के निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। करीब 10 साल का समय बीतने के बाद भी परियोजना का जमीन पर नहीं उतरना अब चर्चा का विषय बन गया है।
औद्योगिक क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत
धारूहेड़ा और इसके आसपास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। यहां श्रमिक परिवारों के साथ आसपास के गांवों के लोग भी रहते हैं, जो स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं। ऐसे में क्षेत्र में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
गंभीर बीमारी या दुर्घटना होने पर मरीजों को दूसरे अस्पतालों अथवा निजी चिकित्सा संस्थानों का रुख करना पड़ सकता है। दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के नजदीक होने के कारण इस क्षेत्र में बेहतर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा की जरूरत भी महसूस की जाती है। प्रस्तावित 50 बेड का अस्पताल शुरू होने से क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से यह सुविधा अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाई है।
परियोजना की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश यादव ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और संबंधित जनप्रतिनिधियों को भेजे स्मरण पत्र में अस्पताल परियोजना की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने प्रस्तावित जमीन की वर्तमान स्थिति, प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति, बजट आवंटन और अब तक की गई कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक करने की बात कही है।
उन्होंने मांग की है कि यदि परियोजना में किसी तरह की बाधा है तो उसे दूर किया जाए। साथ ही, अस्पताल निर्माण शुरू करने की तारीख और काम पूरा करने की समय-सीमा भी तय की जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को यह पता चल सके कि प्रस्तावित अस्पताल कब तक बनकर तैयार होगा।
अस्पताल बनने तक मौजूदा स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने की मांग
प्रकाश यादव ने यह भी कहा है कि जब तक अस्पताल का निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक धारूहेड़ा और आसपास के क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्टाफ तथा आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत किया जाना चाहिए। इससे मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
प्रकाश यादव के अनुसार, यह मामला केवल एक भवन के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि आमजन की स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ा है। करीब एक दशक पहले शुरू हुई पहल के बावजूद अस्पताल का निर्माण शुरू नहीं होना चिंता का विषय है। अब स्मरण पत्र भेजकर उन्होंने संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से परियोजना पर स्थिति स्पष्ट करने तथा इसे आगे बढ़ाने की मांग की है।
Akhil Mahajan