अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प की बड़ी हार :डेमोक्रेट्स ने सीनेटऔर हाउस दोनों में बहुमत हासिल किया, रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण खत्म।

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स ने सीनेट और हाउस में बहुमत हासिल किया। अब्दुल अल-सैयद पहले मुस्लिम सीनेटर बनेंगे, ट्रम्प को बड़ा राजनीतिक झटका लगा।

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प की बड़ी हार :डेमोक्रेट्स ने सीनेटऔर हाउस दोनों में बहुमत हासिल किया, रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण खत्म।

➤ रिपब्लिकन पार्टी की हार से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ीं, डेमोक्रेट्स ने सीनेट और हाउस दोनों में बढ़त बनाई

➤ मिशिगन से अब्दुल अल-सैयद की जीत, अमेरिकी सीनेट में पहुंचने वाले पहले मुस्लिम बनेंगे

➤ चुनाव प्रचार में ट्रम्प ने अल-सैयद को ‘जिहादी’ कहा था, नतीजों के बाद उनके बयान फिर चर्चा में


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को मिडटर्म चुनाव में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। 3 नवंबर को हुए चुनाव के नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों-सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत हासिल कर लिया है। इस जीत के साथ रिपब्लिकन पार्टी का कांग्रेस पर नियंत्रण खत्म हो गया है। दूसरी ओर, मिशिगन से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने सीनेट का चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है। वह अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बनेंगे। चुनाव प्रचार के दौरान ट्रम्प ने उन्हें खुले मंच से ‘जिहादी’ कहा था और आतंकवाद से जोड़ने वाले आरोप लगाए थे। अब चुनावी जीत के बाद अल-सैयद के बयान और ट्रम्प के पुराने हमले फिर चर्चा में हैं।

दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का बहुमत

अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में कुल 435 सीटें हैं। बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत होती है। चुनाव में सभी सीटों पर मतदान हुआ। शुरुआती नतीजों और मीडिया अनुमानों के अनुसार डेमोक्रेटिक पार्टी ने सदन में बहुमत हासिल कर लिया है। हालांकि, सभी सीटों की मतगणना पूरी होने तक सीटों का अंतिम आंकड़ा बदल सकता है।

वहीं, अमेरिकी सीनेट में कुल 100 सीटें हैं और बहुमत के लिए 51 सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है। इस चुनाव में 35 सीटों पर मतदान हुआ। डेमोक्रेट्स ने कई महत्वपूर्ण राज्यों में जीत दर्ज करते हुए सीनेट का नियंत्रण भी अपने हाथ में ले लिया। चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी के पास सीनेट में बहुमत था। अब दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स के बहुमत से ट्रम्प प्रशासन के लिए अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।

अब्दुल अल-सैयद बने अमेरिकी सीनेट के पहले मुस्लिम सदस्य

मिशिगन में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराकर सीनेट का चुनाव जीत लिया है। इस जीत के साथ वह अमेरिकी इतिहास में सीनेटर चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बनेंगे। 42 वर्षीय अल-सैयद पहले सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर चुके हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने आम परिवारों की आर्थिक परेशानियों, स्वास्थ्य सेवाओं को सभी के लिए उपलब्ध कराने और राजनीति में बड़ी कंपनियों के प्रभाव को कम करने जैसे मुद्दे उठाए थे।

उनके चुनावी एजेंडे में सभी के लिए स्वास्थ्य सुविधा, महंगाई से राहत और इजराइल को अमेरिकी सैन्य सहायता बंद करने की मांग भी शामिल थी। उनकी जीत को डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील धड़े के लिए महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।

ट्रम्प ने चुनाव प्रचार में कहा था- जिहादी को सीनेटर बनने से रोकने आया हूं

अब्दुल अल-सैयद के खिलाफ चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कई तीखे बयान दिए थे। 25 अक्टूबर को मिशिगन की एक चुनावी रैली में ट्रम्प ने उन्हें ‘जिहादी’ और मुस्लिम ब्रदरहुड का सदस्य बताया था। ट्रम्प ने कहा था कि वह एक ऐसे व्यक्ति को अमेरिकी सीनेटर बनने से रोकने आए हैं, जिसे उन्होंने जिहादी करार दिया।

ट्रम्प ने अल-सैयद पर आतंकियों का समर्थन करने का आरोप भी लगाया था। उन्होंने यहां तक कहा था कि यदि अल-सैयद सीनेटर बनते हैं तो उन्हें संसद में प्रवेश से पहले मेटल डिटेक्टर से गुजरना चाहिए। अपने भाषण में उन्होंने 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए अल-सैयद की तुलना विमान हाईजैक करने वाले आतंकियों से भी की थी।

हालांकि, अल-सैयद ने मुस्लिम ब्रदरहुड से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया था। उनके खिलाफ लगाए गए चरमपंथ से जुड़े आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण सामने नहीं आया। चुनाव प्रचार के दौरान इन बयानों को लेकर ट्रम्प की आलोचना भी हुई थी।

अब्दुल का जवाब- मेरे नाम और धर्म से पेट्रोल महंगा नहीं हुआ

चुनाव जीतने के बाद समर्थकों को संबोधित करते हुए अब्दुल अल-सैयद ने ट्रम्प के बयानों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनके नाम और धर्म की वजह से लोगों के लिए पेट्रोल खरीदना महंगा नहीं हुआ है। न ही राशन खरीदने या डॉक्टर के पास जाने में परेशानी की वजह उनका धर्म है।

अब्दुल ने कहा कि वह चुनाव में ऐसे नेताओं से लोगों की रक्षा करने के उद्देश्य से उतरे हैं, जो समाज को बांटने की कोशिश करते हैं। उन्होंने ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पर भी तंज कसा। अपने नाम को लेकर ट्रम्प की टिप्पणियों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि जनवरी में जब जेडी वेंस उन्हें सीनेटर पद की शपथ दिलाएंगे, तब ट्रम्प उन्हें सीनेटर कहकर बुला सकते हैं।

टेक्सास और मेन में भी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका

मिडटर्म चुनाव में कई ऐसे राज्यों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जिन्हें रिपब्लिकन पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता था। टेक्सास में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स तालारिको ने रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन को हराया। इस जीत के साथ टेक्सास से सीनेट सीट जीतने वाले डेमोक्रेट्स की वापसी हुई है। इससे पहले लंबे समय से इस राज्य में रिपब्लिकन उम्मीदवारों का दबदबा रहा था।

मेन में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ट्रॉय जैक्सन ने रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स को हराया। कॉलिन्स लंबे समय से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रही थीं और छठी बार चुनाव जीतने की कोशिश में थीं। उनकी हार से डेमोक्रेटिक पार्टी को सीनेट में एक और महत्वपूर्ण सीट मिली।

कंसास में 94 साल बाद डेमोक्रेटिक पार्टी की वापसी

कंसास में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एडम हैमिल्टन ने रिपब्लिकन उम्मीदवार और मौजूदा सीनेटर रोजर मार्शल को हराकर इतिहास रच दिया। इस राज्य से आखिरी बार 1932 में डेमोक्रेटिक पार्टी का कोई उम्मीदवार सीनेट के लिए चुना गया था। करीब 94 साल बाद पार्टी ने यहां जीत दर्ज की है।

हैमिल्टन पेशे से पादरी हैं और चर्च ऑफ द रेजरेक्शन का नेतृत्व करते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रिपब्लिकन उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार किया था। इसके बावजूद डेमोक्रेटिक उम्मीदवार की जीत ने रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका दिया। 

ट्रम्प की नीतियों और महंगाई का चुनाव पर असर

चुनाव विश्लेषण में महंगाई, ईंधन की कीमतों और रोजमर्रा के खर्च को डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के प्रमुख मुद्दों में गिना जा रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाताओं में जीवन-यापन की बढ़ती लागत को लेकर नाराजगी थी। बड़ी संख्या में लोगों ने महंगाई और देश की मौजूदा स्थिति को लेकर ट्रम्प प्रशासन पर असंतोष जताया।

ईरान के साथ युद्ध और उससे जुड़ी आर्थिक चिंताओं का मुद्दा भी चुनाव प्रचार में उठा। रिपब्लिकन सीनेटर रॉन जॉनसन ने भी माना कि ईरान युद्ध और ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर मतदाताओं पर पड़ा। उनके मुताबिक, लोग इन मुद्दों को लेकर परेशान थे। 

ट्रम्प ने डेमोक्रेट्स को दी जीत की बधाई

दोनों सदनों में हार के बावजूद ट्रम्प ने डेमोक्रेटिक पार्टी को जीत की बधाई दी। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि दोनों पार्टियां देश की भलाई के लिए मिलकर काम करेंगी। हालांकि, ट्रम्प पहले ही संकेत दे चुके हैं कि यदि विपक्ष कोई ऐसा कानून पारित करता है, जिससे वह सहमत नहीं हैं, तो वह राष्ट्रपति के वीटो अधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं।

डेमोक्रेटिक पार्टी के सामने अब अपनी चुनावी जीत को नीतिगत फैसलों में बदलने की चुनौती होगी। वहीं, ट्रम्प प्रशासन को अगले दो वर्षों में कांग्रेस के दोनों सदनों में विपक्ष के बहुमत के साथ काम करना पड़ेगा। इससे बजट, कानून और सरकार की नीतियों से जुड़े कई फैसलों पर राजनीतिक टकराव बढ़ने की संभावना है। 

अमेरिका की राजनीति में बदलेगा सत्ता का समीकरण

मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत को ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। सीनेट और हाउस दोनों में विपक्ष का बहुमत होने से राष्ट्रपति के लिए अपनी नीतियों को आगे बढ़ाना आसान नहीं रहेगा। वहीं, अब्दुल अल-सैयद की जीत अमेरिकी राजनीति में प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी ऐतिहासिक मानी जा रही है।

चुनाव में कई राज्यों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों को मिली हार और डेमोक्रेट्स की अप्रत्याशित जीत ने यह संकेत दिया है कि मतदाताओं ने इस बार महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकार के कामकाज जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी। अब देखना होगा कि कांग्रेस में बहुमत मिलने के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी ट्रम्प प्रशासन को किस तरह चुनौती देती है और आने वाले दो वर्षों में अमेरिकी राजनीति की दिशा क्या रहती है।