अमेरिका भेजने के नाम पर 25.10 लाख ठगे, युवक को सेंट विंसेंट भेजकर छोड़ा
यमुनानगर में बेटे को अमेरिका भेजने और नौकरी दिलाने के नाम पर 25.10 लाख रुपये की ठगी का आरोप, सेंट विंसेंट में फंसे युवक के मामले में तीन लोगों पर केस दर्ज।
अमेरिका भेजने और नौकरी दिलाने के नाम पर यमुनानगर के व्यक्ति से 25.10 लाख रुपये ठगे
➤ बेटे को अमेरिका की जगह सेंट विंसेंट भेजा, वहां न नौकरी मिली और न अमेरिका जाने का इंतजाम हुआ
➤ पैसे वापस मांगने पर पिता-बेटे को जान से मारने की धमकी, तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज
यमुनानगर। विदेश में पढ़ाई और नौकरी का सपना दिखाकर ठगी करने का एक और मामला सामने आया है। यमुनानगर के लक्ष्मी नगर निवासी एक व्यक्ति से उसके बेटे को अमेरिका भेजने और वहां पढ़ाई के साथ नौकरी दिलाने के नाम पर 25.10 लाख रुपये ठग लिए गए। आरोप है कि मोहाली की इमिग्रेशन कंपनी से जुड़े लोगों ने पहले अमेरिका भेजने का भरोसा दिलाकर लाखों रुपये वसूले, लेकिन बाद में युवक को अमेरिका की जगह सेंट विंसेंट भेज दिया। वहां पहुंचने के बाद भी न उसे नौकरी मिली और न ही अमेरिका भेजने की प्रक्रिया पूरी हुई।
हालात ऐसे हो गए कि विदेश में रह रहे युवक के खाने-पीने और रहने का खर्च भी पिता को ही उठाना पड़ रहा है। पीड़ित परिवार ने जब आरोपियों से अपने पैसे वापस मांगे और बेटे के भविष्य को लेकर सवाल किए तो उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। मामले की आर्थिक अपराध शाखा से प्रारंभिक जांच के बाद गांधी नगर थाना पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और इमिग्रेशन एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।
पूर्व सरपंच के जरिए मोहाली के इमिग्रेशन एजेंटों से हुई मुलाकात
लक्ष्मी नगर निवासी मोहन लाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह अपने बेटे उत्सव सिंघल को विदेश भेजना चाहता था। इसी सिलसिले में वर्ष 2024 में उसकी मुलाकात गांव बैंडी निवासी पूर्व सरपंच सुरेंद्र से हुई थी।
मोहन लाल के अनुसार, सुरेंद्र ने उसे मोहाली स्थित देशभक्त यूनिवर्सिटी अमेरिकाज ऑफिस में कार्यरत भीषम सिंह निवासी होशियारपुर और अरुण मलिक निवासी सोनीपत के बारे में बताया था। इसके बाद अगस्त 2024 के पहले सप्ताह में वह अपने बेटे को विदेश भेजने के संबंध में दोनों से मिलने मोहाली पहुंचा।
आरोप है कि वहां भीषम सिंह और अरुण मलिक ने उसे भरोसा दिलाया कि वे उसके बेटे को अमेरिका भेज देंगे। वहां पढ़ाई करवाने के साथ नौकरी भी दिलाई जाएगी। दोनों की बातों पर विश्वास करके उसने बेटे को विदेश भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी के लिए 40 लाख रुपये का बताया खर्च
शिकायतकर्ता के मुताबिक, आरोपियों ने अमेरिका में पढ़ाई और काम दिलाने का रास्ता बताते हुए अपनी यूनिवर्सिटी और इमिग्रेशन से संबंधित दस्तावेज भी दिखाए। उन्होंने पूरी प्रक्रिया पर करीब 40 लाख रुपये खर्च आने की बात कही।
इसके बाद मोहन लाल ने करीब साढ़े 15 लाख रुपये आरोपियों की ओर से बताए गए खाते में जमा करवा दिए। आरोप है कि पैसे लेने के बाद आरोपियों ने उसके बेटे को फर्जी टिकट और वीजा देकर मुंबई एयरपोर्ट भेज दिया।
मोहन लाल ने बताया कि उसका बेटा दो दिन तक मुंबई एयरपोर्ट पर इंतजार करता रहा, लेकिन इमिग्रेशन विभाग की ओर से उसे यात्रा संबंधी कोई अनुमति या जानकारी नहीं मिली। आखिरकार उसे वापस बुलाना पड़ा। इस पर आरोपियों ने फ्लाइट रद्द होने की वजह तकनीकी कमी बताई।
सेंट विंसेंट भेजने के लिए फिर लिए तीन लाख रुपये
शिकायत के अनुसार, फरवरी 2025 में आरोपियों ने बताया कि उसके बेटे का सेंट विंसेंट का ऑफर लेटर आ गया है। इसके लिए उन्होंने तीन लाख रुपये लेकर मोहन लाल को मोहाली बुलाया। वह 8 फरवरी को मोहाली पहुंचा और भीषम सिंह को तीन लाख रुपये नकद दिए।
इसके बाद 12 फरवरी को उसका बेटा सेंट विंसेंट चला गया। परिवार को उम्मीद थी कि वहां पहुंचने के बाद अमेरिका जाने का रास्ता साफ हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आरोप है कि सेंट विंसेंट पहुंचने के बाद भी अमेरिका भेजने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई।
आरोपियों ने परिवार से कहा कि जब तक बेटा अमेरिका नहीं पहुंचता, तब तक हर महीने 40 से 50 हजार रुपये उनके खाते में जमा करवाने होंगे। इसके बाद भी परिवार ने बेटे को अमेरिका भेजने की उम्मीद में पैसे देने जारी रखे।
शिकायतकर्ता के अनुसार, 13 अप्रैल 2025 को 45 हजार रुपये और 26 मई को 41 हजार रुपये जमा करवाए गए। सितंबर 2025 में आरोपी यमुनानगर पहुंचे और पूर्व सरपंच सुरेंद्र की मौजूदगी में दो लाख रुपये नकद लिए। इसके बाद 15 अक्टूबर 2025 को बेटे को अमेरिका भेजने के नाम पर चार लाख रुपये और ले लिए गए।
विदेश में न नौकरी मिली, न रहने-खाने का खर्च उठा पा रहा बेटा
मोहन लाल ने आरोप लगाया कि अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 तक उसका बेटा लगातार फोन करके अपनी परेशानी बताता रहा। वह कहता था कि सेंट विंसेंट में उसे कोई काम नहीं मिल रहा है। रहने और खाने-पीने का खर्च उठाना भी मुश्किल हो रहा है।
पिता ने कई बार आरोपियों को बेटे की स्थिति के बारे में बताया और अमेरिका भेजने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा, लेकिन उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ऐसे में परिवार की परेशानी लगातार बढ़ती गई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि अब सेंट विंसेंट में वहां के प्रशासन की ओर से उसके बेटे को डिपोर्ट करने की चेतावनी भी मिल रही है। इससे परिवार आर्थिक के साथ-साथ मानसिक परेशानी से गुजर रहा है। विदेश भेजने के लिए बड़ी रकम खर्च करने के बावजूद बेटे का भविष्य अधर में लटक गया है।
कार्यालय में जवाब मांगने पहुंचे तो बुला ली पुलिस
मोहन लाल ने शिकायत में आरोप लगाया कि जब उसने अपने पैसे वापस मांगने और बेटे को अमेरिका भेजने को लेकर आरोपियों से जवाब मांगा तो उसे जान से मारने की धमकियां दी गईं। इतना ही नहीं, उसके बेटे को भी अज्ञात लोगों की ओर से धमकियां मिलने लगीं।
बाद में मोहन लाल को पता चला कि भीषम सिंह और अरुण मलिक चंडीगढ़ निवासी संदीप सिंह के अधीन काम करते हैं। इसके बाद उसने संदीप सिंह से संपर्क करने और उसके कार्यालय में जाकर मिलने का प्रयास किया।
आरोप है कि संदीप सिंह ने उससे मिलने और मामले पर बात करने के बजाय पुलिस बुला ली। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और इमिग्रेशन एक्ट में केस दर्ज
मामले की आर्थिक अपराध शाखा से प्रारंभिक जांच करवाई गई। जांच के बाद गांधी नगर थाना पुलिस ने भीषम सिंह निवासी होशियारपुर, अरुण मलिक निवासी सोनीपत और संदीप सिंह निवासी चंडीगढ़ के खिलाफ केस दर्ज किया है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और इमिग्रेशन एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। शिकायत में मोहन लाल ने आरोप लगाया है कि बेटे को अमेरिका भेजने का भरोसा देकर उससे कुल 25.10 लाख रुपये लिए गए, लेकिन उसे निर्धारित मंजिल तक पहुंचाने के बजाय सेंट विंसेंट भेजकर छोड़ दिया गया।
Akhil Mahajan