महापंचायत से पहले किसान नेताओं के घर पहुंची पुलिस!
शाहाबाद किसान महापंचायत से पहले यमुनानगर में किसान नेताओं के घर पुलिस पहुंचने का दावा किया गया है। धान खरीद और पोर्टल वेरिफिकेशन को लेकर तनाव बढ़ा।
➤ महापंचायत से पहले किसान नेताओं के घर पुलिस पहुंचने का दावा
➤ किसानों ने शाहाबाद जाने से रोकने की कोशिश का लगाया आरोप
➤ धान खरीद और पोर्टल वेरिफिकेशन को लेकर बढ़ा किसान संगठनों का विरोध
कुरुक्षेत्र के शाहाबाद में प्रस्तावित किसान महापंचायत से पहले यमुनानगर में पुलिस कार्रवाई को लेकर किसान संगठनों और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। किसान नेताओं का आरोप है कि किसानों को महापंचायत में शामिल होने से रोकने के लिए सोमवार तड़के उनके घरों तक पुलिस पहुंची। भाकियू यमुनानगर के डायरेक्टर मनदीप रोडछप्पर के घर सुबह करीब चार से पांच बजे के बीच पुलिस पहुंचने का दावा किया गया है। मनदीप ने घर के बाहर पुलिसकर्मियों के पहुंचने का सीसीटीवी फुटेज जारी करने की बात कही है। वहीं, भाकियू जिलाध्यक्ष संजू के घर पर भी सीआईए की दो गाड़ियां पहुंचने और तलाशी लिए जाने का आरोप लगाया गया है। किसान संगठन इसे महापंचायत में किसानों की भागीदारी रोकने की कोशिश बता रहे हैं, जबकि पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई और उसके कारणों को लेकर जांच जारी है।
भाकियू यमुनानगर के डायरेक्टर मनदीप रोडछप्पर के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब चार से पांच बजे पुलिस उनके घर के बाहर पहुंची। उन्होंने बताया कि घर के बाहर कई पुलिसकर्मी गेट खटखटाते और आवाज लगाते नजर आए। इसके बाद उन्होंने सीसीटीवी फुटेज जारी किया।
मनदीप का कहना है कि किसान अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्वक पंचायत में शामिल होना चाहते हैं। उनका आरोप है कि पुलिस की इस कार्रवाई का उद्देश्य किसानों को शाहाबाद में होने वाली महापंचायत में पहुंचने से रोकना है।
भाकियू यमुनानगर जिलाध्यक्ष संजू ने भी सोमवार सुबह पुलिस कार्रवाई का दावा किया। उनके अनुसार, उनके घर पर सीआईए की दो गाड़ियां पहुंचीं। संजू का आरोप है कि पुलिस ने घर की तलाशी ली और आसपास की गलियों में भी किसानों की तलाश की गई।
संजू ने कहा कि किसान अपनी धान की फसल की खरीद से जुड़ी समस्याओं को लेकर परेशान हैं और इन्हीं मुद्दों को लेकर शाहाबाद में पंचायत करने जा रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन किसानों को महापंचायत में पहुंचने से रोकने का प्रयास कर रहा है।
किसान नेताओं के मुताबिक, 23 सितंबर को हुई पंचायत के दौरान सरकार की ओर से 25 सितंबर से धान खरीद शुरू कराने का आश्वासन दिया गया था। किसान संगठनों का कहना है कि अभी तक कई किसानों की पोर्टल वेरिफिकेशन पूरी नहीं हुई है।
किसानों का दावा है कि जब तक वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, तब तक उन्हें अपनी फसल बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इसी समस्या को लेकर किसान संगठनों ने शाहाबाद में महापंचायत आयोजित करने का फैसला किया है।
किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने सोमवार सुबह शाहाबाद के शहीद ऊधम सिंह स्मारक पर किसानों के जुटने का आह्वान किया है। उन्होंने किसानों से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की है। पिछली कार्रवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने किसानों से अपने अधिकारों और मांगों को लेकर एकजुट रहने की बात कही है।
हालांकि, प्रदर्शन के दौरान किसी भी तरह की हिंसा या टकराव से बचना जरूरी है। किसानों की मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने और प्रशासन के साथ संवाद बनाए रखने पर ही स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सकता है।
महापंचायत से पहले किसान नेताओं के घर पुलिस के पहुंचने के दावों से किसान संगठनों और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ गया है। एक तरफ किसान संगठन धान खरीद और पोर्टल वेरिफिकेशन से जुड़ी समस्याओं को लेकर अपनी आवाज उठाने की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी तरफ प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है।
अब नजर शाहाबाद में होने वाली महापंचायत और उसके बाद किसान संगठनों की अगली रणनीति पर है। मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोपों और प्रशासन की भूमिका से जुड़े तथ्यों के सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
Akhil Mahajan