डॉक्टर से अमेरिकी सीनेटर तक का सफर, ट्रम्प को चुनौती देने वाले अब्दुल अल-सैयद कौन हैं

मिशिगन से जीतकर अब्दुल अल-सैयद अमेरिकी सीनेट के पहले मुस्लिम सदस्य बनेंगे। जानिए मिस्र से जुड़े परिवार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और राजनीतिक सफर की पूरी कहानी।

डॉक्टर से अमेरिकी सीनेटर तक का सफर, ट्रम्प को चुनौती देने वाले अब्दुल अल-सैयद कौन हैं

➤ मिशिगन में जीत के बाद अमेरिकी सीनेट पहुंचने वाले पहले मुस्लिम बनेंगे अब्दुल अल-सैयद

➤ माता-पिता मिस्र से अमेरिका आए, ऑक्सफोर्ड से पब्लिक हेल्थ में डॉक्टरेट और कोलंबिया से मेडिकल डिग्री हासिल की

➤ ट्रम्प ने चुनाव प्रचार में ‘जिहादी’ कहा था, जीत के बाद अब्दुल ने ट्रम्प और जेडी वेंस पर कसा तंज


अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में मिशिगन से जीत दर्ज करने वाले अब्दुल अल-सैयद की कहानी अब अमेरिकी राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है। मिस्र से अमेरिका आकर बसे माता-पिता के घर जन्मे अब्दुल ने सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से लेकर राजनीति तक का सफर तय किया और अब अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बनने जा रहे हैं। 42 वर्षीय अब्दुल ने रिपब्लिकन उम्मीदवार और पूर्व सांसद माइक रोजर्स को हराकर मिशिगन की अहम सीनेट सीट अपने नाम की है। चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी पार्टी के कुछ नेताओं ने उनकी मुस्लिम पहचान और राजनीतिक विचारों को लेकर तीखे हमले किए थे। ट्रम्प ने उन्हें ‘जिहादी’ तक कहा था। लेकिन चुनाव जीतने के बाद अब्दुल ने अपने भाषण में ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पर तंज कसते हुए कहा कि जनवरी में शपथ के बाद ट्रम्प उन्हें उनके नाम के बजाय ‘सीनेटर’ कहकर बुला सकते हैं। 

कौन हैं अब्दुल अल-सैयद, कहां हुआ जन्म

अब्दुल अल-सैयद का पूरा नाम अब्दुलरहमान मोहम्मद अल-सैयद है। उनका जन्म 31 अक्टूबर 1984 को अमेरिका के मिशिगन राज्य के रोचेस्टर हिल्स में हुआ था। उनके माता-पिता मिस्र से आकर अमेरिका में बसे थे। इस तरह अब्दुल का जन्म और पालन-पोषण अमेरिका में ही हुआ।

उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि मिस्र से जुड़ी है, जबकि उनकी शिक्षा और पेशेवर जीवन अमेरिका में आगे बढ़ा। सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। मिशिगन में उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी, जिन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, आम परिवारों की आर्थिक स्थिति और राजनीति में कॉरपोरेट प्रभाव जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। 

मिशिगन यूनिवर्सिटी से ऑक्सफोर्ड और कोलंबिया तक की पढ़ाई

अब्दुल अल-सैयद ने मिशिगन यूनिवर्सिटी से बायोलॉजी और पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई की। इसके बाद उन्हें प्रतिष्ठित रोड्स स्कॉलरशिप मिली और उन्होंने ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक हेल्थ में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल डिग्री यानी एमडी भी प्राप्त की।

शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रशासन के क्षेत्र में काम शुरू किया। उनकी विशेषज्ञता स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और आम लोगों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने से जुड़ी रही। इसी अनुभव ने आगे चलकर उनके राजनीतिक एजेंडे को भी प्रभावित किया। 

30 साल की उम्र में बने डेट्रॉइट के स्वास्थ्य निदेशक

अब्दुल अल-सैयद को वर्ष 2015 में डेट्रॉइट शहर का स्वास्थ्य निदेशक नियुक्त किया गया था। उस समय उनकी उम्र करीब 30 साल थी। डेट्रॉइट मिशिगन का सबसे बड़ा शहर है और उस दौर में शहर वित्तीय संकट से उबरने की कोशिश कर रहा था।

स्वास्थ्य निदेशक के रूप में उन्होंने शहर की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को फिर से व्यवस्थित करने और बेहतर बनाने के प्रयासों की देखरेख की। वह 2017 तक इस पद पर रहे। इसके बाद 2023 से 2025 तक उन्होंने वेन काउंटी के स्वास्थ्य, मानव और वेटरन्स सर्विसेज विभाग के निदेशक के रूप में काम किया। इस विभाग के कार्यक्षेत्र में डेट्रॉइट भी शामिल है।

अब्दुल पॉडकास्ट होस्ट और लेखक भी रहे हैं। उनकी किताबों में Medicare for All: A Citizen's Guide शामिल है, जिसमें सभी नागरिकों के लिए सरकारी स्वास्थ्य बीमा की अवधारणा पर चर्चा की गई है। 

2018 में भी लड़ा था गवर्नर का चुनाव

अब्दुल अल-सैयद ने वर्ष 2018 में पहली बार मिशिगन के गवर्नर पद के लिए चुनाव लड़ने की कोशिश की थी। उस दौरान उन्हें डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील नेताओं का समर्थन मिला था। अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स और सांसद अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज भी उनके समर्थकों में शामिल थे।

हालांकि, वह डेमोक्रेटिक पार्टी की प्राइमरी में ग्रेचेन व्हिटमर से हार गए थे। इस हार के बाद भी उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी सक्रियता जारी रखी। वर्ष 2026 में उन्होंने मिशिगन से सीनेट की सीट के लिए चुनावी मैदान में वापसी की। अगस्त में पार्टी की प्राइमरी में उन्होंने सांसद हेली स्टीवंस को हराया और फिर मुख्य चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स का सामना किया। 

स्वास्थ्य सेवाएं, महंगाई और कॉरपोरेट प्रभाव रहे चुनावी मुद्दे

अब्दुल अल-सैयद ने अपने चुनाव प्रचार में आम परिवारों की आर्थिक परेशानियों को प्रमुखता दी। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को सभी के लिए सुलभ बनाने, आवास की लागत कम करने और राजनीति में बड़े कारोबारियों तथा अमीर दानदाताओं के प्रभाव को घटाने की बात कही।

उनके प्रमुख प्रस्तावों में Medicare for All यानी सभी नागरिकों के लिए सरकारी स्वास्थ्य बीमा व्यवस्था शामिल थी। इसके अलावा उन्होंने आम परिवारों की जेब पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने और स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता बनाने की वकालत की।

अब्दुल ने इजराइल को अमेरिकी सैन्य सहायता देने की नीति का भी विरोध किया। उन्होंने गाजा में इजराइल के सैन्य अभियान को ‘नरसंहार’ बताया और बिना शर्त अमेरिकी सैन्य सहायता बंद करने की मांग उठाई। इजराइल को लेकर उनके विचार चुनाव प्रचार के दौरान विवाद का विषय भी बने। 

ट्रम्प ने ‘जिहादी’ कहा, मुस्लिम पहचान को बनाया चुनावी मुद्दा

चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अब्दुल अल-सैयद पर तीखे हमले किए। ट्रम्प ने उन्हें ‘जिहादी’ और ‘रेडिकल जिहादी’ कहा तथा उनकी मुस्लिम पहचान को अपने चुनावी भाषणों में उठाया। उन्होंने 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए मतदाताओं से उनकी उम्मीदवारी को खारिज करने की अपील भी की थी।

रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज ने भी अब्दुल पर मुस्लिम ब्रदरहुड से संबंध होने का आरोप लगाया था। अब्दुल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह कभी भी उस संगठन के सदस्य नहीं रहे हैं और न ही कभी बनेंगे। उनके खिलाफ लगाए गए इन आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण सामने नहीं आया। डेमोक्रेटिक नेताओं ने भी चुनाव प्रचार में उनकी धार्मिक पहचान को निशाना बनाए जाने की आलोचना की थी। 

जीत के बाद बोले- जनवरी में मुझे सीनेटर कहकर बुला सकते हैं

मिशिगन में चुनाव जीतने के बाद अब्दुल अल-सैयद ने अपने समर्थकों को संबोधित किया। उन्होंने अपने भाषण में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को संबोधित करते हुए कहा, “जेडी, हबीबी। विडंबना देखिए कि जनवरी में संविधान के मुताबिक आपको ही मुझे सीनेटर पद की शपथ दिलानी होगी।”

दरअसल, अमेरिकी उपराष्ट्रपति सीनेट के अध्यक्ष भी होते हैं और नए सीनेटरों को शपथ दिलाने की संवैधानिक जिम्मेदारी उन्हीं की होती है। इसके बाद अब्दुल ने ट्रम्प पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि ट्रम्प को उनका नाम बोलने में परेशानी होती है, इसलिए शपथ के बाद वह उन्हें सिर्फ ‘सीनेटर’ कहकर बुला सकते हैं।

अमेरिकी सीनेट में मुस्लिम प्रतिनिधित्व का नया अध्याय

अब्दुल अल-सैयद की जीत अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व के लिहाज से ऐतिहासिक है। इससे पहले मुस्लिम अमेरिकी सांसद प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में चुने जा चुके हैं। कीथ एलिसन वर्ष 2006 में अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बने थे। वहीं, राशिदा तलैब और इल्हान उमर वर्ष 2018 में प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी जाने वाली पहली मुस्लिम महिलाओं में शामिल थीं।

अब मिशिगन से जीत के बाद अब्दुल अल-सैयद अमेरिकी सीनेट में पहुंचने वाले पहले मुस्लिम बनेंगे। उनकी जीत ने अमेरिका में धार्मिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी बहस को एक नया आयाम दिया है।