इजराइल के स्वतंत्रता दिवस पर PM मोदी और पायलट स्मित मच्छर जलाएंगे मशाल, नेतन्याहू ने दिया खास न्योता

भारतीय पायलट स्मित मच्छर की बहादुरी से प्रभावित नेतन्याहू ने PM मोदी और पायलट को इजराइल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल जलाने का न्योता दिया

इजराइल के स्वतंत्रता दिवस पर PM मोदी और पायलट स्मित मच्छर जलाएंगे मशाल, नेतन्याहू ने दिया खास न्योता

➤ कॉकपिट में हमले के बावजूद पायलट ने नहीं छोड़ा हौसला
➤ नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित मच्छर को बताया भारत-इजराइल का हीरो
➤ PM मोदी और स्मित मच्छर को स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल जलाने का न्योता


दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में अचानक ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया था। कॉकपिट में मौजूद भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर पर उनके को-पायलट ने हमला कर दिया। हालात इतने गंभीर हो गए कि विमान तेजी से नीचे की ओर जाने लगा, लेकिन घायल होने के बावजूद स्मित मच्छर ने हिम्मत नहीं छोड़ी। उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की, जिसके बाद बाहर मौजूद लोगों को अंदर पहुंचने और हमलावर को रोकने का मौका मिला। अब इस साहस के बाद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुद कैप्टन स्मित मच्छर से फोन पर बात की है और उन्हें भारत, इजराइल ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का हीरो बताया है।

नेतन्याहू ने बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी, सूझबूझ और मुश्किल परिस्थिति में शांत रहकर फैसला लेने की क्षमता की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि ऐसे बेहद कठिन हालात में भी पायलट ने जिस तरह स्थिति को संभाला, उससे कई लोगों की जान बची। इसी बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित मच्छर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजराइल के अगले स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने और समारोह की मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया।

नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित मच्छर से बातचीत में उस घटना की शुरुआत के बारे में भी पूछा। पायलट ने बताया कि घटना उस समय शुरू हुई, जब को-पायलट ने प्रार्थना करने की बात कही थी। स्मित मच्छर के मुताबिक, उन्हें यह असामान्य नहीं लगा, इसलिए उन्होंने को-पायलट की तरफ लगातार नजर रखने के बजाय विमान के सामने की ओर ध्यान रखा। कुछ मिनट बाद उन्हें पीछे से अचानक जोरदार वार महसूस हुआ।

स्मित मच्छर ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद विमान को कोई गंभीर नुकसान हुआ है। लेकिन जब लगातार वार होने लगे तो उन्हें समझ आया कि खतरा विमान से नहीं बल्कि कॉकपिट में मौजूद दूसरे व्यक्ति से है। इस स्थिति में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती कॉकपिट का दरवाजा खोलना थी।

हमले में घायल होने के बावजूद पायलट ने हार नहीं मानी। उन्होंने एक बार दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन हमलावर ने उसे दोबारा बंद कर दिया। इसके बाद स्मित मच्छर ने अपनी बची हुई ताकत लगाकर फिर दरवाजा खोलने की कोशिश की। दरवाजा खुलने के बाद बाहर मौजूद यात्रियों और क्रू के सदस्यों को स्थिति में हस्तक्षेप करने का मौका मिला और हमलावर को काबू करने की कोशिश शुरू हुई।

इस पूरी घटना के दौरान विमान की स्थिति भी बेहद गंभीर हो गई थी। फ्लाइट ने आपात स्थिति का सामना किया और बाद में सऊदी अरब के तबुक में आपात लैंडिंग कराई गई। घटना के बाद घायल कैप्टन स्मित मच्छर को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल वह संयुक्त अरब अमीरात में इलाज और रिकवरी के दौर से गुजर रहे हैं।

घटना को लेकर जांच भी जारी है। संयुक्त अरब अमीरात की ओर से इस मामले को गंभीर सुरक्षा घटना माना गया है और इसे कथित तौर पर आतंकी कृत्य बताया गया है। हालांकि घटना के पीछे की पूरी वजह और हमले की परिस्थितियों को लेकर जांच एजेंसियां तथ्यों को सामने लाने में जुटी हैं।

कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी की चर्चा अब भारत और इजराइल दोनों में हो रही है। नेतन्याहू ने उनसे बातचीत के दौरान उनके साहस की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों में धैर्य और निर्णय क्षमता का परिचय दिया। उन्होंने यह भी कहा कि स्मित मच्छर ने न केवल लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि दुनिया के सामने यह उदाहरण भी रखा कि संकट के समय साहस और सूझबूझ कितनी महत्वपूर्ण होती है।

सबसे खास बात यह है कि नेतन्याहू ने इजराइल के स्वतंत्रता दिवस समारोह की मशाल जलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैप्टन स्मित मच्छर को आमंत्रित किया है। नेतन्याहू ने इस सम्मान को इजराइल के स्वतंत्रता दिवस का बेहद महत्वपूर्ण सम्मान बताया और कहा कि यह आमतौर पर इजराइली नागरिकों को दिया जाता है। ऐसे में भारतीय पायलट को इस समारोह के लिए आमंत्रित किया जाना अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह पूरी कहानी केवल एक विमान में हुई आपात स्थिति की कहानी नहीं है। यह उस क्षण की कहानी है, जब एक पायलट खुद गंभीर खतरे में होने के बावजूद अपने पीछे बैठे यात्रियों की सुरक्षा के बारे में सोचता रहा। कॉकपिट में हमला, तेजी से बदलती विमान की स्थिति और खुद के घायल होने के बावजूद दरवाजा खोलने की कोशिश ने कैप्टन स्मित मच्छर को इस घटना का सबसे अहम चेहरा बना दिया।

अब दुनिया की नजर इस बात पर भी है कि जांच में इस हमले के पीछे की पूरी सच्चाई क्या सामने आती है। लेकिन फिलहाल एक बात साफ है कि उस उड़ान में मौजूद यात्रियों के लिए कैप्टन स्मित मच्छर का साहस संकट की घड़ी में सबसे बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया।