शी जिनपिंग को दो बार हार्ट अटैक , उत्तराधिकारी घोषित किया तो तख्तापलट का खतरा? तिब्बत के पूर्व निर्वासित PM का बड़ा खुलासा
तिब्बत के पूर्व निर्वासित PM लोबसांग सांगेय ने शी जिनपिंग को दो हार्ट अटैक आने का दावा किया और उत्तराधिकारी घोषित करने पर चीन में तख्तापलट की आशंका जताई
➤ लोबसांग सांगेय का दावा- शी जिनपिंग को दो बार आ चुका है हार्ट अटैक
➤ उत्तराधिकारी घोषित करने पर चीन में तख्तापलट का खतरा बताया, सत्ता के भविष्य पर उठाए सवाल
➤ जिनपिंग की सेहत, सैन्य अधिकारियों और चीन के सत्ता तंत्र को लेकर कई बड़े दावे किए
नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सेहत और उनके बाद सत्ता हस्तांतरण को लेकर तिब्बत की निर्वासित सरकार के पूर्व प्रधानमंत्री लोबसांग सांगेय ने कई बड़े दावे किए हैं। उन्होंने दिल्ली में न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत के दौरान कहा कि चीन के एक वरिष्ठ पूर्व अधिकारी से हुई मुलाकात में उन्हें बताया गया था कि जिनपिंग को तीन नहीं तो कम से कम दो हार्ट स्ट्रोक आ चुके हैं। हालांकि, यह दावा लोबसांग सांगेय के हवाले से सामने आया है और इसे उनकी ओर से दी गई जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
लोबसांग सांगेय ने यह भी दावा किया कि अगर शी जिनपिंग चीन में अपने उत्तराधिकारी का ऐलान करते हैं तो वहां तख्तापलट की स्थिति पैदा हो सकती है। उनके मुताबिक, जिनपिंग के सामने सत्ता के उत्तराधिकारी को लेकर ऐसा संकट है, जिसमें उत्तराधिकारी बनाना भी जोखिम भरा है और उत्तराधिकारी घोषित न करना भी चीन के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है।
किर्गिस्तान दौरे के बाद जिनपिंग की सेहत पर बढ़ीं चर्चाएं
अगस्त के अंत में शी जिनपिंग किर्गिस्तान पहुंचे थे। वहां विमान से उतरते समय सामने आए वीडियो में वह अपनी पत्नी पेंग लियुआन का हाथ कसकर पकड़े हुए धीरे-धीरे सीढ़ियां उतरते दिखाई दिए। इसके बाद कुछ लोगों ने उनके चेहरे को पीला और सूजा हुआ तथा उनकी चाल को अस्थिर बताया। इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर, खासकर तिब्बत, ताइवान और विदेशी चीनी समुदायों के बीच उनकी सेहत को लेकर अटकलें तेज हो गईं।
इसी घटनाक्रम को लेकर लोबसांग सांगेय से एक पॉडकास्ट में जिनपिंग के हाल के दौरों के दौरान उनके हाव-भाव के बारे में सवाल पूछा गया। उन्होंने कहा कि वह साल में एक बार ताईवान जाते हैं और लोगों से मुलाकात करते हैं। इसी बातचीत में उन्होंने जिनपिंग की सेहत और चीन के सत्ता तंत्र से जुड़ी कई बातें सामने रखीं।
वरिष्ठ चीनी अधिकारी से बातचीत का हवाला देकर किया हार्ट अटैक का दावा
लोबसांग सांगेय ने कहा कि वह यह नहीं बताएंगे कि वह अधिकारी कौन था, लेकिन चीन के एक बहुत वरिष्ठ अधिकारी से उनकी एक घंटे से ज्यादा समय तक मुलाकात हुई थी। उनके मुताबिक, इसी अधिकारी ने उन्हें बताया कि शी जिनपिंग को दो बार हार्ट स्ट्रोक आ चुका है।
उन्होंने जिनपिंग की हालिया तस्वीरों और वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि उनके चेहरे पर सूजन और चलने के अंदाज को देखा जा सकता है। लोबसांग सांगेय के अनुसार, जिनपिंग के काम का दबाव काफी ज्यादा है और इस दबाव का उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है।
उन्होंने आगे दावा किया कि जिनपिंग के दिमाग में पैदा हुए मेंटल फॉग की वजह से वह चौंकाने वाले फैसले ले रहे हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने चीन की सेना के वरिष्ठ जनरलों को हटाए जाने की बात कही। उनका कहना था कि इनमें से कई अधिकारियों की नियुक्ति खुद जिनपिंग ने की थी, लेकिन बाद में कई जनरल गायब हो गए और रक्षा मंत्री भी लापता हो जाते हैं।
चीन के सत्ता तंत्र पर भी लोबसांग सांगेय ने उठाए सवाल
चीन के अंदरूनी सत्ता तंत्र की जानकारी का हवाला देते हुए लोबसांग सांगेय ने कहा कि जिनपिंग का सिक्योरिटी गार्ड और मिलिट्री चीफ चीन के मंत्रियों से भी ज्यादा ताकतवर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिनपिंग एक तरह के क्लाउड में जी रहे हैं।
उनके इन दावों का केंद्र चीन में राष्ट्रपति के आसपास मौजूद सत्ता संरचना और निर्णय लेने की प्रक्रिया रही। लोबसांग सांगेय ने जिनपिंग की सेहत से जुड़े अपने दावों को चीन के शीर्ष सत्ता तंत्र में हो रहे बदलावों से भी जोड़कर देखा।
उत्तराधिकारी के सवाल पर बोले- जिनपिंग 'Emperor's dilemma' में फंसे
जब लोबसांग सांगेय से शी जिनपिंग के उत्तराधिकार की योजना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चीन में ऐसा कोई प्लान है। उन्होंने इसे 'Emperor's dilemma' यानी शहंशाह की दुविधा बताया।
उनके मुताबिक, अगर कोई बादशाह अपने क्राउन प्रिंस की नियुक्ति करता है तो चीन के इतिहास में ऐसी आशंका रही है कि वही क्राउन प्रिंस उसकी हत्या कर उसकी जगह ले सकता है। वहीं अगर बादशाह किसी उत्तराधिकारी की नियुक्ति नहीं करता तो वह अपने शासन को लंबा खींच सकता है, लेकिन इससे देश के लिए दूसरी तरह का संकट पैदा हो सकता है।
लोबसांग सांगेय ने कहा कि उत्तराधिकारी नहीं होने की स्थिति में सत्ता की लालसा रखने वाले लोगों के बीच संघर्ष बढ़ सकता है और इससे देश पंगु होने की स्थिति में पहुंच सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि ऐसी स्थिति में गृह युद्ध तक छिड़ सकता है। उनका कहना था कि चीन के इतिहास में ऐसा होता रहा है और संभवतः इसी वजह से जिनपिंग अपने उत्तराधिकारी की घोषणा नहीं कर रहे हैं।
चीन में उत्तराधिकारी घोषित करना क्यों बताया जा रहा है जोखिम भरा?
लोबसांग सांगेय की बातों में चीन की सत्ता व्यवस्था का ऐतिहासिक संदर्भ भी दिखाई देता है। उनका तर्क है कि उत्तराधिकारी घोषित करने से मौजूदा सत्ता के लिए खतरा पैदा हो सकता है, जबकि उत्तराधिकारी घोषित नहीं करने से सत्ता के भीतर अलग-अलग दावेदारों के बीच संघर्ष की स्थिति बन सकती है।
इसी दुविधा को उन्होंने जिनपिंग के सामने मौजूद सत्ता संकट के तौर पर पेश किया। हालांकि, उत्तराधिकारी को लेकर चीन की वास्तविक आंतरिक योजना सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है और लोबसांग सांगेय के ये दावे उनके द्वारा दी गई जानकारी और राजनीतिक आकलन पर आधारित हैं।
तिब्बत की निर्वासित सरकार कहां से करती है काम?
लोबसांग सांगेय तिब्बत की निर्वासित सरकार के पूर्व प्रधानमंत्री रहे हैं। तिब्बत के “प्रधानमंत्री” का पद वास्तव में सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (निर्वासित तिब्बती सरकार) के सिक्योंग, यानी राजनीतिक प्रमुख का पद होता है। वर्तमान में यह पद पेंपा सेरिंग के पास है और वह भारत के धर्मशाला में रहते हैं।
तिब्बत की निर्वासित सरकार के इतिहास की जड़ें 1950 के घटनाक्रम से जुड़ी हैं। 1950 में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने तिब्बत पर आक्रमण किया। इसके बाद 1951 में दबाव में 17-सूत्रीय समझौता हुआ, जिससे तिब्बत चीन का हिस्सा बन गया।
1959 में ल्हासा में विद्रोह हुआ। चीनी सेना के दमन के डर से दलाई लामा और हजारों तिब्बती भारत भाग गए। इसके बाद से निर्वासित तिब्बती सरकार भारत में काम कर रही है। चीन तिब्बत को अपना स्वायत्त क्षेत्र मानता है और निर्वासित सरकार को मान्यता नहीं देता। वहीं तिब्बती सरकार भारत से ही अपने संघर्ष को आगे बढ़ाती है।
जिनपिंग की सेहत से लेकर सत्ता हस्तांतरण तक चर्चा तेज
शी जिनपिंग की सेहत को लेकर सामने आए वीडियो और उसके बाद लोबसांग सांगेय के दावों ने चीन के शीर्ष नेतृत्व को लेकर चर्चा को नया आधार दिया है। एक तरफ उन्होंने जिनपिंग को दो बार हार्ट अटैक आने का दावा किया है, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने उनके उत्तराधिकारी की घोषणा को चीन के लिए संभावित सत्ता संघर्ष से जोड़ दिया है।
हालांकि, इन दावों में जिनपिंग की सेहत को लेकर कही गई बातें लोबसांग सांगेय के हवाले से सामने आई हैं। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध इस रिपोर्ट में चीन की ओर से इन दावों की पुष्टि का उल्लेख नहीं है। ऐसे में जिनपिंग की स्वास्थ्य स्थिति और उत्तराधिकार की योजना को लेकर कही गई बातों को दावे और राजनीतिक आकलन के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
Akhil Mahajan