आरती सिंह राव के समर्थन में लगे ‘भावी मुख्यमंत्री’ के नारे

आरती राव के समर्थन में भावी मुख्यमंत्री के नारे लगाए जाने पर उन्होंने इसे लोगों का प्यार बताया। महेंद्रगढ़ में नरबीर समर्थक ने स्वागत और राजनीतिक दावों पर सवाल उठाए।

आरती सिंह राव के समर्थन में लगे ‘भावी मुख्यमंत्री’ के नारे

आरती राव के समर्थन में फिर लगे भावी मुख्यमंत्री के नारे
आरती राव बोलीं- मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह भाजपा तय करती है
नरबीर समर्थक हरेंद्र यादव ने स्वागत और राजनीतिक दावों पर सवाल उठाए


हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव के समर्थन में ‘भावी मुख्यमंत्री’ के नारे लगाए जाने को लेकर दक्षिण हरियाणा की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। सोमवार को महेंद्रगढ़ जिले के गांवों के दौरे के दौरान जब मीडिया ने आरती राव से इन नारों के बारे में सवाल किया तो उन्होंने इसे लोगों का प्यार बताया। आरती राव ने कहा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह भारतीय जनता पार्टी तय करती है और उन्हें राजनीति में अभी करीब दो साल ही हुए हैं, इसलिए उन्हें थोड़ा और अनुभव हासिल करना चाहिए। इससे एक दिन पहले रेवाड़ी के बूढ़पुर गांव, जिसे मंत्री राव नरबीर सिंह का पैतृक गांव बताया गया है, में भी आरती राव के समर्थन में ‘भावी मुख्यमंत्री’ के नारे लगाए गए थे।

आरती राव सोमवार को महेंद्रगढ़ की यादव कल्याण सभा, कनीना क्षेत्र के कोका और अन्य गांवों के दौरे पर थीं। अलग-अलग स्थानों पर उनके स्वागत के दौरान समर्थकों की ओर से नारे लगाए गए। जब उनसे पूछा गया कि उनके समर्थन में लगातार ‘भावी मुख्यमंत्री’ के नारे क्यों लगाए जा रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि यह लोगों का प्यार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के बारे में फैसला भाजपा हाईकमान करता है। आरती राव ने अपने राजनीतिक अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीति में उन्हें अभी करीब दो साल ही हुए हैं और उन्हें थोड़ा और अनुभव हासिल करना चाहिए।

बूढ़पुर में स्वागत के दौरान लगे थे भावी CM के नारे

यह मामला उस समय चर्चा में आया जब 20 सितंबर 2026 को राव नरबीर सिंह के पैतृक गांव बूढ़पुर में आरती राव का ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया था। कार्यक्रम के दौरान उनके समर्थन में ‘भावी मुख्यमंत्री आरती राव’ के नारे लगाए गए थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कार्यक्रम में आरती राव का फूल बरसाकर स्वागत भी किया गया था। कार्यक्रम का आयोजन प्रशांत उर्फ सन्नी यादव की ओर से किया गया था।

बूढ़पुर में लगे नारों के बारे में पूछे जाने पर आरती राव ने अपने राजनीतिक सफर को अभी शुरुआती दौर का बताया था। उन्होंने कहा था कि वह राजनीति में लंबी पारी खेलने के लिए आई हैं और भविष्य में पार्टी की ओर से कोई जिम्मेदारी मिलने पर उसे पूरी मेहनत से निभाने की कोशिश करेंगी।

‘लंबी पारी के लिए राजनीति में आई हूं’

आरती राव इससे पहले रेवाड़ी विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी रहे प्रशांत सनी यादव के घर शनिवार को आयोजित चाय कार्यक्रम में भी पहुंची थीं। वहां भी उनसे ‘भावी मुख्यमंत्री’ के नारों को लेकर सवाल किया गया था। उन्होंने कहा था कि उनका राजनीतिक सफर अभी शुरू हुआ है और वह अभी राजनीति की चीजें सीख रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह राजनीति में लंबी पारी खेलने के लिए आई हैं। अगर भविष्य में पार्टी उन्हें कोई जिम्मेदारी देती है तो वह उसे पूरी मेहनत से निभाने की कोशिश करेंगी।

आरती राव ने अपने राजनीतिक सफर के बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने 2014 और 2019 में विधानसभा चुनाव का टिकट मांगा था, लेकिन उस समय उन्हें टिकट नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी के लिए काम जारी रखा और भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में वोट मांगे। बाद में उन्हें टिकट मिला और वह अटेली विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनीं। मौजूदा समय में वह स्वास्थ्य मंत्री के रूप में काम कर रही हैं।

‘राव साहब की बेटी है, काम नहीं करेगी’ सुनने का भी किया जिक्र

आरती राव ने अपने राजनीतिक सफर के दौरान हुई चर्चाओं का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीति में आने के बाद उन्हें यह सुनना पड़ा कि वह बड़े घराने से हैं और काम नहीं करेंगी। उन्होंने अपने खेल जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि वह 18 साल तक भारतीय शूटिंग टीम का हिस्सा रही हैं और 45 डिग्री तापमान में भी शूटिंग कर चुकी हैं। उस समय उनका लक्ष्य पदक जीतकर प्रदेश और देश का नाम रोशन करना था।

आरती राव ने कहा कि राजनीति में समय और किस्मत का भी महत्व होता है। उनके अनुसार, शुरुआत में टिकट नहीं मिला, लेकिन उन्होंने पार्टी के लिए काम करना जारी रखा। बाद में उन्हें चुनाव लड़ने का मौका मिला और वह विधायक बनीं। इसके बाद उन्हें मंत्री की जिम्मेदारी मिली।

नरबीर समर्थक हरेंद्र यादव ने उठाए सवाल

दूसरी ओर, राव नरबीर सिंह के समर्थक और बूढ़पुर निवासी हरेंद्र यादव ने आरती राव के स्वागत और उनके समर्थन में लगाए गए नारों को लेकर सवाल उठाए हैं। एक मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में हरेंद्र यादव ने कहा कि आरती राव बूढ़पुर आईं और उनका स्वागत किया गया, लेकिन उन्हें यह स्वागत ‘मजाक सा’ लगता है। उन्होंने आरती राव और राव इंद्रजीत सिंह से गांव में किए गए कथित आर्थिक सहयोग को लेकर भी सवाल उठाए।

हरेंद्र यादव ने कहा कि बूढ़पुर में राव इंद्रजीत सिंह दो-तीन बार आए हैं, लेकिन उनके अनुसार अगर आरती राव या राव इंद्रजीत सिंह ने गांव में दो लाख रुपये दिए हों तो कोई इसका दावा करे। उन्होंने यह भी कहा कि आसपास के 10-12 गांवों में किसी तरह की मदद किए जाने का भी दावा सामने आना चाहिए। ये सभी हरेंद्र यादव के आरोप और सवाल हैं, जिन्हें उन्होंने मीडिया बातचीत के दौरान रखा।

हरेंद्र यादव ने यह भी कहा कि यह समय और राजनीतिक माहौल का खेल है तथा ‘हवा बनती है और यह जीत जाते हैं’। उन्होंने आरती राव के गांव में हुए स्वागत को लेकर भी अपनी आपत्ति जाहिर की और कहा कि अगर पांच गांवों की पंचायतें, सरपंच और ग्रामीण प्रतिनिधि औपचारिक रूप से स्वागत करें, तभी वह उसे वास्तविक स्वागत मानेंगे। उन्होंने राव इंद्रजीत के समर्थकों के सामाजिक कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए।

राव इंद्रजीत और राव नरबीर की पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता

राव इंद्रजीत सिंह और राव नरबीर सिंह दोनों हरियाणा की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं और दोनों के बीच राजनीतिक मतभेदों का इतिहास पुराना है। वर्ष 1987 के जाटूसाना विधानसभा चुनाव में राव नरबीर सिंह ने लोकदल के टिकट पर चुनाव जीतकर राव इंद्रजीत सिंह को हराया था। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार, नरबीर सिंह को 40,592 वोट मिले थे, जबकि राव इंद्रजीत सिंह को 31,367 वोट मिले थे। नरबीर सिंह की जीत का अंतर 9,225 वोट रहा था।

राव नरबीर सिंह ने जनवरी 2026 में भी अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा था कि उनका राजनीतिक जीवन राव इंद्रजीत सिंह को हराकर शुरू हुआ था। उन्होंने बताया था कि 1987 में जब उन्होंने जाटूसाना से चुनाव लड़ा, तब उनकी उम्र करीब 26 साल थी।

दोनों नेताओं के राजनीतिक परिवारों की भी दक्षिण हरियाणा में लंबी पृष्ठभूमि रही है। राव इंद्रजीत सिंह के पिता राव बीरेंद्र सिंह हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जबकि राव नरबीर सिंह के परिवार का भी राजनीति में पुराना जुड़ाव रहा है। राव नरबीर सिंह ने 1987 में जाटूसाना से चुनाव जीतकर अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत की थी और बाद में सोहना तथा बादशाहपुर से भी विधायक रहे।

ऐसे में आरती राव के समर्थन में उनके विरोधी खेमे से जुड़े माने जाने वाले क्षेत्र में लगाए गए ‘भावी मुख्यमंत्री’ के नारे और उसके बाद सामने आई प्रतिक्रियाओं ने दक्षिण हरियाणा की सियासत में चर्चा को बढ़ा दिया है। हालांकि आरती राव ने अपने बयान में मुख्यमंत्री पद को लेकर किसी दावे के बजाय इसे लोगों का प्यार बताया है और मुख्यमंत्री चुने जाने का निर्णय भाजपा पर छोड़ा है।