सिंधु का पानी रोका तो युद्ध की कार्रवाई मानेंगे: UN में शहबाज शरीफ की भारत को चेतावनी

शहबाज शरीफ ने UN महासभा में सिंधु जल और कश्मीर का मुद्दा उठाया। भारत ने राइट ऑफ रिप्लाई में आतंकवाद, PoK और पाकिस्तान की राजनीति पर जवाब दिया।

सिंधु का पानी रोका तो युद्ध की कार्रवाई मानेंगे: UN में शहबाज शरीफ की भारत को चेतावनी

➤ UN में शहबाज शरीफ ने सिंधु जल को लेकर भारत को दी चेतावनी
➤ कश्मीर का मुद्दा उठाया, भारत ने राइट ऑफ रिप्लाई में दिया जवाब
➤ पेटल गहलोत ने आतंकवाद और PoK समेत कई मुद्दों पर पाकिस्तान को घेरा


न्यूयॉर्क। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में अपने संबोधन के दौरान भारत के साथ संबंधों, सिंधु नदी के पानी और कश्मीर का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने या उसका रुख बदलने की किसी भी कोशिश को उनका देश ‘युद्ध की कार्रवाई’ मानेगा। शहबाज ने कहा कि पानी को हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए और भारत को इस मामले में कोई गलती नहीं करनी चाहिए। उनके इस बयान की अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी रिपोर्टिंग की है।

शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में कश्मीर का भी जिक्र किया। उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तान की ‘जगलर वेन’ यानी गर्दन की नस बताते हुए कहा कि दक्षिण एशिया को दोबारा 2025 जैसी टकराव की स्थिति में जाने से रोकने के लिए कश्मीर मुद्दे का समाधान जरूरी है। पाकिस्तान लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र समेत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाता रहा है। भारत लगातार पाकिस्तान के इन दावों को खारिज करता रहा है और जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा बताता है।

सिंधु जल संधि को लेकर शहबाज का बयान

शहबाज शरीफ ने कहा कि भारत की ओर से पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, बाधित करने या उसका रुख बदलने की कोई भी कोशिश पाकिस्तान के लिए ‘act of war’ मानी जाएगी। उन्होंने कहा कि नदियां देशों को पोषण देने का काम करें, उन्हें बांटने का नहीं।

उन्होंने सिंधु जल संधि को लेकर भारत के कदम को भी निशाना बनाया। शहबाज ने दावा किया कि भारत ने 2025 में दोनों देशों के बीच संघर्ष के बाद इस संधि को एकतरफा रोक दिया और इसके लिए कोई कानूनी आधार नहीं है। भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। भारत ने हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों की भूमिका का आरोप लगाया था।

पहलगाम हमले और 2025 के संघर्ष का भी जिक्र

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने पाकिस्तान की सेना की कार्रवाई का जिक्र करते हुए फील्ड मार्शल आसीम मुनीर की भूमिका की सराहना की।

शहबाज ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी जिक्र किया और कहा कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव को कम करने तथा बड़े संघर्ष को टालने में उनकी भूमिका रही। शहबाज के मुताबिक, ट्रंप की कोशिशों से दोनों देशों के बीच व्यापक टकराव टला।

हालांकि, भारत की ओर से अमेरिकी मध्यस्थता या तीसरे पक्ष की भूमिका के दावों को लेकर अलग रुख सामने आया है। भारत ने पहले भी कहा है कि भारत-पाकिस्तान के बीच किसी भी तनाव को लेकर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का दावा स्वीकार्य नहीं है।

इस्लामोफोबिया का मुद्दा भी उठाया

शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में दुनिया में बढ़ते इस्लामोफोबिया का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को नफरत भरी बयानबाजी, भेदभाव और हमलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मस्जिदों पर हमलों और कुरान के अपमान की घटनाओं को भी चिंता का विषय बताया।

भारत का जिक्र करते हुए शहबाज ने आरोप लगाया कि सीमा पार से प्रभावित विचारधारा धार्मिक नफरत को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने मॉब लिंचिंग, सांप्रदायिक हिंसा, धार्मिक स्थलों पर हमलों और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया।

ये आरोप पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के भाषण में लगाए गए दावे हैं। भारत ने अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की ओर से लगाए गए ऐसे आरोपों को खारिज किया है।

होर्मुज और बाब-अल-मंदेब को खुला रखने की अपील

शहबाज शरीफ ने होर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बताते हुए इन्हें खुला रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन रास्तों को देशों के बीच टकराव का माध्यम नहीं बनना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इन समुद्री मार्गों से दुनिया के कई देश जुड़े हैं और इनके बंद होने का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

भारत ने राइट ऑफ रिप्लाई में दिया जवाब

शहबाज शरीफ के संबोधन के बाद भारत की ओर से राइट ऑफ रिप्लाई के तहत जवाब दिया गया। संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के बयानों का जवाब देते हुए आतंकवाद, कश्मीर और पाकिस्तान के राजनीतिक तंत्र समेत कई मुद्दे उठाए। भारतीय पक्ष ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए उसके रिकॉर्ड का हवाला दिया।

भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की स्थिति का भी मुद्दा उठाया। भारतीय पक्ष ने वहां लंबे समय से जारी हिंसा, हत्याओं और लोगों के अधिकारों से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया।

सीमा पार आतंकवाद पर भारत का रुख

पेटल गहलोत ने कहा कि भारत सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के अधिकार का इस्तेमाल जारी रखेगा। भारत ने पाकिस्तान पर लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने के आरोप लगाए हैं। पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता रहा है।

भारतीय पक्ष ने आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के रिकॉर्ड का उल्लेख करते हुए ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में लंबे समय तक रहने का मुद्दा भी उठाया। भारत ने कहा कि आतंकवाद से जुड़े पाकिस्तान के दावों को उसके रिकॉर्ड के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

पाकिस्तान के लोकतांत्रिक तंत्र पर भी सवाल

भारत ने अपने जवाब में पाकिस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था और सेना की भूमिका का भी उल्लेख किया। भारतीय पक्ष ने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन और सत्ता व्यवस्था से जुड़े सवालों को उठाया।

भारत ने पाकिस्तान में धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यकों की स्थिति का मुद्दा भी सामने रखा। भारतीय पक्ष ने ईशनिंदा कानूनों, कट्टरता और धार्मिक अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान के दावों पर सवाल उठाए।

‘फॉर्म 47 सरकार’ का संदर्भ

भारतीय जवाब में ‘फॉर्म 47 सरकार’ शब्द का भी इस्तेमाल किया गया। यह शब्द पाकिस्तान की राजनीति में फरवरी 2024 के आम चुनाव के बाद विपक्ष की ओर से शहबाज शरीफ की सरकार के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है।

‘फॉर्म 47’ पाकिस्तान के चुनाव आयोग से जुड़ा आधिकारिक दस्तावेज है, जिसमें निर्वाचन क्षेत्र के संकलित चुनाव परिणाम दर्ज किए जाते हैं। विपक्ष ने 2024 के चुनाव के बाद परिणामों में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए थे और इसी राजनीतिक संदर्भ में शहबाज शरीफ की सरकार को ‘फॉर्म 47 सरकार’ कहा गया।

इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की ओर से भारत पर लगाए गए आरोप और भारत की ओर से पाकिस्तान को दिया गया जवाब दोनों देशों के अपने-अपने आधिकारिक और राजनीतिक दावों का हिस्सा हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा में दोनों पक्षों ने अपने-अपने रुख को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखा।