हरियाणा राज्यसभा चुनाव: '9' का जादुई आंकड़ा और भाजपा की 'साइलेंट' प्लानिंग, क्या कांग्रेस में होगा बड़ा 'खेला'?
जींद जिले में 152-डी नेशनल हाईवे पर ट्रक के अचानक ब्रेक लगाने से क्रेटा कार उसमें जा घुसी। हादसे में हिसार और नैनीताल के दो युवकों की मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हैं। पुलिस ने BNS के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
■ भाजपा ने संजय भाटिया को राज्यसभा भेजकर संगठन के प्रति निष्ठा का दिया बड़ा ईनाम
■ कांग्रेस के 9 विधायकों पर भाजपा की पैनी नजर और क्रॉस वोटिंग का मंडराया खतरा
■ 16 मार्च को हरियाणा की सियासत में बड़े 'खेला' होने के आसार और सस्पेंस बरकरार
हरियाणा की राजनीति में मार्च की तपिश सिर्फ मौसम की नहीं, बल्कि राज्यसभा चुनाव की भी है। कहने को तो दो सीटें हैं और समीकरण सीधे दिख रहे हैं, लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी '9' के उस आंकड़े के इर्द-गिर्द घूम रही है, जो किसी का भी खेल बना या बिगाड़ सकता है। भारतीय जनता पार्टी ने संजय भाटिया को अपना अधिकृत उम्मीदवार घोषित कर ऊपरी सदन में उनकी एंट्री लगभग सुरक्षित कर ली है। भाटिया का सफर कॉलेज के दिनों में ABVP की छात्र राजनीति से शुरू होकर लोकसभा की ऐतिहासिक जीत तक पहुंचा है। 2019 के चुनाव में वह देश में दूसरे सबसे बड़े अंतर से जीतने वाले सांसद बने थे, लेकिन 2024 में उन्होंने मनोहर लाल खट्टर के लिए अपनी सीट का सहर्ष त्याग कर दिया था। अब पार्टी ने उन्हें राज्यसभा का टिकट देकर उनकी इसी संगठन निष्ठा पर मुहर लगा दी है। हालांकि, असली रोमांच दूसरी सीट को लेकर है, जहां 9 क्रॉस वोट का गणित पूरी बाजी पलट सकता है।
सियासी समीकरणों को देखें तो भाजपा के पास अपने 48 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 31 वोट अनिवार्य हैं। अपनी पहली सीट सुरक्षित करने के बाद भाजपा के पास 17 वोट बचेंगे। यदि भाजपा 3 निर्दलीय और 2 इनेलो विधायकों का साथ जुटा लेती है, तो यह आंकड़ा 22 तक पहुंच जाता है। इसके बावजूद दूसरी सीट पर कब्जा करने के लिए भाजपा को 9 अतिरिक्त वोटों की दरकार होगी। अंदरखाने खबर है कि भाजपा रणनीति के तहत किसी गैर-राजनीतिक या निर्दलीय प्रत्याशी को अपना समर्थन दे सकती है ताकि कांग्रेस के असंतुष्ट खेमे में सेंध लगाई जा सके। यदि कांग्रेस के 9 विधायक पाला बदलते हैं, तो भाजपा का दूसरा सिपाही भी राज्यसभा पहुंच सकता है।
दूसरी ओर, कांग्रेस के भीतर उम्मीदवारों के चयन को लेकर खींचतान जारी है। पार्टी में राज बब्बर, उदयभान और बृजेंद्र सिंह जैसे दिग्गजों के नामों पर मंथन हो रहा है, लेकिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा खेमे की नाराजगी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। हुड्डा खेमा तंवर और बृजेंद्र जैसे नामों पर आसानी से राजी होता नहीं दिख रहा। ऐसे में अगर हाईकमान ने कोई ऐसा फैसला लिया जो स्थानीय गुटों को रास नहीं आया, तो क्रॉस वोटिंग का खतरा और गहरा जाएगा। 5 मार्च को नामांकन का अंतिम दिन है। यदि उस दिन तक कोई तीसरा उम्मीदवार सामने नहीं आता है, तो दोनों दलों को एक-एक सीट मिल जाएगी। लेकिन यदि कोई तीसरा चेहरा मैदान में उतरा, तो 16 मार्च को होने वाली वोटिंग हरियाणा की राजनीति में नया भूचाल लेकर आएगी।
खेला' होने की पूरी संभावना! 5 मार्च (गुरुवार) को नामांकन का आखिरी दिन है। अगर कल दोपहर तक भाजपा की शह पर कोई 'तीसरा खिलाड़ी' मैदान में उतर आता है, तो समझ लीजिए कि 'ऑपरेशन राज्यसभा' शुरू हो चुका है। 16 मार्च को होने वाली वोटिंग महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि हरियाणा की राजनीति का सबसे बड़ा 'पॉलिटिकल थ्रिलर' साबित हो सकती है। एक तरफ संजय भाटिया का अनुभव और भाजपा का अनुशासित वोट बैंक है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के सामने अपने 37 विधायकों को एक साथ रखने की अग्निपरीक्षा।
कुछ इस तरह से भी समझें सियासी शतरंत में बिछी बिसात को..
1. समझिए 9 वोटों का वो 'तिलस्म'
सियासी गणित कहता है कि एक सीट के लिए 31 वोट चाहिए। भाजपा के पास 48 विधायक हैं। संजय भाटिया की जीत के बाद भाजपा के पास 17 वोट सरप्लस (अतिरिक्त) बचेंगे।
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भाजपा का कुनबा: 17 (शेष) + 3 (निर्दलीय) + 2 (इनेलो) = 22 वोट।
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मैजिक फिगर का गैप: जीत के लिए अभी भी 9 और वोटों की दरकार है।
यही वो '9' का आंकड़ा है जिसने कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा दी हैं। चर्चा गरम है कि भाजपा की नजरें कांग्रेस के उन 'नाराज' विधायकों पर हैं, जो पिछले कुछ समय से पार्टी के फैसलों से खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।
2. 'अंदर की खबर': भाजपा का 'प्लान-B' और निर्दलीय का दांव
सूत्रों की मानें तो भाजपा खुद दूसरा उम्मीदवार उतारने के बजाय किसी गैर-राजनीतिक चेहरे या प्रभावशाली निर्दलीय को पीछे से समर्थन दे सकती है। रणनीति साफ है:
अगर कांग्रेस ने हाईकमान के भरोसे किसी 'बाहरी' चेहरे को टिकट दिया, तो हरियाणा के स्थानीय कांग्रेसी विधायकों में असंतोष भड़क सकता है। भाजपा इसी 'असंतोष' की आग में अपनी जीत की रोटियां सेंकने की फिराक में है। अगर 9 विधायकों ने पाला बदला या क्रॉस वोटिंग की, तो कांग्रेस की पक्की मानी जा रही सीट भाजपा की झोली में गिर सकती है।
3. कांग्रेस में 'सिर फुटौवल': क्या एकजुट रह पाएगा कुनबा?
कांग्रेस के भीतर फिलहाल नामों को लेकर घमासान है। राज बब्बर, उदयभान और बृजेंद्र सिंह जैसे दिग्गजों की दावेदारी के बीच भूपेंद्र सिंह हुड्डा कैंप की चुप्पी बहुत कुछ कह रही है।
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अगर पार्टी ने ऐसा नाम तय किया जिस पर हुड्डा गुट की सहमति नहीं है, तो 16 मार्च को वोटिंग के दिन कांग्रेस को 'अपनों' से ही खतरा पैदा हो जाएगा।
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भाजपा इसी इंतजार में है कि कांग्रेस अपना पत्ता खोले और फिर वह अपनी सेंधमारी की बिसात बिछाए।
Akhil Mahajan