मणिमहेश डल झील में आस्था की डुबकी,शिवधाम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
मणिमहेश डल झील में छोटे शाही स्नान के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। हरियाणा समेत कई राज्यों से पहुंचे भक्त, शुक्रवार रात 12:14 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा।
मणिमहेश डल झील में छोटे शाही स्नान के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
➤ हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली और जम्मू समेत कई राज्यों से पहुंचे हजारों श्रद्धालु
➤ शुक्रवार रात 12:14 बजे तक रहेगा छोटे शाही स्नान का शुभ मुहूर्त
भरमौर। उत्तर भारत की प्रसिद्ध धार्मिक यात्रा मणिमहेश यात्रा 2026 के दौरान जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भगवान शिव के धाम में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के भरमौर स्थित मणिमहेश डल झील में शुक्रवार को सुबह से ही श्रद्धालु पवित्र स्नान कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। छोटे शाही स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मणिमहेश पहुंची है।
मणिमहेश की पवित्र डल झील में स्नान को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। हिमाचल प्रदेश के अलावा पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, दिल्ली और जम्मू से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं। कठिन पहाड़ी रास्ते और ऊंचाई के बावजूद श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और पवित्र स्नान के लिए पैदल यात्रा कर रहे हैं।
शुक्रवार रात 12:14 बजे तक रहेगा छोटे शाही स्नान का शुभ मुहूर्त
छोटे शाही स्नान का शुभ मुहूर्त गुरुवार रात 2:26 बजे से शुरू हुआ और शुक्रवार रात 12:14 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में श्रद्धालु डल झील में पवित्र स्नान कर पुण्य अर्जित करने की धार्मिक मान्यता के साथ शिवधाम पहुंच रहे हैं।
पवित्र झील में आस्था की डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। जन्माष्टमी के इस विशेष अवसर पर मणिमहेश धाम में श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है।
13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है पवित्र डल झील
मणिमहेश डल झील समुद्र तल से करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई पर कैलाश पर्वत की तलहटी में स्थित है। सामने खड़ी कैलाश चोटी श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिक आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। जिला चंबा प्रशासन के अनुसार कैलाश चोटी की ऊंचाई करीब 18,564 फीट है।
धार्मिक मान्यताओं के कारण मणिमहेश को भगवान शिव के प्रमुख तीर्थस्थलों में गिना जाता है। हर वर्ष जन्माष्टमी और राधाष्टमी के अवसर पर यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। पवित्र झील में स्नान के बाद श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा करते हैं और कैलाश पर्वत के दर्शन कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं।
हड़सर से शुरू होती है 13 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा
मणिमहेश पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को हड़सर से करीब 13 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई पूरी करनी पड़ती है। हड़सर तक वाहन पहुंचते हैं, जबकि इसके आगे का सफर पैदल तय करना पड़ता है। कठिन पहाड़ी रास्ते में धनछो प्रमुख पड़ाव है, जहां श्रद्धालु कुछ देर रुककर विश्राम करते हैं।
धनछो के बाद रास्ता और चुनौतीपूर्ण हो जाता है। पहाड़ी चढ़ाई पार करने के बाद श्रद्धालु मणिमहेश डल झील तक पहुंचते हैं। झील से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले गौरी कुंड और शिव क्रोत्री धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल हैं। मान्यता है कि गौरी कुंड में माता पार्वती और शिव क्रोत्री में भगवान शिव ने स्नान किया था।
कई श्रद्धालु पूरी यात्रा पैदल ही पूरी कर रहे हैं। वहीं, बुजुर्गों और शारीरिक रूप से पैदल यात्रा करने में असमर्थ श्रद्धालुओं के लिए हेलीटैक्सी भी एक विकल्प है। प्रशासन ने इस वर्ष मणिमहेश यात्रा के लिए चार हेलीटैक्सी ऑपरेटरों के साथ करार किया है।
राधाष्टमी पर होगा बड़ा शाही स्नान
जन्माष्टमी के छोटे शाही स्नान के बाद अब श्रद्धालुओं की नजर राधाष्टमी के बड़े शाही स्नान पर है। यह स्नान 18 और 19 सितंबर को होगा। मणिमहेश यात्रा में राधाष्टमी का शाही स्नान सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पड़ावों में माना जाता है।
इस दौरान श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन के सामने यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने, पैदल मार्ग पर व्यवस्थाएं बनाए रखने और स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सुविधाओं को लगातार सक्रिय रखने की चुनौती भी रहेगी।
इस बार मौसम ने भी दिया श्रद्धालुओं का साथ
मणिमहेश यात्रा के दौरान इस बार मौसम अपेक्षाकृत अनुकूल रहने से श्रद्धालुओं को राहत मिली है। मौसम बेहतर होने के कारण पैदल ट्रैक पर आवाजाही सुगम बनी हुई है। प्रशासन की टीमें भी यात्रा मार्ग और प्रमुख पड़ावों पर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रही हैं।
एसडीएम भरमौर अजय कुमार सिंह के अनुसार जन्माष्टमी के शाही स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मणिमहेश पहुंचे हैं और डल झील में शाही स्नान जारी है।
पिछले वर्ष यात्रा के दौरान भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने श्रद्धालुओं की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। उस दौरान 25 हजार से अधिक श्रद्धालु भरमौर से मणिमहेश जाने वाले रास्ते में फंस गए थे। इस अनुभव को देखते हुए इस वर्ष प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बिना पंजीकरण यात्रा की अनुमति नहीं
मणिमहेश यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से भरमौर पहुंचने से पहले अपना पंजीकरण करवाने और पंजीकरण की रसीद अपने साथ रखने की अपील की है।
हड़सर बेस कैंप पर स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था भी की गई है। स्वास्थ्य जांच के बाद ही श्रद्धालुओं को आगे की यात्रा के लिए अनुमति दी जाती है। ऊंचाई और कठिन मौसम को देखते हुए प्रशासन ने यात्रियों से पर्याप्त तैयारी के साथ यात्रा करने को कहा है।
श्रद्धालुओं को गर्म कपड़े, रेनकोट, छाता, टॉर्च और मजबूत एवं आरामदायक जूते साथ रखने की सलाह दी गई है। पहाड़ी क्षेत्र में मौसम अचानक बदल सकता है, इसलिए यात्रियों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और जोखिम वाले स्थानों पर सावधानी बरतने की अपील की गई है।
19 सितंबर तक चलेगी मणिमहेश यात्रा
मणिमहेश यात्रा 2026 आधिकारिक तौर पर 19 सितंबर तक चलेगी। जन्माष्टमी के छोटे शाही स्नान के बाद अब राधाष्टमी के बड़े शाही स्नान को लेकर तैयारियां जारी हैं। आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।
मणिमहेश की यात्रा सिर्फ एक कठिन पहाड़ी ट्रेक नहीं है, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह भगवान शिव के प्रति आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक है। कठिन चढ़ाई, ठंडे मौसम और दुर्गम रास्ते के बावजूद श्रद्धालुओं के कदम डल झील की ओर लगातार बढ़ रहे हैं। पवित्र झील में स्नान और कैलाश पर्वत के दर्शन के बाद श्रद्धालु खुद को भगवान शिव के चरणों में पहुंचा हुआ महसूस करते हैं।
Akhil Mahajan