NIT में अचानक छुट्टी और हॉस्टल खाली कराने पर बवाल, स्टूडेंट्स ने उठाए सवाल
NIT कुरुक्षेत्र में अचानक छुट्टियां और हॉस्टल खाली कराने के आदेश पर विवाद खड़ा हो गया है। छात्र जांच टीम से बचाने के आरोप लगा रहे हैं
■ NIT कुरुक्षेत्र में पहली बार अचानक छुट्टी और हॉस्टल खाली कराने के आदेश
■ जांच टीम से बचाने के आरोप, 23 अप्रैल को होनी है विजिट
■ 2500 से ज्यादा स्टूडेंट्स लौटे घर, विदेशी छात्र सबसे ज्यादा परेशान
हरियाणा के National Institute of Technology Kurukshetra में छात्रों के सुसाइड मामलों की जांच के बीच प्रशासन के एक फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। संस्थान में पहली बार अचानक छुट्टियां घोषित कर दी गईं और स्टूडेंट्स को 19 अप्रैल तक हॉस्टल खाली करने के आदेश दे दिए गए। इस फैसले के बाद छात्र-छात्राओं में नाराजगी है और वे इसे जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश बता रहे हैं।
दरअसल, NIT में सुसाइड मामलों की जांच के लिए 5 सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जो 23-24 अप्रैल को कैंपस विजिट कर स्टूडेंट्स, प्रोफेसर और अन्य कर्मचारियों से बातचीत करने वाली है। लेकिन छात्रों का आरोप है कि जांच टीम के आने से पहले ही हॉस्टल खाली कराकर उन्हें बाहर भेज दिया गया, ताकि कमेटी उनसे सीधे बातचीत न कर सके।
ढाई हजार से ज्यादा छात्रों ने छोड़ा हॉस्टल
NIT के हॉस्टल में करीब 5300 स्टूडेंट्स रह रहे थे, जिनमें से 2500 से ज्यादा छात्र आदेश के बाद अपने घर लौट गए। अचानक लिए गए इस फैसले से कई छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा, खासकर वे छात्र जिनकी परीक्षाएं और वाइवा प्रस्तावित थे। अब उन्हें NIT की वेबसाइट पर नजर बनाए रखनी होगी, क्योंकि कभी भी दोबारा बुलाया जा सकता है।
विदेशी छात्रों के लिए बढ़ी मुश्किलें
इस फैसले का सबसे ज्यादा असर विदेशी छात्रों पर पड़ा है। NIT में नेपाल, भूटान, श्रीलंका, दुबई, ओमान, बहरीन और अफगानिस्तान जैसे देशों के छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। अचानक हॉस्टल खाली करने के आदेश से उनके सामने रहने और घर लौटने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
कुछ छात्रों ने बताया कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण फ्लाइट टिकट के दाम करीब 70 हजार रुपए तक पहुंच गए हैं, जिसे वहन करना उनके लिए मुश्किल है। ऐसे में न तो वे वापस घर जा पा रहे हैं और न ही बाहर रहने की व्यवस्था कर पा रहे हैं।
पहली बार ऐसा फैसला, प्रशासन ने दी सफाई
बताया जा रहा है कि NIT में सुसाइड और सुसाइड अटेम्प्ट जैसी घटनाओं के बाद यह पहली बार है जब संस्थान को इस तरह बंद कर हॉस्टल खाली कराए गए हैं। कार्यकारी डायरेक्टर प्रो. ब्रह्मजीत सिंह ने कहा कि यह फैसला माहौल और छात्रों के हित को ध्यान में रखकर लिया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों की समस्याओं को समझने के लिए तीन अलग-अलग कमेटियां बनाई गई हैं और हर छात्र को एक फैकल्टी मेंबर से जोड़ा गया है, जो उनसे लगातार संवाद बनाए रखेगा।
जांच कमेटी पर भी उठे सवाल
जांच कमेटी की अध्यक्ष डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. लीली दीवान हैं, जिनके साथ प्रो. जेके कपूर, प्रो. प्रवीण अग्रवाल, डॉ. संदीप सिंघल और डॉ. मनोज सिन्हा शामिल हैं। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि इस मामले की जांच किसी बाहरी एजेंसी जैसे CBI से नहीं करवाई जाएगी।
pooja